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यहां ओपीडी पांच दिन फार्मासिस्ट के भरोसे

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खाली पड़ी चिकित्सक की कुर्सी। - फोटो : amar ujala
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गौर। पीएचसी हलुआ पर स्वास्थ्य सेवाएं कागजी हैं। यहां मिलने वाली सुविधाओं से मरीज वंचित है। पीएचसी की ओपीडी पिछले एक वर्ष से सप्ताह में पांच दिन फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित होती है। यहां सप्ताह में महज दो दिन डॉक्टर मिलते हैं। बाकी दिन मरीज डॉक्टर के इंतजार में मारे-मारे घूमते हैं। कर्मचारियों व संसाधनों की कमी से व्यवस्था जूझ रही है। दूरदराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज बैरंग लौटना पड़ता है।
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बृहस्पतिवार को 11:15 बजे पीएचसी हलुआ का हाल जानने अमर उजाला टीम पहुंची। अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर की कुर्सी खाली मिली, जबकि बगल के कक्ष में एनएमए विवेकानंद शुक्ल, वार्ड ब्वॉय रविश मणि त्रिपाठी, एलए भारतेंद्र कुमार राम त्रिपाठी मौजूद मिले। ये सभी कर्मचारी कुछ मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर इलाज के लिए फार्मासिस्ट की प्रतीक्षा कर रहे थे। लेकिन 11:30 बजे तक अस्पताल पर तैनात फार्मासिस्ट रामतौल जायसवाल नहीं पहुंचे थे। एक वर्ष पूर्व यहां पर तैनात प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत कुमार कुशवाहा का स्थानांतरण पीएचसी वाल्टरगंज हो गया, तब से किसी डॉक्टर की तैनाती यहां नहीं हो सकी है। क्षेत्र के लोगों की मांग पर सीएमओ ने सप्ताह में दो दिन डॉक्टर अजीत कुमार कुशवाहा को अटैच कर दिया। बाकी दिनों में फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल की जिम्मेदारी छोड़ दी गई है। वैसे तो नियतन के मुताबिक यहां दो चिकित्सक से लेकर अन्य कर्मचारियों व संसाधनों की सुविधा होनी चाहिए, मगर ऐसा है नहीं। यही नहीं अस्पताल तक सड़क भी नहीं है। पगडंडी के सहारे मरीजों का आना-जाना होता है। इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके मरीज क्षेत्र के उकरहा गांव की वंदना, हलुआ बाजार की निर्मला, सिरसिया गांव की अफसरजहां, सरदा हरिनारायण शुक्ल गांव के मुस्कान भारती, आइला कला के राम सुरेश व सिरसिया गांव के एजाज खान ने बताया कि पिछड़े क्षेत्र का यह इकलौता अस्पताल है। जो लगभग एक लाख की आबादी से जुड़ा हुआ है। बावजूद इसके यहां मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।  

जांच की नहीं है कोई सुविधा 
मरीज राम सुरेश, वंदना, निर्मला ने बताया कि इतने बड़े आबादी वाले अस्पताल पर जांच की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों को छोटी सी जांच के लिए जिला अस्पताल या फिर 15 किलोमीटर दूर गौर सीएचसी जाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी प्रसव कराने को लेकर होती है। कोई सुविधा न होने से मरीजों को जिला अस्पताल की दूरी तय करनी पड़ती है। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने बताया कि अस्पताल पर सुविधाओं के लिए बातचीत चल रही है। डॉक्टर की तैनाती एवं कुछ अन्य सुविधाएं बहुत जल्द अस्पताल को उपलब्ध होने वाली है।
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