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तिरंगे के रंग को थाले में उतारे, स्वस्थ्य रहें

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थाली में होगा ‘तिरंगा’ तो बनेंगी अपराजिता
अमर उजाला फाउंडेशन की सेहत की पाठशाला में छात्राओं को दिए गए बेहतर स्वास्थ्य के टिप्स
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है। इसके लिए थाली में तिरंगा खाद्य पदार्थ जरूरी है। सेहत बेहतर होगी तो पढ़ेंगी बेटियां, बढ़ेंगी बेटियां। यह कहना था अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित सेहत की पाठशाला में डॉ. सीमा और डॉ. स्मिता का।
अपराजिता मुहिम के तहत दि सिटी मांटेसरी स्कूल में लगी सेहत की पाठशाला में जिला महिला अस्पताल की काउंसलर सीमा सिंह ने छात्राओं को स्वस्थ रहने के मंत्र दिए। किशोरियों में एनीमिया, माहवारी आदि समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि सेहत के लिए आवश्यक है कि तिरंगा यानी गाजर, मूली, पालक सहित अन्य प्रोटीनयुक्त फल, सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा किया जाए। सीएचसी मरवटिया की डॉ. स्मिता ने कहा कि सबल बनने के लिए हमें अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने सफाई, समय प्रबंधन और किशोरावस्था में होने वाली बीमारियों पर भी प्रकाश डाला। प्रबंधक अनूप खरे ने कहा कि आज के परिवेश में हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम बेटियां को समझें। अभिभावक की तरह नहीं बल्कि दोस्त की तरह। प्रधानाचार्य नूपुर त्रिपाठी ने कहा कि हमें बेटियों पर गर्व है। इन्हें उच्च शिक्षा देने की जिम्मेदारी हम सभी की है। उन्होंने सरकार की ओर से बेटियों के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं की भी जानकारी दी। साथ ही इस तरह के अभियान की सराहना की।
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छात्राएं बोलीं

संकल्प के साथ अपराजिता से जुड़ गई
कक्षा नौ की छात्रा साक्षी मिश्रा ने कहा कि शपथ पत्र भरकर मैं भी अपराजिता कार्यक्रम का हिस्सा बन गई। इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर होने चाहिए ताकि बेटियां सक्षम हो सकें।

ऐसे कार्यक्रमों से बढ़ता है मनोबल
सीएमएस की छात्रा प्रिया पांडेय ने कहा कि अच्छी सेहत के लिए बताए गए उपायों को यदि अपनाया जाए तो बीमारी पास नहीं फटकेगी। कार्यक्रम में जो जानकारी दी गई, मैं उसका नियमित पालन करूंगी।

प्रेरणादायक है अभियान
छात्रा निमिषा पटेल ने कहा कि विशेषज्ञों ने स्वस्थ रहने के जो टिप्स दिए उससे सभी लाभान्वित होंगे। कम से कम छह माह में ऐसे कार्यक्रम विद्यालय स्तर पर जरूर होने चाहिए।
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ऐसे अभियान वक्त की जरूरत
अनुराधा चौधरी ने कहा कि बहुत कम कार्यक्रमों से खुद को साबित करने की प्रेरणा मिलती है। ये वैसा ही कार्यक्रम था। समाज और देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले अभियान चलाने की जरूरत है।
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