संसाधन भरपूर, विशेषज्ञ हाथों के न होने से मजबूर
बस्ती।
करीब 20 एकड़ में फैले आलीशान ओपेक चिकित्सालय कैली में संसाधन तो भरपूर हैं लेकिन विशेषज्ञ नहीं होने से लाभ नहीं मिल पा रहा। कैली अस्पताल में हर रोज करीब तीन सौ मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं।
ओपेक देशों की मदद से कैली गांव में स्थापित 500 शैय्या के इस अस्पताल की कहानी वर्ष 1997 से शुरू हुई। तमाम उतार-चढ़ाव के बीच अस्पताल की बेहतरी का हर प्रयास केवल कागजी रह गया। हृदय रोग विभाग पर तो शुरुआती दौर से ही ताला लटक रहा है तो दंत रोग और महिला रोग विभाग को डॉक्टरों की कमी के चलते यहां से स्थानांतरित कर दिया गया। अस्पताल में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। विशेषज्ञ हाथ न होने के कारण तमाम अत्याधुनिक मशीनें चल ही नहीं सकीं।
वर्ष 1997 में हुआ था उद्घाटन
ओपेक देशों की मदद से स्थापित ओपेक चिकित्सालय कैली का निर्माण वर्ष 1985 से शुरू हुआ। 12 वर्ष बाद इसका उद्घाटन 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने किया। तब इसके नाम को लेकर भी अटकलें लगीं, मगर अस्पताल निर्माण की सहयोगी संस्थाओं ने इससे साफ मना कर दिया। नतीजतन, आनन-फानन मुख्यमंत्री ने 500 शैय्या युक्त अस्पताल का उद्घाटन कर दिया।
दो किमी सड़क से ठहर गई अस्पताल की सेवा
जिला अस्पताल से ओपेक चिकित्सालय कैली तक जाने वाला मार्ग करीब दो किमी है। इस मार्ग से यात्रा करना आसान नहीं है। गड्ढों में तब्दील हो चुके इस मार्ग की गिट्टियां बिखर गई हैं, जिससे जगह-जगह जलभराव है। मरीजों की मानें तो इस मार्ग से कैली जाने वाला सामान्य आदमी भी बीमार जो जाएगा। यही हाल सोनू पार से कैली की डेढ़ किमी सड़क का है। सड़क का यह दर्द महज मुख्य मार्ग तक ही नहीं बल्कि अस्पताल का भी मार्ग दयनीय दशा में है। अस्पताल प्रशासन की मानें तो कैली चिकित्सालय तक आने में मरीज कई बार सोचता है।
ये हैं अत्याधुनिक सुविधा
ओपेक चिकित्सालय में अत्याधुनिक सीटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रा साउंड, फिजियोथेरपी और पैथॉलाजी सेंटर है। इनमें चेस्ट एक्सरे मशीन तो खराब है, जबकि फिजियोथेरपी केंद्र की सभी मशीनें ठप हैं। पैथॉलाजी की सुगर सहित अन्य जांच की मशीन पिछले पंद्रह दिनों से ठप हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर का सहारा लेना पड़ रहा है।
इन विभागों में लगा है ताला
अस्पताल के हृदयरोग, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी विभाग पर शुरुआती दौर से ही ताला लटक रहा है। इन बीमारियों के लिए स्थापित कराई गई मशीनें जंक खा रही हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग की मशीनों को तो शासन ने वापस ले लिया है, जबकि दंतरोग विभाग को जौनपुर और महिला रोग विभाग को जिला महिला अस्पताल में स्थानांतरित किया जा चुका है।
43 के सापेक्ष मात्र 22 डॉक्टर
