बस्ती। रोडवेज डिपो की 31 बसें अपनी आयुसीमा पूरी कर चुकी हैें, या फिर दस लाख किमी से अधिक का सफर कर चुकी हैं। फिर भी यह यात्रियों को ढो रही हैं, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में तौ है ही, साथ ही आए दिन खराब होकर बीच सफर में ही इनके इंजन दम तोड़ देते हैं। लिहाजा इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
डिपो के बेड़े में 87 निगम की व 32 अनुबंधित समेत कुल 119 बसें हैं। परिवहन निगम की 87 बसों में 31 बसें ऐसी हैं, जो मानक विहीन संचालित हो रही हैं। इनमें अधिकांश दस साल की आयुसीमा पूरी कर चुकी हैं तो बाकी दस लाख किमी से अधिक यात्रा कर चुकी हैं। यह आंकड़ा इस महीने का है, जिसका उल्लेख करते हुए अधिकारियों ने परिवहन निगम गोरखपुर क्षेत्र के सेवा प्रबंधक को पत्र भेजा है। इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि ये पुरानी बसें विभागीय मानक के अनुसार सभी नीलामी की शर्तें पूरी कर चुकी हैं। इसलिए इनकी नीलामी कर नई बसों का इंतजाम करना आवश्यक है। यह भी कहा गया है कि इन जर्जर बसों के कारण डिपो की आय घट रही है और डीजल की खपत भी ज्यादा हो रही हैं।
ये हैं बसों के मानक
परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार कोई भी बस दस लाख किमी की यात्रा करने के बाद नीलामी की शर्तें पूरी कर लेती है। वहीं दस साल की आयुसीमा पूरी करने के बाद वह ऑनरोड लायक नहीं रह जाती है। ऐसी बसों को नीलाम करने का प्रावधान है। ताकि नई बसों का परिवहन निगम इंतजाम करे और डिपो को उपलब्ध कराई जा सके।
इस सप्ताह डिपो में आईं चार नई बसें
बस्ती डिपो में सप्ताह भर के भीतर चार नई बसें उपलब्ध हुई हैं। पहले डिपो में कुल 83 बसें थीं। अब इनकी संख्या बढ़कर 87 हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार अभी इसी सप्ताह चार और नई बसों के मिलने की उम्मीद है। जिससे कुछ राहत मिलेगी लेकिन फिर भी यह जर्जर बसें ऑनरोड होने से रोजाना डिपो से सफर करने वाले औसतन 13 हजार यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बनेंगी।
उच्चाधिकारियों के संज्ञान में हैं समस्या
डिपो के सीनियर फोरमैन चंदन लाल ने बताया कि गोरखपुर क्षेत्र के सेवा प्रबंधक को पत्र भेज कर समस्या से अवगत करा दिया गया है। बसों का प्रबंध जल्द ही हो जाएगा।