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सरकार पर अविश्वास का राजनीतिक ड्रामा

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सरकार पर अविश्वास का राजनीतिक ड्रामा
बुद्धिजीवियों ने कहा बेवजह उठा अविश्वास का मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। केंद्र की सरकार पर कांग्रेस के समर्थन में तेलगूदेशम ने अविश्वास प्रस्ताव पारित किया, जिस पर शुक्रवार को पूरे दिन सदन में बहस हुई। परिणाम सत्ताधारी दल के पक्ष में रहा और विपक्ष को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी। 325 के सामने विपक्ष महज 126 मत तक सिमट गया।
देश के सबसे महत्वपूर्ण सदन को जहां देश के महत्वपूर्ण निर्णय का अधिकार जनता देती है उसका एक दिन का समय केवल राजनीतिक ड्रामा व मनमानेपन की भेंट चढ़ गया। न तो किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो सकी और न कोई निर्णय हो सका। संसद केवल अपनी ताकत का एहसास कराने का मंच बन कर रहा गया। सदन में हुए इस प्रक्रिया पर बुद्धिजीवियों से अमर उजाला ने चर्चा की, पेश हैं अंश-
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शिक्षक कमल किशोर शुक्ल कहते हैं कि संसद में मोदी सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मजाक बन कर रह गया। यह संसद की गरिमा के खिलाफ है। विपक्ष सरकार की गलत नीतियों की आलोचना के बजाय विपक्ष स्वयं आलोचना का शिकार हो गया। अविश्वास जैसे गंभीर विषय को मजाक बनाकर रख दिया गया। यदि सरकार गलती करे तो उसकी जरूर आलोचना हो, मगर गरिमा बनी रहनी चाहिए।
अधिवक्ता कौशलेंद्र पाल ने कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव महज राजनीतिक ड्रामा बन कर रह गया। पूरी कार्रवाई केवल कांग्रेस की सोची-समझी चाल नजर आई। राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर चलने वाले सदन की कार्रवाई को राहुल गांधी जैसे नेता ने मजाक बना कर रख दिया। जिस सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए उसे कांग्रेस ने शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बना दिया।
व्यापारी बृजकिशोर कसौधन ने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास लाकर कांग्रेस व उसके समर्थित दलों ने यह साबित कर दिया कि उन्हें सदन की गरिमा का जरा भी ख्याल नहीं है। सत्ता के लालच में वे उच्च सदन की मर्यादा भी भूल गए। विपक्ष ने सदन में केवल यह साबित करने का प्रयास किया कि जो भी कार्य हो रहे हैं सब में गोलमाल है, मगर इसे सदन के मंच पर साबित करने में दिए गए तर्क बेमतलब रहे।
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वायुनंदन मिश्र ने कहा कि मोदी सरकार ने सदन में अपने तर्कों से कांग्रेस व विपक्ष को करारा झटका दिया ही। अपना बहुमत साबित कर यह बता दिया कि केंद्र सरकार आम जनता के विश्वास पर खरी उतर रही है। सदन में राहुल गांधी के वक्तव्य को सभी ने मजाक में लिया। सारा देश इनके तर्कों को सुनकर मजाक उड़ा रहा है। कांग्रेस जैसे बड़े दल के नेता का सदन में जो प्रस्तुति दी गई वह बेहद चिंताजनक है।
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