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याद की गई इमाम हसन-हुसैन की शहादत

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याद की गई इमाम हसन-हुसैन की शहादत
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बस्ती।
मुहर्रम की दसवीं पर जुलूस निकालकर मुस्लिम समुदाय ने इमाम हसन हुसैन की शहादत को याद किया। बाद में कर्बला में ताजिया को दफन कर दिया गया। देर रात तक मेला का भी विभिन्न स्थानों पर आयोजन हुआ।
पैकोलिया प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित 41 ताजिया को क्षेत्र के मौजूद कर्बला में दफन किया गया। बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार शहीद इमाम हसन-हुसैन की शहादत में जुलूस निकाला गया। ताजिया लेकर निकले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कर्बला में पहुंच उसे दफन कर दिया। क्षेत्र के लालगंज, रौतापार, कनेहटी, लोइयाभार, बैरवा, बारीघाट की करवला लालगंज, पसड़ा, भिटनी, बानपुर का ताजिया कर्बला बानपुर में, खोरिया, हिनौता के ताजिया को हिनौता स्थित कर्बला में जो जय विजय का पक्कवा बाजार के कर्बला रवला में दफन किया गया।
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सोनहा प्रतिनिधि के अनुसार रविवार को मोहर्रम का जुलूस निकाल शहादत को याद किया गया। इस दौरान बुलबुलहिया के अलावा रामनगर, खैरा, चौकवा, जगदीशपुर उर्फ नौगढ़वा, शाहपुर, सल्टौआ पोखरे पर मेला आयोजित हुआ। वाल्टरगंज प्रतिनिधि के अनुसार दोपहर में मुहर्रम का जुलूस निकला। ढोल तासों के बीच निकले जुलूस को लोगों ने रास्ता दिया। बक्सई चौराहे से वाल्टरगंज कस्बा होते हुए जुलूस कर्बला पहुंची, जहां उसे दफन कर दिया गया। इस दौरान मेले का भी आयोजन किया गया।
सल्टौआ प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के सिहबरा, रुदपुर, मुड़बरा, सिसवा बरुआर, जगतापुर, हसनापुर , चौकवा, गौहनिया, धौरपरा , खैरा के तजियादारों ने जुलूस निकाल कर कर्बला पर ताजिया को दफन किया।
बहादुरपुर प्रतिनिधि के अनुसार नगर बाजार एवं आस पास के तमाम ग्रामीण क्षेत्रों मे ताजियादारों ने मुहर्रम का जुलूस निकाला। तय समय सीमा के अनुसार ताजियादारों ने कर्बला पहुंचा ताजिया दफन कर दिया। विवाद को देखते हुए पुलिस मुस्तैद रही। थानाध्यक्ष डीके मिश्र पूरे समय व्यवस्था पर नजर जमाए रहे।
परशुरामपुर प्रतिनिधि के अनुसार थाना क्षेत्र के विभिन्न कर्बला में रविवार को ताजिया दफन किया गया। क्षेत्र के बेदीपुर, चकनूर, नरायनपुर, रिधौरा, हैदराबाद, परशुरामपुर सहित कुल 25 कर्बला स्थलों पर लगभग 450 ताजिया दफन किये गये। कर्बला स्थलों मेला भी लगा, जिसमें लोगों ने खरीदारी भी की।
पुलिस के हस्तक्षेप मान गए ताजियेदार
महराजगंज। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के ओझागंज बाजार में रास्ते के विवाद से नाराज मुस्लिम समुदाय के लोग ताजिया उठाने को तैयार नहीं थे। इसकी भनक जैसे ही लगी मौके पर पुलिस पहुंच गई। इसके बाद मान मनौवल का क्रम शुरू हो गया। बातचीत के बाद ताजियादार मुहर्रम का जुलूस निकालने को तैयार हो गए। थाना क्षेत्र ओझागंज बाजार में अशमत अली और जियाउल हसन के बीच ताजिया के रास्ते को लेकर कई सालों से विवाद चल रहा है। इसके चलते हर साल मुहर्रम का ताजिया उठाने को लेकर दोनों लोगों में विवाद होता है। इस साल भी दोनों लोग भिड़ गए और ताजिया उठाने से एक पक्ष ने इन्कार कर दिया। कप्तानगंज के एसओ रोहित प्रसाद ने कहा कि यह विवाद पुराना है। पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से मनाने के लिए दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर स्थिति सामान्य की गई। अब वहां स्थिति ठीक है।

