सवा सोलह करोड़ का गेहूं अब भी मंडी में डंप
बस्ती। मूल्य समर्थन योजना 2017 में खरीदे गए गेहूं में से अब भी सवा सोलह करोड़ का गेहूं केंद्रीय पूल में भंडारित नहीं हो सका है। इसके लिए 30 जून की सीमा तय थी। ऐसे में गेहूं में एक प्रतिशत कटौती को लेकर भी तनातनी का माहौल हो सकता है।
जिले में चालू वित्तीय वर्ष में कुल लक्ष्य का 47 प्रतिशत गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी। इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल 10 रुपये (पल्लेदारी) खर्च भी किसानों को दिया गया था। स्टेट पूल में खरीद के बाद गेहूं को केंद्रीय पूल यानी एफसीआई के गोदाम तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी संबंधित क्रय एजेंसियों की थी। खाद्य एवं रसद विभाग के विपणन शाखा ने खरीद के सापेक्ष अब तक एक लाख क्विंटल गेहूं मंडी में डंप पड़ा है। हालांकि जिम्मेदार इसे सुरक्षित बता रहे हैं, मगर मौसम की स्थिति देख उनके भी होश उड़े हैं। विभागीय जिम्मेदारों का कहना है कि एफसीआई के गोदाम में स्थान रिक्त न होने के कारण इसे भंडारित नहीं कराया जा सका हैै। खबर है कि सिद्धार्थनगर स्थित एक गोदाम में जगह रिक्त है, मगर दूरी व जर्जर मार्ग के चलते इसे वहां तक पहुंचाना संभव नहीं हो पा रहा है। फिलहाल स्थिति चाहे जो भी हो, मगर सवा सोलह करोड़ का गेहूं अब भी सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचा है।
डिप्टी आरएमओ संजय पांडेय ने कहा कि गेहूं को अब तक इस नाते नहीं भेजा जा सका कि एफसीआई गोदाम में जगह रिक्त नहीं है। ऐसे में वहां लेकर जाने से कोई फायदा नहीं है। 30 जून के बाद एक प्रतिशत गेन पर सहमति बना ली गई है। जो भी गेहूं अब तक भंडारित नहीं है वह सुरक्षित है। उसे ढक कर रखा गया है।