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एसबीआई रुधौली से सीएचसी तक की सड़क लावारिस

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एसबीआई रुधौली से सीएचसी तक की सड़क लावारिस
1994-95 में ग्रामीण अभियंत्रण से बनी थी सड़क
किसी भी विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं नाम
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों को सीएचसी पहुंचाने वाली सड़क जर्जर अवस्था में है। लगभग 25 वर्षों पूर्व बनी सड़क पर आज तक मरम्मत का कार्य तक नहीं हुआ। सड़क की दुर्दशा को देखते हुए वर्ष 2016 में स्थानीय नगर पंचायत ने अस्थायी तौर पर खड़ंजा लगवा दिया गया था लेकिन वह भी वाहनों का भार ढोते-ढोते वह खड़ंजा भी बेदम हो चला है। इसे सुधारने के लिए नगर पंचायत से लेकर क्षेत्रीय विधायक तक के कई प्रयास हुए, लेकिन अब तक असफल साबित हुए है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आज तक इस सड़क का कोई विभाग मालिक ही नहीं है।
वर्ष 1994 में तत्कालीन विधायक अमर सिंह के प्रस्ताव पर वित्तीय वर्ष 1994-95 में ग्रामीण अभियंत्रण सेवा ने लगभग 270 मीटर इस सड़क पर पहली बार का कार्य कराया था। इसके बाद सड़क निर्माण करने वाले किसी विभाग के अभिलेखों में इसका नाम न दर्ज होने के कारण कभी भी इस पर मरम्मत का कार्य नहीं हो पाया। सड़क की दुर्दशा को देखते हुए अक्टूबर 2016 में नगर पंचायत द्वारा इस सड़क पर त्वरित निस्तारण के तौर पर खड़ंजा तो लगवा दिया। इसके साथ ही इसके मरम्मत का प्रस्ताव बनाकर भी भेजा, लेकिन परिणाम शून्य रहा। नगर पंचायत बोर्ड का गठन होने के बाद वार्ड सभासद गोपाल सिंह ने भी इस सड़क को लेकर अब तक 10 बार शिकायत की है दूसरी ओर क्षेत्रीय विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने इस सड़क की मरम्मत को लेकर डीएम डॉ. राजशेखर को पत्र लिखा। लेकिन यह सड़क किस विभाग की है पता नहीं चल सका। सड़क निर्माण करने वाली मंडी परिषद, पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों ने हाथ खड़े कर दिए क्योंकि किसी विभाग के अभिलेख में दर्ज ही नहीं है। शांतिनगर वार्ड निवासी एवं विधायक प्रतिनिधि विजय कुमार पांडेय राजू का कहना है कि सड़क कि समस्या को लेकर कई बार स्थानीय नगर पंचायत एवं क्षेत्रीय विधायक के माध्यम से शिकायत करवाई गई लेकिन किसी विभाग की ओर से एनओसी न जारी किए जाने के कारण यह सड़क अभी तक अधर में हुई है।
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वार्ड निवासी एवं चिकित्सक डॉ. इफ्तेखार अहमद का कहना है कि खराब सड़क पर लगातार चलते रहने से कमर एवं घुटनों में समस्या आ सकती है चुकी। यह सड़क पिछले लगभग 20 वर्षों से मरम्मत के अभाव में लगातार बिगड़ती जा रही है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोषित हो जाने के बाद इस सड़क पर अधिकतर मरीजों का ही आना जाना होता है। इसलिए अब इसका सुधर जाना अत्यंत ही आवश्यक हो गया है। वार्ड सदस्य गोपाल सिंह ने कहा कि बोर्ड की पहली बैठक में इसका प्रस्ताव दिया गया था। इसके अलावा इसके लिए डीएम से लगायत तमाम अधिकारियों तक बात पहुंचाई गई, मगर हालत अब भी नहीं बदले हैं। चेयरमैन धीरसेन निषाद ने कहा कि सड़क को दुरुस्त कराने के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, लेकिन कोई बजट नहीं मिला। 14वें वित्त के बजट से सड़क के निर्माण का प्रयास करवाया जाएगा।
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