खाली हाथ संचालित हो रहा कान्हा हाउस
उद्घाटन से पहले ही शुरू हो गए कार्य
दिन भर पैदल घूम कर छुट्टा गो वंश पकड़ रहे नगर पालिका के कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकार की अति महत्वाकांक्षी कान्हा हाउस योजना में उद्घाटन से पहले कार्य भले शुरू हो गए हों, मगर यहां के हालात अच्छे नहीं है। छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए पालिका के पास न तो कैटल वाहन हैं और न अन्य संसाधन। यही नहीं, आने वाले दिनों में कान्हा हाउस के रखरखाव पर होने वाले खर्च की व्यवस्था कैसे होगी, इसे सोच पालिका के जिम्मेदार अभी से पसीना बहा रहे हैं।
छुट्टा पशु सड़क से पकड़ कर कान्हा हाउस पहुंचाए जाएंगे। ऐसी व्यवस्था प्रदेश सरकार ने बनाई है। इसके लिए नगर पालिका परिषद की बेशकीमती जमीन पर ढाई करोड़ रुपये से कान्हा हाउस का निर्माण डेढ़ वर्ष में पूरा हो गया। कार्यदायी संस्था ने इसे नगर पालिका को हैंडओवर भी कर दिया है। सूचना है कि इसका उद्घाटन 14 जनवरी को प्रस्तावित है। उद्घाटन प्रदेश के नगर विकास मंत्री करेंगे। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कान्हा हाउस में तत्काल प्रभाव से छुट्टा पशुओं के रखने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। परंतु यहां संसाधनों की कमी अब भी बनी हुई है। इसके बावजूद शहर में कान्हा हाउस का संचालन शुरू कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि कान्हा हाउस के संचालन पर प्रति माह डेढ़ लाख रुपये खर्च होंगे। इसके संचालन का खर्च किस मद से किया जाएगा, इसकी रणनीति अभी पालिका प्रशासन तैयार नहीं कर पाई है। हालांकि पालिका प्रशासन ने अपने स्तर से यहां आधा दर्जन कर्मियों की तैनाती भी कर दी है। इसके अलावा गो वंश को खिलाने के लिए भूसा आदि भी मंगाया गया है, मगर अभी यहां मात्र दो गायों को रखा गया है। जिसमें से एक गाय को बुुधवार को लाया गया। नियमानुसार गायों का हर दिन डॉक्टरी मुआयना किया जाना चाहिए, मगर यहां अभी किसी पशु चिकित्सक की तैनाती नहीं की जा सकी है। ठंड से बचाव के भी संसाधन यहां अब तक नहीं हो उपलब्ध हो सके हैं। ऐसे में कान्हा हाउस के रखरखाव की व्यवस्था के लिए भी अलग से कार्ययोजना बनानी होगी।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण त्रिपाठी का कहना है कि कान्हा हाउस के संचालन के लिए व्यवस्था बनाई जा रही है। इसकी नीलामी की जाएगी। इसके संचालन की जिम्मेेदारी जिसे भी दी जाएगी, उसके पास उपलब्ध संसाधनों का आंकलन भी किया जाएगा। पालिका फिलहाल अभी पालिका अपने मद से रकम की व्यवस्था कर यहां रखे गए पशुओं की देखरेख करवा रही है।