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पीडब्लूडी से गायब हुए मृतक कर्मी का सर्विस बुक

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पीडब्ल्यूडी से गायब हुए मृतक कर्मियों के सर्विस बुक
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पुनरीक्षण पेंशन के लिए आवेदन होने पर खुला मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड में अभी एक मामला चल ही रहा है कि यहां लापरवाही का एक नया मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में कई रिटायर्ड कर्मियों की सर्विस बुक ऑफिस की आलमारी से गायब हो गई है। इस पर से पर्दा तब उठा जब विभाग के मृतक कर्मी के परिवार के लोगों ने पुनरीक्षण पेंशन के लिए आवेदन किया और लखनऊ ने संबंधित कर्मी की सर्विस बुक मांगी, मगर यहां तो तमाम महत्वपूर्ण अभिलेखों को लापरवाही से रखे जाने के कारण सर्विस बुक गायब पाई गई। संबंधित काउंटर देखने वाले बड़े बाबू ने बताया कि कितने रिटायर्ड कर्मियों के सर्विस बुक गायब हैं यह पता नहीं है।
विभाग में बड़े बाबू पद पर कार्यरत सच्चिदानंद की मौत 1889 में हो गई। इनके परिवार को पेंशन मिलने लगी। पिछले दिनों शासन ने पेंशन पुनरीक्षण के आवेदन मांगे। इसी के क्रम में उक्त के परिवार ने भी आवेदन किया, आवेदन लखनऊ पहुंचा तो वहां से संबंधित कर्मी की पेंशन बढ़ोत्तरी के लिए उस समय का वेतन जानने की जरूरत मंत्रालय को हुई। इसके लिए सर्विस बुक मांगी गई। लखनऊ से आए पत्र को चोरी-छिपे विभाग के जिम्मेदारों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि उनकी सर्विस बुक विभाग में नहीं है। इसकी जानकारी जैसे ही सच्चिदानंद के परिवार को हुई वे विभाग में सर्विस बुक पाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए, मगर यहां तो विभागीय जिम्मेदार सर्विस बुक गायब होने की बात कह कर पल्ला झाड़ दिए।
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परिवार की महिला सदस्य श्वेता ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड में जब कर्मियों की सर्विस बुक ही सुरक्षित नहीं है तो फिर अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों का क्या हाल होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछेक लोग रिटायर्ड कर्मियों की सर्विस बुक गायब कर दे रहे हैं। इसकी जांच होनी जरूरी है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता एके गुप्ता ने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था, फिलहाल, मैं इसकी पड़ताल करवाता हूं। यह गंभीर है कि किसी कर्मचारी की सर्विस बुक गायब हो जाए। वैसे जहां तक मैं जानता हूं कि वह किसी दूसरे स्थान पर रख दी होगी गई क्योंकि यह पहला प्रकरण है, जिसमें ऐसी बात सामने आ रही है।
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