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खतरे के निशान पर घाघरा स्थिर

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खतरे के निशान पर घाघरा स्थिर
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विक्रमजोत।
दो दिन में 24 सेमी. बढ़ने के बाद घाघरा नदी खतरे के निशान से एक सेमी नीचे 92.720 मीटर पर स्थिर हो गई है। तेज धारा के चलते कल्याणपुर, सहजौरा व भरथापुर में कटान जारी है।
लोलपुर-विक्रमजोत बांध के पहले दो ठोकरों से नदी की धारा सीधे टकरा रही है। आशंका है कि स्परों के नोज को दोबारा भारी नुकसान हो सकता है। इसको लेकर बाढ़ खंड के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। दो दिन पहले नदी का जलस्तर कम होते ही घाघरा ने कटान शुरू कर दी। इससे किसान से लेकर बाढ़ कर्मी तक मायूस होकर देखते ही रहे। केशवपुर, कल्यानपुर, भरथापुर, रानीपुर, कठवनियां, भदोईं, बाघानाला, पड़ाव व सहजौरा पाठक के किसानों की जमीन नदी में समा रही हैं। लोग मजबूरन हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं। केन्द्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के अनुसार नदी का जलस्तर सोमवार को 92.72 पर स्थिर हो गया है। जलस्तर कम होने पर धार से कटान तेज हो जाता है। सुबह करीब नौ बजे पड़ाव में कटान के चलते एक बीघा खेत नदी की धारा में बह गया। वहीं, नदी सहजौरा गांव को बहा ले जाने पर आमादा है। बिजली के दो खंभे नदी में बह गए हैं। कल्यानपुर में केशवचन्द पाण्डेय के घर के बगल कटान हो रही है। भरथापुर के भौगोलिक रूप में रोज बदलाव हो रहा है। 1971 के स्पर के बगल का कुछ हिस्सा नदी में समा गया। काली मंदिर के पास नदी का दबाव बना हुआ है।
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कटान रोकने के उपाय फेल
दुबौलिया।
क्षेत्र के कटरिया-चांदपुर के पास सोमवार को भी कटान की स्थिति भयावह बनी रही। नदी ने बाढ़ चौकी के पास दोबारा कटान शुरू कर दी जबकि पहले से ही डेढ़ किमी. क्षेत्र में कटान का क्रम जारी है। नदी की धारा बंधे के समीप होने से बोल्डर धारा में समा जा रहे हैं। वहीं बोरी लगाने का क्रम चल रहा है। वह भी सफल नहीं हो पा रहा है। बाढ़ खंड के अधिकारी कटान के सारे उपाय करके थक चुके हैं पर नियंत्रण नहीं पा रहे। अभी भी ट्राली के माध्यम से मिट्टी और बोल्डर गिराने कार्य चल रहा है। ताकि बंधे को सुरक्षित रखा जा सके। नदी खलवा, चांदपुर, गौरा के पास लगातार कटान कर रही है। वैसे घाघरा का जलस्तर स्थिर बना हुआ है। बचाव कार्य में लगा ट्रैक्टर ट्रॉली भी पलट गई हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।
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राहत सामग्री के लिए गुस्सा
कलवारी। बाढ़ प्रभावित कुदरहा क्षेत्र के बैड़ारी एहतमाली गांव के लोग गुस्से में हैं। अधिकांश आबादी बंधे के दक्षिण बसी हुई है। नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण कुछ लोग बंधे पर शरण लिए हैं। इनके पास पालतू पशु हैं। वे मजबूरन पानी भरे रहने पर भी अपने घर को नहीं छोड़ पा रहे हैं। यहां के धर्मराज ने राहत सामग्री को लेकर मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। धर्मराज का कहना है कि बंधे पर रहने वाले करीब 25 लोगों को राहत सामग्री मिली है जबकि गांव में रहने वाले लगभग 300 लोगों को नहीं मिली है। नायब तहसीलदार अमर चन्द्र वर्मा ने बताया कि जो लोग बंधे पर शरण लिए थे। उन्हें राहत सामग्री दे दी गई है। अन्य लोगों को देने के लिए शासन को लिखा गया है। जैसे ही सामग्री की आपूर्ति होती है। वितरित कर दी जाएगी।
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