बस्ती। जिले में कई निजी अस्पताल मानकविहीन होने के साथ ही बिना नवीनीकरण कराए अवैध रूप से चल रहे हैं। नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किए थे लेकिन, यह न तो मानक पूरे कर पा रहे हैं और न ही डॉक्टर मौके पर मिल रहे हैं। जिम्मेदार भी आवेदन के सहारे अवैध अस्पताल चलवा रहे हैं।
हालांकि, विभाग का दावा है कि पोर्टल से 25 आवेदन पूर्व के डिलीट कर दिए गए हैं। बाद के छह आवेदन पोर्टल पर हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। सत्यापन में सबकुछ ठीक मिलने पर पंजीकरण होगा। जनपद में करीब 190 निजी अस्पताल और 110 के करीब पैथोलॉजी, एक्स-रे सेंटर व क्लीनिक पंजीकृत हो गए हैं। बताया गया कि इनका 30 अप्रैल तक नवीनीकरण होना था।
इस बार शासन से अस्पताल के मानक पूरे होने के साथ ही एक वर्ष के बजाए पांच वर्ष के लिए नवीनीकरण करने के आदेश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, नई प्रक्रिया के तहत अधूरे मानक पर नवीनीकरण करने वाले अधिकारियों का फंसना भी तय है। बताया गया कि इसके तहत संचालकों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन भी कर दिया था। उस समय 325 आवेदन नर्सिंग होम, पैथालॉजी, एक्स-रे सेंटर और क्लीनिक के आए थे।
बताया गया कि जांच में 25 आवेदन मानक पर नहीं मिले थे। उन्हें दोबारा मौका दिया गया, लेकिन संबंधित संचालक अभिलेख और कमियां दूर नहीं कर पाए। इंतजार के बाद विभाग ने विभागीय पोर्टल से आवेदन निरस्त करते हुए उसे अब हटा दिया है।
बताया गया कि सूची के अनुसार जिले में एमबीबीएस डॉक्टरों की संख्या कम है और निजी अस्पतालों की संख्या के अनुपात में डॉक्टर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन बाहरी डॉक्टरों की डिग्री लेकर आवेदन करके पंजीकरण करा लिए हैं।
बताया गया कि कई अस्पतालों का नवीनीकरण अभी भी लंबित है। जांच में पाया गया कि काफी संख्या में निजी अस्पतालों में डॉक्टर हैं ही नहीं, सत्यापन के लिए जब डिप्टी सीएमओ गए तो उन्हें कई अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिले थे। मानक के अनुरूप संसाधन भी नहीं थे। ऐसे में 25 आवेदन को निरस्त करना पड़ा। बाद में 15 दिन इंतजार के बाद उसे पोर्टल से भी हटा दिया गया है।
अब सीएमओ ने 300 अस्पतालों व जांच केंद्रों पर अपनी मुहर लगा दी है, लेकिन निरस्त आवेदन वाले अस्पताल गुपचुप तरीके से बिचौलिए और कथित दलालों के सहयोग से चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जिला महिला अस्पताल के आसपास, मालवीय रोड, कटरा, जिगिना, पचपेड़िया रोड, जिला अस्पताल-सोनूपार मार्ग और टीबी अस्पताल के पास कथित तौर पर नाम बदलकर अस्पतालों का संचालन हो रहा है।