बस्ती। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के आह्वान पर बृहस्पतिवार को कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पर धरना देकर सरकार विरोधी नारे लगाए। धरना के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया।
मंच के अध्यक्ष मस्तराम वर्मा ने कहा कि दोहरी पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को बर्दाश्त नहीं है। ऐसे में अंग्रेजों के समय से सामाजिक सुरक्षा के तहत मिल रही पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगें स्वीकार नहीं किया तो 29 से 31 अगस्त तक कर्मचारी, शिक्षक व अधिकारी तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार करेंगे। संयोजक चंद्रिका प्रसाद सिंह ने कहा कि एक ओर सांसद, विधायक तीन-तीन पेंशन ले रहे हैं, जबकि पूरा जीवन सरकारी कार्य में लगा देने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों को पेंशनविहीन बनाया जा रहा है। इसके लिए सभी एकजुट होकर आवाज उठाएंगे। संघर्ष समिति के चेयरमैन तौलू प्रसाद व वाइस चेयरमैन शांतिभूषणनाथ त्रिपाठी ने कहा कि पेंशन हमारा अधिकार है, उसे पाने के लिए हर संघर्ष को हम तैयार हैं। इस मौके पर माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष मारकंडेय सिंह, अनिरुद्ध तिवारी, अरुणेश पाल, राम अधार पाल, मनोज कुमार यादव, राजेश कुमार यादव, बालकृष्ण ओझा, अंबिका पांडेय, इजहारुलहक, रामसूरत यादव सहित तमाम कर्मचारी नेता व कर्मचारी मौजूद थे।
एससी-एसटी एक्ट के विरोध में बंद कराया बाजार
सरकार के खिलाफ नारेबाजी की
विक्रमजोत। एससी-एसटी एक्ट के विरोध में बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय लोगों ने विक्रमजोत व छावनी कस्बे की दुकानों को सांकेतिक तौर पर बंद कराया। आंदोलनकारियों ने इस दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगाए। सवर्ण समर्थकों के आह्वान पर एकत्रित क्षेत्रीय लोगों ने एससी-एसटी एक्ट को सवर्ण जातियों के लिए घातक बताया। इन लोगों ने भारत बंद व एससी-एसटी विरोध को जायज ठहराते हुए बंदी का समर्थन किया। समर्थकों में सुधाकर तिवारी, सर्वजीत सिंह, माता प्रसाद, विजय पांडेय, मुरगऊ, विपिन कुमार, दिलीप तिवारी, संतोष अग्रहरि, सुरेंद्रनाथ मिश्र, प्रमोद तिवारी, जानकी शुक्ल, धनंजय दूबे सहित कई लोगों लोगों विक्रमजोत कस्बे में पहुंचकर दुकानों को बंद करने का आह्वान किया। इनके आह्वान पर अधिकांश दुुकानें बंद हो गईं। बंदी के दौरान कुछ व्यापारियों ने इसका विरोध किया, जिस पर पुलिस पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर वापस किया।