दलालों के चंगुल में महिला अस्पताल
बस्ती।
जिला महिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की कमी को संविदा से पूरा कर लिया गया है। ओपीडी में डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है। मगर दलाल हाबी हैं। पढ़े-लिखे लोगों को भी ये दलाल ऐसी पट्टी पढ़ाते हैं कि वह कथित रूप से संचालित नर्सिंग होम में मरीज लेकर पहुंच जाते है। यदि कोई बचकर अस्पताल में पहुंच ही गया तो वहां भी दलालों की टीम डॉक्टरों के इर्द-गिर्द मंडराती रहती है। मरीज और उनके तीमारदार को बहला कर बाहर की दुकानों से दवा और जांच के लिए पटा लेते हैं।
महिला चिकित्सालय में दवा कराने आई गर्भवती कटरा निवासी सुशीला बताती हैं कि डॉक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने को कहा था मगर अस्पताल में डॉक्टर न होने की वजह से छह सौ रुपये देकर बाहर से जांच कराना पड़ा।
गनेशपुर की गर्भवती सीमा को डॅाक्टर ने जांच बताई। अल्ट्रासाउंड पहले ही कराई थी, जिसे डॉक्टर ने मानने से इन्कार कर दिया। सीमा को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। शुक्रवार को उनकी जांच रिपोर्ट देखी गई। सीमा बताती हैं कि डॉक्टर ने खून की कमी बताई है और आयरन की गोलियां बाहर से खरीदने की सलाह दे दी है।
गर्भवती पत्नी का इलाज कराने पहुंचे पुुरानी बस्ती के चाइपुरवा निवासी विजय ने कहा कि डॉक्टर तो अस्पताल की जांच पर भी विश्वास नहीं करते। दवाओं के लिए भी बाहर का ही सहारा है। कहा कि डॉक्टर ने खुद ही सलाह दी है कि वे सारी दवाएं बाहर से ही खरीदें अस्पताल की दवा उतनी कारगर नहीं है।
वाल्टरगंज निवासी गर्भवती सोनमती कहती हैं कि डॉक्टर ने जांच के लिए कहा था मगर पैथालॉजी से देरी की बात कह कर मना कर दिया गया। जांच के लिए सोमवार को बुलाया गया है। डॉक्टर से शिकायत की तो उन्होंने बाहर जांच कराने को कह दिया। कुछेक दवाएं भीतर से दी हैं तो आयरन और कैल्शियम बाहर से लेने के लिए कहा है। पूछने पर बताईं हैं कि यहां जो दवाएं हैं वह उतनी कारगर नहीं हैं। कटहापुर गांव निवासी गर्भवती रेखा को भी डॉक्टर ने बाहर से जांच और अल्ट्रासाउंड के लिए कहा है।
संविदा के भरोसे अस्पताल
महिला अस्पताल का संचालन संविदा के डॉक्टरों के सहारे है। यहां पद तो 15 हैं, मगर स्थायी तैनाती मात्र आठ डॉक्टरों की है। इनमें एक सीएमएस, तीन एनेस्थेटिक और एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि तीन स्थायी महिला डॉक्टर तैनात हैं। एक डॉक्टर को चार संविदा के डॉक्टरों को यहां से संबद्ध किया गया है। स्थायी डॉक्टर ही इमरजेंसी अटेंड करते हैं, जबकि संविदा के डॉक्टर महज ओपीडी का संचालन करते हैं।
भरपूर है ऑक्सीजन
महिला चिकित्सालय में ऑक्सीजन के दो अलग-अलग प्लांट हैं। इनमें एक प्लांट से एसएनसीयू संचालित होता है तो दूसरे से केवल ओटी में काम होता है। एसएनसीयू के लिए 24 सिलेंडर रखे जाते हैं, जबकि ओटी के लिए करीब 26 सिलेंडर हैं। इनमें से शुक्रवार को 17 सिलेंडर खाली थे। हर तीसरे दिन इसे मगहर स्थित केंद्र से अस्पताल प्रशासन खुद भरवाता है।
बंद है अल्ट्रासाउंड
महिला चिकित्सालय का अल्ट्रासाउंड सेंटर तकरीबन एक माह से बंद है। अत्याधुनिक मशीनों को ढंक दिया गया है। क्योंकि यह रेडियोलाजिस्ट की तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। ओपेक चिकित्सालय कैली के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आरके पासवान को यहां संबद्ध किया गया था मगर उनका भी स्थानांतरण संतकबीरनगर हो गया। ऐसे में मरीजों को बाहर से ही अल्ट्रासाउंड कराना मजबूरी बन गई है। यहां हर दिन तकरीब पचास मरीजों का अल्ट्रासाउंड जांच के लिए डॉक्टर सलाह देते हैं।
एंबुलेंस पार्किंग स्थल खाली नहीं
अस्पताल में 102 काउंटर बनाए गए हैं। यहां एंबुलेंस खड़े रखने की व्यवस्था है, मगर वाहन स्टैंड न होने के कारण यहां मोटर साइकिलें खड़ी हो जाती हैं, जिससे एंबुलेंस को इधर-उधर खड़ी करना पड़ता है।
125 बेड के अस्पताल में संचालित होता है 155 शैय्या
