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भानपुर में उल्टी-दस्त से एक और बच्ची की मौत

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भानपुर में उल्टी-दस्त से एक और बच्ची की मौत
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भानपुर।
भानपुर कस्बे के खटकहिया पुरवे में सप्ताह भर से फैले उल्टी-दस्त से बुधवार को एक और बच्चे की मौत हो गई। पिछले चार दिनों के भीतर तीन बच्चियों की मौत से ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। पहले से बीमार ठीक भी नहीं हो पा रहे हैं और बीमारी की चपेट में अन्य भी आते जा रहे हैं।
गांव में दो बच्चियों की मौत हुए 24 घंटे बीते भी नहीं थे कि बुधवार की सुबह भी बीमारी से गांव में एक और दो वर्षीय बच्ची अर्चिता पुत्री उमेश मौत हो गई, जबकि करिश्मा पुत्री सीताराम बीमारी की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच गई। हालांकि, पूर्व में बीमारी से पीड़ित लोगों की हालत स्थिर बनी हुई है। बुधवार को जिला संक्रामक रोग नियंत्रण विभाग की टीम ने डॉ. रूपेश हालदार के नेतृत्व में खटकहिया पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। डॉ. रूपेश ने सीएचसी से डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. अभिषेक, अनुज, बीएचडब्लू शिवशंकर, अमित कुमार को गांव में कैंप करने के निर्देश दिए हैं। स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया। गांव पहुंचे डॉक्टरों ने पीड़ितों को सफाई रखने और पानी उबाल कर पीने की सलाह दी तथा दवाइयां भी वितरित कीं।
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इधर, उल्टी-दस्त से हुई मौत की खबर को संज्ञान लेकर एसडीएम हरिश्चन्द्र सिंह ने अस्पताल पहुंच कर पीड़ितों के बारे में डॉ. अमिश से जानकारी ली। अस्पताल में गंदगी देखकर नाराजगी जताते हुए सफाई रखने के निर्देश दिए। मौतों को संज्ञान लेकर एडीओ पंचायत ने गांव में मच्छररोधी दवा का छिड़काव कराया।

अफसरों की खींचतान, दुधमुहों की जिंदगी खतरे में

बस्ती।
जिला महिला चिकित्सालय में अफसरों की आपसी खींचतान के बीच गुपचुप ढंग से बेहद गहरी साजिश की जा रही थी। इसमें शामिल एक अफसर स्थानांतरण के बाद एसएनसीयू को प्रभावित करने की योजना में था, मगर इसकी भनक जिम्मेदारों को लग गई। योजना के तहत उस अधिकारी ने एसएनसीयू में तैनात एक महिला और एक पुरुष डॉक्टर का स्थानांतरण उनके मूल तैनाती स्थल पर करते हुए आदेश जारी कर दिया। इसके पीछे उनकी मंशा क्या थी यह तो अलग है, मगर अंदरखाने में चर्चा है कि इन दोनों डॉक्टरों के स्थानांतरण के बाद एसएनसीयू बंद हो जाएगा और इसके बाद कोई न कोई घटना हो जाएगी। हालांकि, समय रहते जिम्मेदारों ने समझदारी दिखाई और स्थानांतरण के बाद डॉक्टरों को रिलीव नहीं किया।
चिकित्सालय में स्थापित एसएनसीयू में दुधमुंहों का इलाज भर्ती कर किया जाता है। वर्ष 2013 में स्थापित इस यूनिट को अभी पिछले महीने शासन ने प्रदेश में चौथा स्थान देते हुए सम्मानित किया था। इस यूनिट के लिए कुल तीन चिकित्सकों को तैनात किया गया है। इसमें एक महिला तो दो पुरुष चिकित्सक हैं। यही तीनों यहां चौबीस घंटे ड्यूटी करते हैं। यह सब कुछ चल ही रहा था कि सोमवार की रात प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कर लिया। यहां प्रभार पर चल रहे सीएमएस डॉ. गनेश यादव की लोकेशन नहीं मिल सकी। वहीं, पूरा अस्पताल खाली पाया गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉ. गनेश सहित स्थानांतरित सभी को रिलीव कर दिया। बस मामला यहीं से बिगड़ गया। आनन-फानन एसएनसीयू के चिकित्सकों पर एक पक्ष के अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए उनका स्थानांतरण कर दिया। हालांकि, सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने उन्हें महिला चिकित्सालय में ही बने रहने का निर्देश दिया था। मगर मंगलवार की सुबह रिलीव हो चुके सीएमएस डॉ. गनेश ने बैकडेट में एसएनसीयू के दोनों चिकित्सकों का रिलीविंग ऑर्डर जारी कर दिया, मगर डॉक्टरों ने स्थानांतरण और रिलीव होने के बाद दिए गए आदेश को मानने से इन्कार कर दिया।
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि मेरे संज्ञान में सब कुछ आ गया था। ऐसे में व्यवस्थागत ढंग से महिला चिकित्सालय को बेहतर करने की पहल प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर की है। यह सब कुछ मैंने शासन के संज्ञान में भी डाल दिया है। अब वहां चिकित्सा सुविधा बेहतर हो जाएंगी।