या हुसैन की सदाओं की रही गूंज

बस्ती।
दसवीं मोहर्रम को कर्बला के शहीदों की याद में मातमी जुलूस निकाला गया। या हुसैन की सदाओं के बीच रविवार की शाम जुलूस कर्बला पहुंचा, जहां ताजियों को सुपुर्दे खाक किया गया। जुलूस में शामिल लोगों ने नौहा पढ़ा और मातम किया।
इमामबाड़ा खुर्शेद हसन से रविवार को मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस इमामबाड़ा शाबान मंजिल और स्टेट बैंक गांधी नगर स्थित हुसैनी मस्जिद होते हुए जिला अस्पताल स्थित कर्बला पहुंच कर समाप्त हुआ। इमामबाड़ा शाबान मंजिल में नमाज अदा की गई। जुलूस में शामिल युवाओं ने जंजीरों और छुरियों से मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया था। वह संदेश दे रहे थे कि अगर हम कर्बला के मैदान में होते तो नबी के नवासे पर अपनी जान न्यौछावर कर देते। कर्बला के दर्दनाक मंजर को बयान करने वाले नौहे हर किसी को आंसू बहाने पर मजबूर कर रहा था। दसवीं को ताजिए के साथ ही अलम और इमाम हुसैन की सवारी जुलजुनाह भी शामिल था। मौलाना मोहम्मद हैदर खां ने बताया कि आज ही के दिन यजीद के अनुयायी कथित मुसलमानों ने नबी के नवासे को उनके 72 साथियों के साथ तीन रोज का भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर दिया था। हमारा मानना है कि इंसानियत और इस्लाम की हिफाजत इमाम की शहादत की वजह से हो सकी है। मौलाना हैदर ने बताया कि ताजिये का प्रचलन भारतीय उपमहाद्वीप में है। जुलूस में जीशान रिजवी, अन्नू, शबीब हैदर, तकी हैदर, आले हसन, शम्स आबिद, सोनू, सुहेल हैदर, फरहत हुसैन, जावेद, हसनैन रिजवी, सिराजू, शमसुल हसन, इमाम अली, बाकर हुसैन, नजफी, मो. असलम, ताजवर हुसैन, साजिद, आसिफ, अतहर अजहर, शमीम हैदर आदि मौजूद रहे।
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गम और मातम के बीच दफन किए गए ताजिये
भानपुर। गम और मातम के बीच ताजियों को कर्बला पर ले जाकर दफन किया गया। तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर मेले का आयोजन किया गया। रामनगर कर्बला में रामनगर, बारहकोनी, बेईली, करैली, तकियाचक, मलपुरवा, पचासी, नरखोरिया, गांवों के कई छोटी बड़ी ताजियों को दफन किया गया। शंकरपुर, भोलापुर में सूफी संत हसनैन शाह वारसी गुलजार हुसैन वारसी, मौलाना हारून वारसी, गंगा सिंह, बब्लू पाण्डेय, राम सनेही चौहान के नेतृत्व में ताजिये का जुलूस निकाला गया। एसडीएस हरिश्चन्द्र सिंह, तहसीलदार जसीम अहमद, थानाध्यक्ष श्रीनाथ यादव शांति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद रहे। रामनगर में हजारों की भीड़ माथा टेक मन्नतें मांगी।
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