अब कुष्ठ रोगियों के परिवार को भी आरसीन की डोज
एक वर्ष में 147 कुष्ठ रोगी हुए चिह्नित
अमर उजाला ब्यूरो।
बस्ती। एक वक्त ऐसा था कि जब लोग कुष्ठ रोग को अभिशाप मानते थे, लेकिन यह रोग अब कल की बात होगी। क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग इसके समूल नाश के लिए अभियान चला रहा है। कुष्ठ रोग पीड़ितों के परिवार को रोग से बचाने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग उन्हें आरसीन की डोज देगा। कुष्ठ रोग की दवा लगभग सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है। इस रोग को दो कैटेगरी में बांटा गया है। जो लोग इस रोग से अधिक प्रभावित होते हैं, उन्हें एक वर्ष तक नियमित एमडीटी नामक दवा खानी होती है, कम प्रभावित लोग इस दवा को छह माह तक खाते हैं। इसके बाद यह रोग समाप्त हो जाता है और रोगी सामान्य जीवन जी सकता है।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में कुष्ठावस्था पेंशन योजना की भी शुरुआत की है, जिसके तहत इस रोग से दिव्यांग हुए लोगों को 2500 रुपये दिए जाने का भी प्रावधान है। वैसे तो 1980 के दशक के प्रारंभ में बहु औषधि उपचार मल्टी ड्रग थेरेपी यानी एमडीटी की उपलब्धता से पहले तक समुदाय के भीतर इस बीमारी का निदान और उपचार पाना संभव नहीं था। वर्ष 2000 के आंकड़ों को यदि देखा जाए तो जनपद में इस रोग से हर माह सैकड़ों लोग प्रभावित होते थे, लेकिन स्वास्थ्य महकमा के अथक प्रयास के बाद आज इस पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा सिमटकर 147 पर आ गया है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि कुष्ठ रोग के कारण पूरी दुनिया में स्थायी रूप से दिव्यांग हो चुके व्यक्तियों की संख्या दो से तीन मिलियन के बीच थी, पिछले 20 वर्षों में पूरे विश्व में 15 मिलियन लोगों को कुष्ठ रोग से मुक्त किया जा चुका है। हालांकि, यदि इस रोग से प्रभावित व्यक्ति 20 दिन से ऊपर किसी समूह में रहा हो तो अन्य लोगों को भी इस रोग से प्रभावित होने की आशंका रहती है। स्वास्थ्य विभाग ने इससे बचने के लिए अब कुष्ठ रोगियों के परिजनों को दो अक्तूबर से आरसीन देना शुरू कर दिया है, इसके सेवन से इस रोग के प्रभाव से बचा जा सकता है।
इनकी सुनिए
कुष्ठ रोग अब भारत में समाप्ति की ओर है, इसके लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, इस रोग से प्रभावित लोगों के परिजनों को अब आरसीन दवा दी जाएगी, साथ ही प्रभावित क्षेत्र को भी चिह्नित कर, इस दवा का वितरण भी किया जाएगा।
-डॉ. जेएलएम कुशवाहा, सीएमओ बस्ती।