दयनीय मिली स्वास्थ्य सेवाओं की हालात

बस्ती।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम ने बुधवार को महिला चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय व ओपेक चिकित्सालय कैली का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान तीनों अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात खराब पाए गए। जांच के बाद टीम ने अस्पताल के जिम्मेदारों को व्यवस्थागत खामियां दूर करने के निर्देश दिए। महिला चिकित्सालय में पैैैथॉलॉजी की हालत पर टीम के अगुवा और एनएचएम महाप्रबंधक डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने नाराजगी जताते हुए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। महिला चिकित्सालय में दवा खरीद में हुए गोलमाल की जांच के लिए शासन को संस्तुति भेजी है।
एनएचएम की संचालित योजनाओं का ऑडिट करने आई तीन सदस्यीय टीम में महाप्रबंधक डॉ. अनिल मिश्र के अलावा मोहम्मद फिरोज अहमद और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉ. अमित श्रीवास्तव की टीम सबसे पहले महिला चिकित्सालय पहुंची। यहां ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी थी। अफरा-तफरी मची थी। यहां के हालात देखकर वह सीधे पैथॉलॉजी केंद्र में पहुंच गए। यहां गंदगी की भरमार मिली। खून निकालने के लिए प्रयुक्त इंजेक्शन को वाश बेसिन में डाला जा रहा था। इससे वह बेहद खफा हुए। कर्मियों को चेतावनी दी कि व्यवस्था को दुरुस्त कर लें, वरना तीन दिन बाद इस पैथॉलॉजी से सभी को हटा कर नई तैनाती कर दी जाएगी।
यहां से निकलने के बाद टीम जिला अस्पताल के पीआईसीयू में पहुंच गई। यहां तीन मानीटर, दो वेंटीलेटर, डीफेव्रीलेटर खराब पाया गया। जीवन रक्षक उपकरणों की खराबी पर वह खासे नाराज हुए। इसके अलावा उपकरण संचालन की जानकारी भी ली, मगर किसी को कुछ पता नहीं था। इसके बाद टीम ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंची। जहां पीआईसीयू की हालत दयनीय मिली। दस मरीज भर्ती पाए गए, मगर यहां किसी को भी मॉनीटर से नहीं जोड़ा गया था। इसके अलावा डीफेव्रीलेटर का संचालन भी नहीं हो रहा था। महाप्रबंधक डॉ. मिश्र ने कहा कि तीनों अस्पतालों की स्थिति बेहद दयनीय है। यहां जीवन रक्षक उपकरणों का संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रशिक्षण के लिए तीनों चिकित्सालयों के अधिकारियों को कहा गया है।


बाहर से दवा की शिकायत पर बिफरे जीएम
परशुरामपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परशुरामपुर में मरीजों को बाहर से दवाई लिखे जाने की शिकायत पर महाप्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. अनिल मिश्र ने बुधवार की शाम करीब छह बजे अस्पताल का निरीक्षण किया । उन्होंने अस्पताल की सफाई, ओपीडी, औषधि वितरण कक्ष को देखा। बाहर से मरीजों को दवा लिखे जाने की शिकायत पर उन्होंने सीएचसी के प्रभारी डॉ. भाष्कर यादव से पूछताछ की। महाप्रबंधक ने डॉ. भाष्कर को हिदायत दी कि बाहर से दवा लिखी गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाहर से दवा लिखे जाने की शिकायत पर जांच के लिए महाप्रबंधक ने सीएमओ बस्ती को पत्र लिखा ।
अधिवक्ता ने उठाई जांच की मांग
बस्ती। महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में दवा खरीद घोटाले की जांच अधिवक्ता दिलशाद हुसैन ने डीएम से की है। कहा है कि नवजात शिशुओं के इलाज के लिए जो दवा आदि खरीदी जाती है उसमें भ्रष्टाचार गंभीर विषय है। इसकी उच्च स्तरीय जांच करा कर दोषियों को दंडित किया जाए।


स्वास्थ्य सेवाओं पर सीएमओ से मिले कांग्रेसी

बस्ती।
सरकारी चिकित्सालयों में व्याप्त अव्यवस्था, जीवन रक्षक दवाओं का अभाव सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर कांग्रेसी बुधवार को सीएमओ से मिले। अपनी बात रखी तथा ज्ञापन दिया।
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जिलाध्यक्ष आदित्य त्रिपाठी के नेतृत्व में पहुंचे नेताओं ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। युवा कांग्रेस महासचिव अंकुर वर्मा ने सीएमओ को स्वास्थ्य सेवाओं के बदहाली की विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि जनपद के अधिकांश सरकारी अस्पतालों की स्थिति दयनीय है। जीवन रक्षक दवाओं का अभाव है और पैथॉलॉजी जांच एवं अल्ट्रासाउण्ड की सुविधा नियमित रूप से कार्य दिवसों में मरीजों को नहीं मिल पा रही है। अधिकांश चिकित्सक निजी प्रैक्टिस करने के साथ ही बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बरसात के मौसम में दिमागी बुखार, स्वाइन फ्लू के इलाज का प्रबन्ध तो छोड़िये सांप काट लेने या जहरीले जानवरों के काट लेने की दवायें सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध नहीं है। ज्ञापन देने के बाद युवा कांग्रेस पदाधिकारी एनएचएम के महाप्रबंधक डॉ. अनिल मिश्र और जिला चिकित्सालय अधीक्षक एके श्रीवास्तव से मिले और उन्हें समस्याओं के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर संदीप श्रीवास्तव, दुर्गेश त्रिपाठी, रूपेश पाण्डेय, अर्जुन कन्नौजिया, पवन वर्मा, रवि श्रीवास्तव, विक्रम चौहान, सर्वेश शुक्ल, सन्तोष भारद्वाज, मो. जलील, रोहन श्रीवास्तव, अरशद अली, पवन अग्रहरि, अहद, रंजीत चौहान, रवि शुक्ल, राम प्रसाद, सूरज, लवकुश गुप्ता, सतीश, आलोक गुप्ता, अजीत, अतुल, प्रकाश, राम प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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