बस्ती। जिले ने दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान सौ फीसदी सफलता पाई है। यह सब कुछ संभव हुआ आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता से। 2,275 प्रशिक्षित आशा ने करीब सवा चार लाख घरों तक संदेशा पहुंचाया कि बुखार किसी भी प्रकार का हो लापरवाही भारी पड़ेगी।
दस्तक अभियान का चौथा चरण बुखार का मानसूनी सीजन शुरू होने से काफी पहले ही दस से 28 फरवरी के बीच चलाया गया था। पहली बार अभियान में मुस्कुराहट मॉडल का प्रयोग किया गया था।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी एलके पांडेय ने बताया कि अभियान में यूनीसेफ का अहम योगदान रहा। घर-घर घूम कर आशा कार्यकर्ताओं ने लोगों को बताया है कि अगर किसी भी प्रकार का बुखार हो तो प्रशिक्षित चिकित्सक को ही दिखाएं। लोगों को समझाया गया है कि सामान्य से दिखने वाले बुखार में भी स्वाइन फ्लू, इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी घातक बीमारियों की आशंका हो सकती है। बताया कि अगर लोगों ने आशा के दिए गए सुझाव पर गौर किया तो जिले में बीमारियों के रोकथाम में मदद मिलेगी। दस्तक अभियान में कुल 12 विभाग आपसी समन्वय से काम कर रहे थे। स्वास्थ्य विभाग नोडल की भूमिका में था।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियां
- जिले के 2,398 स्कूलों में रैली निकालकर बच्चों को और लोगों को बीमारियों के बारे में जागरूक किया गया।
- 1,235 गांवों में प्रधानों के माध्यम से जागरूकता अभियान चला।
- 1,235 ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण समिति की बैठकें हुईं।
- 89,724 शौचालय बनवाए गए।
- 6,176 नालियों की गांवों में सफाई हुई।
- शहर में 88 नालियों की सफाई की गई।
- 266 हैंडपंप और 250 प्लेटफार्म रिपेयर कराए गए।
- 872 हैंडपम्प पर मार्किंग की गई।
- 28 अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर एनआरसी भेजा गया।
- जिले के 72 शहरी वार्डों में फॉगिंग की गई।
- अब तक कुल 106 सुअर बाड़ा मालिकों को सेंसेटाइज किया जा चुका है।
दस्तक अभियान में जिला लगभग सौ फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया है। पहले और दूसरे दस्तक अभियान में तो जिले का प्रदेश में पहला स्थान था। इस बार भी लोगों को जागरूक किया गया है। बीमारियों के मामले में अगर लोगों ने व्यवहार परिवर्तन किया तो डेंगू, इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में काफी मदद मिलेगी।
- डा. जेएलएम कुशवाहा, सीएमओ, बस्ती