महिला चिकित्सालय में यूं तो वर्ष 2013 में बेडों की संख्या एक सौ से बढ़ाकर 125 की गई थी, मगर यहां 155 बेड संचालित किए जा रहे हैं। इसमें जहां एसएनसीयू के 15, नये प्राइवेट वार्ड 15 के अलावा इधर-उधर भी बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जाता है।
अस्पताल से बिना बताए गायब हो चुके हैं 200 से ज्यादा मरीज
महिला चिकित्सालय में दलालों का काकस कितना सक्रिय है यह अस्पताल के रिकॉर्ड को देखकर आसानी से पता लगाया जा सकता है। वर्ष भर के भीतर यहां करीब दो सौ मरीज बिना बताए रातों-रात गायब हो गए। इन्हें दलालों के काकस ने कथित नर्सिंग होमों में पहुंचा दिया। हालांकि, इसको लेकर वर्ष भर पूर्व जांच पड़ताल की गई थी, मगर राजनीतिक दबाव के चलते इस फाइल को दबा दिया गया और काकस अपना काम आज भी कर रहा है।
विद्युत पर संकट, 40 लाख बकाया
चिकित्सालय में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था की गई है, मगर बिजली पर अब संकट खड़ा हो गया है। कभी भी यहां की बिजली गुल हो सकती है। क्योंकि अस्पताल पर चालीस लाख रुपये बकाया है और विभाग ने इसे जमा न करने की दशा में आपूर्ति ठप करने की भी चेतावनी दे दी है।
नियतन के सापेक्ष तैनात हैं पैरा मेडिकल
चिकित्सालय में नियतन के सापेक्ष पैरा मेडिकल कर्मियों की तैनाती है। यहां स्टाफ नर्स 19, फार्मासिस्ट पांच व एक लैब टेक्नीशियन का पद है। जो यहां तैनात हैं।
लार्ड डफरिन ने 1937 में रखी थी आधारशिला
महिला चिकित्सालय की स्थापना 1937 में लार्ड डफरिन ने रखी थी। उस समय यह महज छोटा सा पीएचसी था। धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ी तो इसे जिला महिला अस्पताल का दर्जा मिल गया।
जर्जर है पुराना भवन
महिला चिकित्सालय का वह पुराना भवन आज भी सेवा में है। यहां प्रसूति गृह के अलावा वार्ड भी संचालित होते हैं। यह अलग बात है कि समय-समय पर इसकी मरम्मत कराई जाती रही है। इधर, पिछले एक दशक में चिकित्सालय में तीन नए भवन भी बनाए गए, मगर उनमें एक में कार्यालय तो दूसरे में टीकाकरण का कार्य संपादित होता है।
यहां नौ विभाग होते हैं संचालित
महिला चिकित्सालय में कुल नौ विभाग संचालित होते हैं। इसमें पैथॉलाजी, पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड, औषधि विभाग के अलावा प्राइवेट और पेईंग सहित पांच वार्ड हैं। इसके अलावा एसएनसीयू भी चिकित्सालय में ही संचालित होता है।
इमरजेंसी प्रभावित
महिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की कमी का असर इमरजेंसी सेवा पर है। चार स्थायी डॉक्टरों की ड्यूटी बदल-बदल कर लगाई जाती है, जिससे इन डॉक्टरों पर ओपीडी के साथ अतिरिक्त बोझ है।
बोले सीएमएस
अस्पताल के सीएमएस डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था वास्तव में ठीक नहीं है। डॉक्टरों की कमी है तो पुराने भवन में चल रहे अस्पताल को फिर से व्यवस्थित कराना होगा। क्योंकि यहां नालियां चोक हो गई हैं, जिससे शौचालय आदि बंद करने पड़ गए हैं। रही दलालों की बात तो उन पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है। एक साथ अस्पताल को ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसे में धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था पटरी पर लाई जाएगी।
सीएमओ के निरीक्षण में गायब मिले कर्मी
बस्ती।
जिला क्षय रोग अस्पताल और क्लीनिक का निरीक्षण शुक्रवार को सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने किया। इस दौरान चिकित्सालय में जहां कई कर्मी अनुपस्थित पाए गए वहीं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसएन वैश्य लंबे समय से बिना बताए अनुपस्थित थे। इन स्थितियों को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने अनुपस्थित कर्मियों का वेतन रोकने और डॉ. वैश्य को टीवी क्लीनिक में प्रतिदिन बैठने का निर्देश दिया है।
