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बेहोशी के डॉक्टर न होने से बंद पड़े हैं बेंटिलेटर

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बेहोशी के डॉक्टर न होने से बंद पड़े हैं 33 वेंटिलेटर
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बस्ती। कोरोना का खौफ अब भी बरकरार है। व्यवस्था को लेकर शासन व प्रशासन खूब मशक्कत कर रहा है, मगर मेडिकल कॉलेज की ओर से संचालित कैली हॉस्पिटल की कोरोना इलाज की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। यहां स्थापित लेवल-टू अस्पताल में करीब 33 वेंटिलेटर बंद हैं। इसका कारण बेहोश करने के डॉक्टर का न होना है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर से काम चलाया जा रहा है।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कैली हॉस्पिटल में कोविड-19 के इलाज की बेहतर व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने पूरी ताकत लगा रखी है। इसका परिणाम सामने आया और यहां जांच के साथ इलाज की सुविधा शुरू हुई। मरीजों के बेहतर इलाज के लिए ऑक्सीजन और वेंटिलेटर भी उपलब्ध कराए गए। इसके संचालन को लेकर तमाम दावे भी किए गए, मगर इन दावों की निकलने लगी है। कारण यह कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भर्ती तो कराया जाता है, मगर जैसे ही मरीज को लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जरूरत महसूस होने लगती है तो अस्पताल प्रशासन उन्हें पीजीआई लखनऊ अथवा उन अस्पतालों में रेफर कर देता है, जहां मरीज के परिजन कहते हैं। इधर कोरोना का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। हर दिन मरीज मिल रहे हैं। इसके बावजूद खामियों को दूर करने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन नाकाम है। बताया जा रहा है कि बेहोश करने वाले डॉक्टर की तैनाती थी, लेकिन वह अवकाश पर चले गए हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत ने कहा कि मरीजों को कोरोना में ऑक्सीजन की जरूरत अधिक होती है। यह सही है कि बेहोश करने वाले डॉक्टर की कमी है, मगर वेंटिलेटर की जरूरत अभी यहां किसी मरीज को नहीं पड़ी। जरूरत पड़ने पर मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
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