मात्र आठ शिक्षकों के भरोसे है एपीएन कॉलेज
आपसी खींचतान से कॉलेज के अस्तित्व पर लग रहा है ग्रहण
रमेश मिश्र
बस्ती। चार दशक पहले उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिले में एपीएन डिग्री कॉलेज की स्थापना की गई। लेकिन साल दर साल इसकी स्थिति दयनीय होती चली गई। वर्तमान में आठ शिक्षक ही महाविद्यालय की गाड़ी खींच रहे हैं।
यहां पर हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, इतिहास, समाज शास्त्र, राजनीति शास्त्र, भूगोल, रक्षा अध्ययन, शिक्षाशास्त्र, अर्थ शास्त्र के साथ विधि की कक्षाएं चलती थीं। इसके लिए 25 प्रोफेसरों की नियुक्ति हुई थी पर केवल आठ शिक्षक ही रह गए हैं। इसके कारण छात्र-छात्राओं की संख्या भी घट गई है। दो हजार छात्र-छात्राएं ही कॉलेज में पंजीकृत हैं। महत्वपूर्ण विषय हिन्दी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, संस्कृत, इतिहास के कोई शिक्षक नहीं हैं। इन विषयों में छात्रों का प्रवेश लिया गया है। लेकिन स्वयं पढ़ने का शपथ भी दिया है। इससे विद्यालय प्रशासन पर कोई दबाव न बना सके।
जिले का पहला महाविद्यालय है, जहां पर विधि की कक्षाएं शुरू की गई। 160 सीटों पर प्रवेश होता है। विधि की कक्षाओं के लिए पांच प्रोफेसर नियुक्त थे। इसमें अब सिर्फ तीन प्रोफेसर रह गए हैं। परास्नातक के लिए पांच विषयों की स्ववित्त पोषित कक्षाएं शुरू की गई हैं। इसमें हिंदी, राजनीति शास्त्र, इतिहास, रक्षा अध्ययन, शिक्षा शास्त्र शामिल हैं। इन विषयों के प्रत्येक छात्र से पांच हजार रुपये बतौर शुल्क जमा कराया जाता है। यही हाल बीकॉम की कक्षाओं का भी है।
कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. बीपी सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद कोई भी स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति न होने के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उनके जाने के बाद कॉलेज प्राचार्य के लिए खींचतान होने से महाविद्यालय की गाड़ी जस की तस स्थिति में खींची जा रही है। विद्यालय भवन की कई वर्षों से रंगाई-पुताई भी नहीं हो सकी है। कक्षाओं में अधिकतर पंखे खराब हो गए हैं। परिसर दिन भर छुट्टा पशुओं का चारागाह बना रहता है। विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के मंत्री डॉ. राजेंद्र बौद्ध ने कहा कि महाविद्यालय में सबसे ज्यादा समस्या चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की है। कई के सेवानिवृत्त होने के बाद किसी की नियुक्ति नहीं हुई। इससे साफ-सफाई की समस्या बनी हुई है। इस समय कॉलेज में आठ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। कॉलेज के पूर्व महामंत्री आदित्य त्रिपाठी ने कहा कि कॉलेज समस्याओं को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किया गया था। लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका। पूर्व सरकार के समय छात्र नेताओं की मांग पर कई योजनाओं के का शिलान्यास हुआ लेकिन कोई काम शुरू नहीं हो सका, जिसका विरोध जताने वाले कुुछ छात्र नेताओं पर एफआईआर तक हुई थी।
खंडहर बन गया है छात्र संघ
सबसे चितांजनक स्थिति यहां के छात्र संघ भवन की है जो कभी भी जमींदोज हो सकता है। छात्रसंघ भवन की मरम्मत की कोशिश भी नहीं हुई। न ही छात्र नेता इसके लिए आवाज उठाते हैं। केवल छात्र संघ के चुनाव के समय सभी को इस भवन की याद आती है।
कम शिक्षकों में चलाया जा रहा है काम : प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. असलम सिद्दीकी का कहना है कि शिक्षकों की भारी कमी तो है ही। फिर भी जो शिक्षक हैं उन्हीं में व्यवस्था करके सभी कक्षाएं चल रही हैं। इस मामले को आयोग को भेजा जा चुका है जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति हो जाएगी। चतुर्थ श्रेणी के नियुक्ति न्यायालय के विचाराधीन है जिसके कारण किसी की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। कॉलेज के सुंदरीकरण के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। शीघ्र ही कॉलेज का सुंदरीकरण कर दिया जाएगा।