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गैर इरादतन हत्या में पति दस वर्ष की सजा

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गैर इरादतन हत्या में पति दस वर्ष की सजा
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एडीजे प्रथम न्यायालय का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मदन लाल निगम की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में पति को दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राघवेश प्रसाद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण प्रस्तुत किया। बताया कि नगर थाना क्षेत्र के मटेरा निवासी मुन्नी लाल पुत्र रामदास ने थाना पुरानी बस्ती में 31 अगस्त 2014 को तहरीर दी, जिसमें कहा कि उनकी बहन अंजली की शादी पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के खेवासबारी गांव में रमेश यादव से 11 जुलाई 2008 को हुई थी। रमेश ढाई साल से बाहर का काम छोड़ घर पर ही रहता था और नशे की हालत में पत्नी अंजली को मारता-पीटता था। वह मायके से रुपये मांगने के लिए अंजली पर दबाव बनाता था। 30 अगस्त 2014 की रात साढ़े आठ बजे उसकी बहन से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसी दौरान रमेश ने आक्रोश में अपनी पत्नी के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इस घटना में अंजली गंभीर रूप से झुलस गई। आसपास के लोगों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। मायके में इन्हीं लोगों ने सूचना दी। तहसीलदार ने अस्पताल में अंजली का बयान भी दर्ज किया। मायके के लोग जब तक अस्पताल पहुंचते तब तक उसने दम तोड़ दिया। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज होकर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ। अभियोजन की ओर से वादी सहित नौ गवाहों के बयान हुए। जबकि बचाव पक्ष ने इस मामले में झूठा फंसाए जाने की बात कोर्ट में रखी। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने घटना को गैर इरादतन हत्या का मामला मानते हुए रमेश को दस वर्ष की सजा सुनाई।
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डॉक्टर खिलाफ दाखिल परिवाद खारिज
बस्ती। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष राम दरश व सदस्य महादेव प्रसाद दुबे ने दिव्य आई केयर के खिलाफ परिवाद को खारिज कर दिया। जनपद के पिकौरा निवासी संतराम ने फौव्वारा तिराहे पर स्थित आँख अस्पताल के खिलाफ परिवाद दाखिल किया कि 13 मार्च 2016 को उक्त अस्पताल में डॉ बीपी त्रिपाठी को दिखाया था, ऑपरेशन भी कराया था परंतु ऑपरेशन सफल नहीं हुआ। इसका कारण डॉक्टर की लापरवाही है। अस्पताल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राम रतन पांडेय ने कहा कि चिकित्सक की तरफ से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में रेटिना दिखाने की सलाह दी गई थी, परन्तु संतराम वहां नहीं गए। मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। रेटिना का ऑपरेशन संभव नहीं होता। दोनों दो अलग चीजें हैं। पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि डॉक्टर ने कोई लापरवाही ऑपरेशन के दौरान नहीं बरती थी। अग्रिम इलाज के लिये उच्च स्तर के लिये रेफर किया गया। परिवादी ने सही मार्गदर्शन पर न चलकर स्वयं के साथ लापरवाही की है।
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बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति का आदेश
बस्ती। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष राम दरश व सदस्य महादेव प्रसाद दूूबे ने बीमा कंपनी को वाहन क्षतिग्रस्त के मामले में बीमित राशि व क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी धारक को बीमित रकम 8.59 लाख रुपये अदा करेगी। साथ ही वाद व्यय व मानसिक कष्ट के लिए 12 हजार रुपये उसे क्षतिपूर्ति भी अदा करना होगा। इस धन के समय से अदायगी न करने पर सात प्रतिशत ब्याज भी बीमा कंपनी अदा करेगी। छावनी थाना क्षेत्र के कटरिया निवासी अरविंद सिंह ने अधिवक्ता विजय कुमार त्रिपाठी के माध्यम से परिवाद दाखिल किया। कहा कि उसने महेंद्रा शो रूम से महेंद्रा एसबीबी वाहन जुलाई 2014 में क्रय किया। इस वाहन का बीमा श्रीराम जनरल इंश्योरेंश से हुआ था। इसकी वैधता 16 अगस्त 2017 तक थी। 30 मार्च 2017 को छावनी थाना क्षेत्र के जसईपुर गांव के निकट वाहन के सामने नीलगाय आ गई, जिसे बचाने के चक्कर में वाहन असंतुलित होकर पेड़ से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गया। बीमा कंपनी से बीमित रकम की मांग की गई, मगर भुगतान नहीं हुआ। विधिक नोटिस देकर परिवाद दाखिल किया गया। फोरम की पीठ ने परिवाद स्वीकारते हुए उक्त आदेश दिया है।
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