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शौचालय से वंचित हैं 60 हजार पात्र

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शौचालय से वंचित हैं 60 हजार पात्र
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खुली बैठक में सामने आया यह मामला
स्वच्छता मिशन के तहत 94 हजार शौचालय अभी नहीं बनाए जा सके हैं
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। स्वच्छता मिशन के तहत जिले में 3.90 लाख शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य है। पंचायत राज विभाग को ओडीएफ यानी खुले में शौच मुक्त की भी जिम्मेदारी दी गई है। इस बीच अब तक 254 गांव ही कागजों पर खुले में शौच से मुक्त हो पाए हैं, जबकि 2875 गांवों में खुले में शौच से मुक्त की कवायद पूरी नहीं हो सकी है।
बीते 24 जुलाई से ग्राम पंचायतों में खुली बैठकों का दौर शुरू किया गया है। अब तक हुई खुली बैठकों में यह बात सामने आई है कि जिले के 60 हजार पात्र परिवार हैं जिनको स्वच्छता मिशन के तहत शौचालय की सुविधा का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन परिवारों के नाम पर बीपीएल सूची में नहीं हैं। शासन ने प्रदेश को दो अक्टूबर तक खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसी क्रम में जिले की 3129 गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए डीपीआरओ को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए पूरा तंत्र मशक्कत कर रहा है। इसी कड़ी में जिले में शौचालय निर्माण का कार्य गांववार शुरू हुआ है। पहले चरण में बीपीएल सूची में शामिल शौचालय से वंचितों को इसका लाभ दिए जाने की कोशिश की गई है। इसके तहत अब तक 2.16 लाख शौचालयों का निर्माण करा दिया गया है, जबकि शेष 94 हजार शौचालयों में अधिकांश का निर्माण चल रहा है।
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इधर गांवों में आयोजित खुुली बैठकों में नए सिरे से शौचालय से वंचित पात्रों का चयन किया गया है। अब तक करीब साठ हजार ऐसे पात्र मिले हैं जो शौचालय की सुविधा से वंचित हैं और उनका नाम भी बीपीएल सूची में नहीं है। ऐसे में नए चयनित पात्रों को प्रशासन मनरेगा से शौचालय का लाभ देने की योजना बना रहा है।
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डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने कहा कि खुली बैठकों में चिह्नित पात्रों को विभाग की ओर से शौचालय दिया जाना संभव नहीं है। क्योंकि शासनादेश के अनुसार केवल 2011 की जनगणना में शामिल बीपीएल पात्रों को ही योजना से लाभान्वित किया जाना है। खुली बैठकों में जितने भी नए पात्र सूची में शामिल हुए हैं उन्हें शौचालय मनरेगा से दिया जाएगा। क्योंकि मनरेगा में भी यह व्यवस्था शासन ने बनाई है। फिलहाल तय समय सीमा में शौचालयों का निर्माण पूरा हो जाएगा। रही ओडीएफ की बात तो गांवों में अब भी जागरूकता का अभाव है। शौचालय के बावजूद लोग खुले में जा रहे हैं। इसे लेकर प्रशासन गंभीर है।
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