सुबह 10:10 बजे सीएमओ डॉ. कुशवाहा सीधे क्षय रोग अस्पताल में पहुंच गए। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वैश्य बिना सूचना के गायब मिले वहीं अस्पताल में तब तक 32 मरीजों का पंजीकरण कराया जा चुका था। अस्पताल में डॉ. विजय गौतम और संविदा चिकित्सक डॉ. प्रियंका गुप्ता मौजूद थीं। डॉ. गौतम दो मरीज देख चुके थे, जबकि डॉ. गुप्ता एक भी मरीज तब तक नहीं देख पाई थी। सीएमओ ने तत्काल उपस्थित पंजिका का अवलोकन किया तो पता चला कि बीसीजी टेक्नीशियन राजेंद्र कुमार वर्मा अनुपस्थित थे, जबकि इसी पद पर तैनात रहमतुल्लाह एक जनवरी 2017 के पूर्व से ही अनुपस्थित चल रहे हैं। वरिष्ठ सहायक मोहम्मद असलम सिद्दीकी के आकस्मिक अवकाश का आवेदन अस्वीकृत पाया गया, मगर वे अवकाश पर थे। इसके अलावा संविदा लेखाधिकारी बृजेश यादव भी गायब पाए गए। संविदा के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर अखिलेश कुमार चतुर्वेदी निरीक्षण के दौरान ही पहुंचे। सीएमओ ने सफाई व्यवस्था को चाक-चौबंद करने का निर्देश दिया। सभी मरीजों का एक्सरे कराने के सीएमओ के निर्देश पर डॉक्टर ने मना किया। उनका तर्क था कि अनावश्यक रूप से रेडिया ऐक्टिव किरणें शरीर में जाएंगी, जिससे मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होगी। सीएमओ ने डॉ. वैश्य सहित सभी अनुपस्थित कर्मियों का वेतन रोक दिया है।
नर्सों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप, कार्य बहिष्कार
महसो।
ओपेेक चिकित्सालय कैली में शुक्रवार को स्टाफ नर्सों ने सीएमएस डॉ. सुमेश श्रीवास्तव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कारण यह कि सीएमएस ने एक दिन पूर्व नर्सों की ड्यूटी में तब्दीली कर दी थी। नौ बजे एक साथ नर्सों ने कामकाज ठप कर दिया और विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। इसके चलते अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। आंदोलन स्थल पर पहुंचे नर्सेज संघ के पदाधिकारियों ने निदेशक और सीएमएस से वार्ता की। वार्ता के बाद आंदोलनकारी फिर से काम पर लौट आए।
सीएमएस डॉ. श्रीवास्तव ने एक दिन पूर्व नर्सों की ड्यूटी बदलते हुए इमरजेंसी मेेें एक-एक नर्स को लगाया। वार्डों के चालीस-चालीस मरीजों के लिए महज एक नर्स से काम चलाने की व्यवस्था का विरोध उसी समय से दबी जुबान शुरू हो गया था, मगर शुक्रवार को यह विरोध सामने आ गया। सुबह नर्सें ड्यूटी पर पहुंचीं तो आपस में सलाह करने के बाद निदेशक डॉ. अतुल कुमार के पास पहुंचीं। यहां उन्होंने अपनी समस्या बताई। निदेशक ने तत्काल सीएमएस को बुलाया लेकिन सीएमएस दो घंटे तक वहां आए ही नहीं। समस्या दूर होते न देखकर नर्सों ने अस्पताल में वापस लौट कर आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन की सूचना मिलते ही मौके पर नर्सेज संघ के पदाधिकारी भी पहुंच गए और आंदोलनकारी नर्सों की समस्याएं जानीं। इसके बाद अधिकारियों से बातचीत किया, जिस पर बात बन गई। इसके बाद वे काम पर लौट आईं। निदेशक डॉ. कुमार ने कहा कि नर्सों की समस्याएं दूर कर दी गई हैं। वे काम पर लौट गईं।
निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की जांच करने पहुंचे
महसो।
रामपुर में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की स्थिति देखने शुक्रवार को सांसद हरीश द्विवेदी, विधायक महादेवा रवि सोनकर, निर्माण इकाई के निदेेशक विश्वदीपक मय दलबल पहुंच गए। यहां उनके साथ डीएम अरविंद सिंह और एसपी संकल्प शर्मा के अलावा अन्य अधिकारी भी रहे। निदेशक ने ग्रामीणों से निर्माण को लेकर बातचीत की। इस दौरान लोगों ने ठेकेदार पर आरोप लगाए।
दोपहर एक बजे दल-बल सहित पहुंची टीम से ग्रामीणों ने कहा कि ठेकेदार अभद्रता करते हैं। जिनका आवास मेडिकल कॉलेज की परिधि में आ गया है उन्हें आवास दिया जाना है, मगर वह आवास मानकविहीन बनाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने डीएम से शौचालय न होने की भी शिकायत दर्ज कराई, जिस पर डीएम ने प्रधान के पति अब्दुल वहीद को प्रधान से सूची लेकर प्रशासन को सौंपने का निर्देश दिया है।