बस्ती। आवास विहीन गरीबों को आवास देने वाली इंदिरा आवास योजना का जिले में
बुरा हाल है। विभाग इसके लिए धन का अभाव बता रहा है। हालांकि सभी 7779
लाभार्थियों को आवास की स्वीकृति दे दी गई। मगर उन्हें धन नहीं दिया गया।
मात्र 1600 लाभार्थियों को ही द्वितीय किस्त जारी हुआ है। वित्तीय वर्ष
बीतने को हैं, मगर अभी तक मात्र 50 लोंगो के आवास ही पूर्ण हुए हैं। 6179
गरीब आज भी आवास में जाने के लिए धन का इंतजार रहे हैं।
डीआरडीए के
परियोजना निदेशक डीपी सिंह ने बताया कि इस योजना में पूरे प्रदेश में धन
का अभाव है। बताया कि अन्य जनपदों की अपेक्षा बस्ती में स्थित बहुत अच्छी
है। जिले को ए श्रेणी में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
बताया कि
हर्रैया में 14, साऊंघाट में 12 और 10 आवास बहादुरपुर ब्लॉक सहित अन्य में
पूर्ण हो चुका है। बताया कि इस योजना में मनरेगा से मजदूरी के नाम पर एक
लाभार्थी को 12490 और शौचालय निर्माण के लिए 12000 की धनराशि अतिरिक्त दी
जाती है।
केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस योजना का लाभ आवास विहीन
बीपीएल श्रेणी के लेेागाों को मिलता है। इस योजना में प्रत्येक लाभार्थी
को आवास निर्माण करने के लिए कुल 70 हजार रुपए की धनराशि दो किस्तों में दी
जाती है। पहला किस्त 35 हजार रुपये दिये जाते हैं।
पीडी का कहना
है कि प्रथम किस्त के रूप में सभी चयनित लाभार्थियों के खातें में रकम भेज
दी गई है। बताया कि इस योजना में अपात्रों के लाभ लेने की भी शिकायतें मिली
है। इसके लिए एक ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित और 12 अपात्रों से धन की
रिकवरी कराई जा चुकी है।
लागत कम होने से पूरा नहीं हो रहा आवास
बस्ती।
इंदिरा आवास योजना में आवास पूर्ण न होने का एक सबसे बड़ा कारण कम धन का
मिलना है। विभाग के अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि लागत कम मिलने से
आवास पूर्ण करने में लाभार्थियों के सामने समस्याएं आ रही हैं।
वहीं
राज्य सरकार द्वारा संचालित लोहिया आवास योजना में इंदिरा आवास योजना से
चार गुना अधिक धनराशि दिया जा रहा है। लोहिया आवास योजना में एक आवास का
निर्माण कराने के लिए लाभार्थी को दो लाख 75 हजार रुपये दिए जाते हैं, जबकि
इंदिरा आवास योजना मात्र 70 हजार रुपये ही मिलते हैं।