अस्पताल में संचालित सत्रह विभागों के लिए यहां कुल स्वीकृत पद 43 हैं। इसके सापेक्ष मात्र 22 डॉक्टरों की तैनाती है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि अस्पताल में स्वीकृत दो पदों के सापेक्ष एक भी चेस्ट फिजीशियन नहीं हैं। यही नहीं अस्पताल में जनरल सर्जन के तीनों पद रिक्त चल रहे हैं।
ऑक्सीजन यूनिट की पूरी हो रही जरूरत
अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए सेंट्रल यूनिट स्थापित की गई है। इसमें एक साथ 22 सिलेंडरों का उपयोग होता है। यह सभी हैबी सिलेंडर हैं। इसके अलावा अस्पताल में 56 सिलेंडरों की खेप मौजूद है।
हैंडओवर नहीं हो सका सीवरेज सिस्टम
अस्पताल में पानी के निकास की व्यवस्था के लिए सीवर ट्रीटमेंट सिस्टम स्थापित है, मगर तकनीकी कारणों से इसे निर्माण इकाई ने अस्पताल को हैंडओवर नहीं किया।
बालरोग विशेषज्ञ ने लिया चार्ज
अस्पताल में स्वीकृत तीन बाल रोग विशेषज्ञों के सापेक्ष दो डॉक्टरों की तैनाती थी। शुक्रवार को नए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन सारस्वत ने चार्ज ले लिया।
500 शैय्या में मात्र तीन सौ संचालित
ओपेक चिकित्सालय कैली को 500 शैय्या युक्त संचालन की घोषणा कर दी गई, मगर धरातल पर यह महज 300 शैय्या युक्त ही संचालित हो रहा है। इसके कारण अस्पताल के तमाम वार्डों पर ताला लगना बताया जा रहा है।
इनकी सुनिए
संतकबीर नगर जिले के सांथा निवासी केशरी लाल बुखार से पीड़ित हैं। वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, मगर यहां तो सुबह दस बजे से इंतजारी के बाद भी ओपीडी में डॉक्टर आए ही नहीं। क्यों नहीं आए? इसकी जानकारी भी उन्हेें दोपहर बारह बजे तक नहीं दी गई थी। डॉ एके राय के चैंबर के बाहर तमाम मरीज बैठे उनका इंतजार करते नजर आए। नगर थाना क्षेत्र के चंदो गांव से बेटे का इलाज कराने आईं विमला ने कहा कि वह डॉक्टर का सुबह से इंतजार कर रही हैं, मगर सर्जन का पता नहीं है। न ही उनके चैंबर पर कुछ लिखा गया है कि आज वे मिलेंगे अथवा नहीं। हालांकि, कुछ मरीजों ने बताया कि सर्जन की ड्यूटी ओटी में है। यानी वह मरीजों का ऑपरेशन कर रहे हैं। आंख की बीमारी से परेशान महसों निवासी चांदनी भी डॉ. वीपी त्रिपाठी से इलाज के लिए आई थीं, मगर उनका भी पता नहीं था। बताया गया कि उनकी आज ऑपरेशन में ड्यूटी है। रामभजन भी सर्जन को दिखाने आए थे, मगर डॉक्टर दोपहर तक ओपीडी में बैठे ही नहीं।
क्या कहते हैं सीएमएस
ओपेक चिकित्सालय कैली के सीएमएस एसके श्रीवास्तव कहते हैं कि अस्पताल के जो वार्ड बंद हैं उनका संचालन कराने के लिए डॉक्टरों की मांग शासन से की गई है। इसके अलावा जो मशीनें बंद हैं उनको संचालित कराने का प्रयास जारी है। कहा कि अभी चंद रोज पहले चार्ज लिया है, ऐसे में जो भी समस्या अस्पताल स्तर की है उसे निस्तारित की जा रही है। ओपीडी में मरीजों को बिना इलाज न लौटना पड़े इसके लिए व्यवस्था बना दी गई है। नेफ्रालॉजी यूनिट संचालित करने के लिए हरी झंडी मिली है, ऐसे में अस्पताल में व्यवस्था बना दी गई है। डायलेसिस मशीन भी शीघ्र आ जाएगी।