बस्ती। ईवीएम को वोट उगलने के मशीन की संज्ञा न दी जाए, इससे बचने के लिए निर्वाचन आयोग ने पूरी ताकत झोंक दी है। जनादेश के थर्ड अंपायर यानी वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के आसार बढ़ते जा रहे हैं। बंगलूरू के इलेक्ट्रॉनिक कॉरर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड संयंत्र में तैयार तीन हजार मशीनें आयोग ने भेजी हैं। जिसकी 14 इंजीनियरों की टीम प्रथम स्तर की जांच (एफएलसी) में जुट गई है।
जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि दो सौ के आसपास मशीनों का प्रतिदिन ट्रायल किया जा रहा है। यह प्रकिया शुरू करने से पहले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, प्रभारी अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी की मौजूदगी में प्रजेंटेशन किया गया था। इससे पहले 17 अक्तूबर को एम-3 टाइप के ईवीएम भेजी गई थी। इसमें 2885 नई कंट्रोल यूनिट (सीयू) और 3900 बैलट यूनिट (बीयू) थीं। 15 से 25 अक्तूबर के बीच जांच की जा चुकी है। जल्द ही मतदाताओं को इसके बारे में जागरुक किया जाएगा।
आयोग की तीसरी आंख
वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) को ईवीएम के साथ जोड़ा जाता है। वीवीपीएटी मशीन के तहत वोटर विजुअली सात सेकंड तक यह देख सकेगा कि उसने जो वोट किया है क्या वह मत उसके इच्छानुसार उसके प्रत्याशी को मिला है या नहीं। इस मशीन के जरिए मतदाता को प्रत्याशी का चुनाव चिह्न और नाम उसकी ओर से चुनी गई भाषा में दिखाई देगा। इससे मतदाता की जानकारी को प्रिंट करके मशीन में स्टोर कर लिया जाता है और विवाद की स्थिति में जानकारी को उपलब्ध कराकर समस्या को निपटा लिया जाता है।
टेंपर प्रूफ है एम-3 ईवीएम
भरोसा कायम रखने के लिए इस बार एम-थ्री टाइप की पूरी तरह से टेंपर प्रूफ ईवीएम प्रयोग होगी। किसी भी तरह की छेड़छाड़ पर उसी क्षण वोटिंग प्रक्रिया रुक जाएगी। सेल्फ डायग्नोसिस सॉफ्टवेयर सिस्टम में आई किसी भी गड़बड़ी की पहचान करने में सक्षम है। जो तुरंत डिस्प्ले पर मैसेज देने लगेगा। अगर बाहर से कंट्रोल या बैलेट यूनिट जोड़ने की कोशिश की गई तो ऑटोमैटिकली डिजिटल सिग्नेचर का मिलान करेगी। मिस मैच हुआ तो सिस्टम काम करना बंद कर देगा।