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खाद्यान्न का लाभ पाते हैं 16.93 लाख कार्ड धारक

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खाद्यान्न का लाभ पाते हैं 16.93 लाख कार्डधारक
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जिले में संचालित हैं 1377 दुकानें, माह में 5.91 लाख क्विंटल गेहूं व 4.08 लाख क्विंटल चावल की उठान
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सार्वजनिक वितरण प्रणाली का जिले में बड़ा कारोबार है। यहां कुल 1377 कोटा दुकानों से 16.93 लाख पात्रों को लाभ मिलता है। इसके लिए कुल 5.91 लाख गेहूं तो 4.08 क्विंटल चावल की उठान होती है। योजना को अंत्योदय योजना व पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को लाभ दिया जाता है। इस योजना में अनुदान की राशि केंद्र सरकार स्वयं वहन करती है।
जिले में दो रुपये किलो गेहूं व तीन रुपये किलो चावल कोटा की दुकानों से गरीब पाते हैं। इस योजना का संचालन केंद्र सरकार करती है। खाद्य एवं पूर्ति विभाग के अधिकारियों की मानें तो जो गेहूं सरकार दो रुपये किलो गरीबों को उपलब्ध कराती है उसकी वास्तविक कीमत 24 रुपये के जबकि चावल की कीमत 35 रुपये के आसपास भुगतान करती है। इधर, प्रदेश में खाद्यान्न माफिया का पीडीएस में बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटा की दुकानों को बंद करने का एलान किया है। उनकी इस घोषणा से जहां कोटेदार हलकान हैं, वहीं, खाद्यान्न माफिया भी परेशान हो गए हैं। हालांकि, अभी यह निर्णय आना बाकी है, मगर अभी से ही कोटेदार नए काम की तलाश में जुट गए हैं।
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बोले उपभोक्ता और कोटेदार
परेवा के पात्र गृहस्थी के कार्डधारक राम कवल ने कहा कि सरकार की मंशा चाहे जो भी हो, मगर यह नई व्यवस्था गरीबों के लिए ठीक नहीं होगी। क्योंकि अभी तो खाद्यान्न मिलता है, जिससे परिवार पल रहा है। अनुदान मिलने लगेगा तो तमाम दुष्प्रवृत्तियां पनपेंगी।
पात्र गृहस्थी के कार्ड धारक राम तीरथ ने कहा कि जो राशन सौ रुपये से कम में मिल जाता है उसके लिए पांच सौ का इंतजाम कहां से करेंगे। कोटेदार तो उधार भी दे देता है। बाजार में ऐसा संभव नहीं हो सकेगा। इससे तो भुखमरी फैल जाएगी।
कोटेदार अनिल अग्रहरि ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर रोजगार छूट जाएगा फिर क्या करेंगे समझ में नहीं आ रहा है। लगभग अस्सी प्रतिशत कोटेदार सिर्फ इसी के बलबूते परिवार पाल रहे हैं। इससे वे पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे।
कोटेदार महेंद्र प्रसाद ने कहा कि सरकार का निर्णय अनुचित है। क्योंकि प्रदेश के अस्सी हजार परिवारों का निवाला कोटे की दुकान से चलता है। यही नहीं अनाज को तौलने के लिए गांव के ही व्यक्ति को जोड़ा जाता है, जिससे उसे भी रोजगार मिल जाता है।
सतर्कता समिति ने जांचे गोदाम के हालात
पकड़ाया 50 किलो की बोरी में 45 किलो अनाज
अमर उजाला ब्यूरो
कुदरहा। सरकार पीडीएस खाद्यान्न को लेकर गंभीर है। वह खाद्यान्न माफियाओं पर अंकुश का जतन कर रही है। पीडीएस का खाद्यान्न गरीबों तक पहुंचे। इसके प्रयास के क्रम में बुुधवार को सतर्कता समिति के सदस्य कुदरहा स्थित गोदाम पर पहुंचे। यहां बिना तौल कराए कोटेदारों को खाद्यान्न दिया जा रहा था। यह बोरी पचास किलो की थी, मगर जब इसकी समिति सदस्यों ने तौल कराई तो महज 45 किलो की ही पाई गई।
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भाजपा जिला महामंत्री व समिति के सदस्य चंद्रशेखर सिंह मुन्ना दिन में करीब 12 बजे उक्त गोदाम पर अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे। यहां सात कोटेदार अपने अनाज की निकासी के लिए पहुंचे थे। ये लोग बगैर तौल कराए उसे रिसीव कर रहे थे। इस पर मुन्ना ने कोटेदारों से पूछ लिया कि यह बगैर तौल लेकर कैसे जा रहे हैं, जिस पर कोटेदारों ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि यहां तो बिना तौल के ही राशन मिलता है। एसएमआई से जब उन्होंने बाट और तराजू के बारे में जानकारी ली तो बताया गया कि वह इलेक्ट्रानिक है, जो डिस्चार्ज हो गया है। जब खोजबीन के बाद कांटा मिला तो उस पर बोरियों को तौलवाया गया, सभी बोरियों में अनाज कम मिला। मुन्ना ने कहा कि इसकी जानकारी सरकार को दी जाएगी। यहां पीडीएस खाद्यान्न वितरण के हालात अच्छे नहीं हैं। जब कोटेदार को ही पूरा खाद्यान्न नहीं मिलेगा तो फिर अंतिम व्यक्ति तक यह कैसे पहुंच पाएगा।
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