‘आरओ पानी’ के नाम पर सेहत से खिलवाड़
पानी की शुद्धता की जिम्मेदारों ने नहीं की जांच
मोहित गुप्ता
रुधौली। बाजार में मिलने वाली पानी की थैली और आरओ प्लांट का पानी भले कुछ देर के लिए गला तर कर दे, लेकिन सेहत के लिए ठीक है इसकी जांच आज तक नहीं हुई।
कस्बे में आरओ-मिनरल वाटर प्लांट बिना लाइसेंस के चल रहे। जिम्मेदार विभाग खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान ही नहीं देते हैं। इसके कारण अमानक स्तर के पानी का सेवन करने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। लोकल ब्रांड पानी पाउच व बोतल बंद मिनरल वाटर की सप्लाई गर्मी के दिनों में बढ़ जाती है। रोजाना हजारों बैग बिकने वाले पानी के पाउच की शुद्धता से भी लोग अनजान हैं। कस्बे में दर्जनभर फर्म हैं जो आरओ वाटर के नाम पर जार की सप्लाई कर रहे हैं। आफिस, घरों व शादियों सहित अन्य समारोहों में भी यही आपूर्ति रहती है। पानी में कैल्शियम, मैग्निशियम, आयरन आदि कितनी मात्रा में है, मानक के अनुरूप है अथवा नहीं, यह बात भी साफ नहीं हो पा रही है। इस संबंध में रुधौली सीएचसी प्रभारी डॉ. अशोक चौधरी कहते हैं कि जलजनित बीमारियों से बचाव के लिये शुद्ध जल का सेवन जरूरी है। जल दूषित होने का एक प्रमुख कारण खेतों में पड़ने वाला उर्वरक भी है। डायरिया, इंसेफेलाइटिस, टायफाइड, कालरा आदि होने की आशंका रहती है।
बता दें कि भारतीय मानक ब्यूरो ने पैकेज्ड पानी प्लांट संचालन के लिए नियम लागू किए हैं। वाटर प्लांट चलाने के लिए क्वालिटी कंट्रोल से लाइसेंस, नगर पालिका से अनुमति प्रमाण-पत्र, संबंधित अस्पताल से अनुमति प्रमाण-पत्र व पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब आदि हो तभी काम किया जा सकता है। प्लांट पर सभी गुणवक्ताओं व पैरामीटरों को लिखना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही प्लांट में पानी की नियमित चेकिंग के लिए एक निजी लैब और लैब टेक्नीशियन की तैनाती होनी चाहिए।
इस संबंध में खाद्य निरीक्षक अपूर्व श्रीवास्तव का कहना है कि जो पानी वाटर प्लांट लगाकर आजकल बेचा जा रहा है, पैक्ड नहीं होने के नाते विभाग से उसकी लाइसेंसिंग नहीं हो सकती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर संबंधित जिम्मेदारों को इस बात के लिए निर्देशित किया जाएगा कि वह अपने क्षेत्र में इस तरह के व्यवसाय चलाने वाले लोगों को नोटिस देकर गुणवत्ता की जांच कराने के लिए निर्देशित करें साथ ही स्थानीय जिम्मेदारों के माध्यम से इसके लिए एनओसी जारी करवाएं।
इसलिए नहीं लेते प्रमाण-पत्र
क्वालिटी कंट्रोल से लाइसेंस के लिए रकम देनी पड़ती है। गुणवत्ता जांचने के लिए लैब लगाने में ही मशीन लगाने पर चार से पांच लाख रुपये खर्चा आता है। प्लांट 30 से 40 लाख रुपये का पड़ता है। इसमें फिल्टर की ही कीमत करीब एक लाख तक होती है।
डब्ल्यूएचओ से निर्धारित मापदंड
फ्लोराइड की मात्रा 0.5 से 1.5 मिली
घुलनशील लवण 500 से 1500 मिली
नाइट्रेट की मात्रा 0 से 45 मिली
क्लोराइड की मात्रा 10 से 500 मिली
पीएचपीए की मात्रा 6.5 से 8.5 मिली