बस्ती। शरद पूर्णिमा की चांदनी से जगमगा रहे जिले के विभिन्न घाटों पर बृहस्पतिवार/शुक्रवार रात भर दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होता रहा। अमहट घाट पर ज्यादातर प्रतिमाएं विसर्जन की गईं। शहर के अलावा जगह-जगह मेले लगे। जिसमें गांव-कस्बों के ही नहीं भारी तादाद में शहरी भी शिरकत करने पहुंचे। जनमानस ने विसर्जन जुलूस और मेले का लुत्फ उठाया। एसपी संकल्प शर्मा दलबल के साथ रात भर निगरानी करते रहे।
गत वर्षों की परंपराओं से भी दो कदम आगे बढ़ते हुए आयोजकों ने पुलिस प्रशासन को जमकर छकाया। तमाम प्रतिमाएं नियत समय से देर में निकलीं। बावजूद इसके बिना किसी अवरोध के पूरा आयोजन संपन्न हुआ।
सुल्तानपुर जिले को छोड़कर सूबे के सभी जिलों में प्रतिमाओं का विसर्जन दशहरा तक हो जाता है। लेकिन यहां ग्रामीण तो दशहरा के आगे-पीछे प्रतिमा विसर्जित कर लेते हैं, लेकिन नगर थाने के पिपरागौतम और शहर में पूर्णिमा को विसर्जन करने की परंपरा कायम हुई। जो अब तक प्रासंगिक है।
ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिमाओं का भी हुआ विसर्जन
रुधौली/टिनिच/बनकटी। बृहस्पतिवार को रुधौली नगर पंचायत की चौदह दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। नौ मूर्तियों का आमी नदी में, शेष पांच मूर्तियां करमहिया के पास नहर में विसर्जित की जाएंगी। प्रभारी निरीक्षक कृष्ण देव सिंह के साथ एस आई नरायण लाल श्रीवास्तव, रेवती रमण यादव ने विसर्जन व मेले पर नजर बनाए रखा। बनकटी के सजनाखोर की प्रतिमाएं विसर्जित की गईं। टिनिच के महादेवा व गटरा पुल पर 27 मूर्तियों का विसर्जन किया गया। आमा से 11, चितरा से पांच, शिवगढ से दो, गटरा पुल पर व पंडितपुर, तिनहरी से निद्दीपुर, बजहिया धनघटी भदना खलवा बजहिया की प्रतिमाओं का विसर्जन महादेवा घाट पर किया गया।