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फोटो... डिजाइन में खामी कबूल करने में संकोच !

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डिजाइन में खामी कबूल करने में संकोच
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बस्ती।
पॉलीटेक्निक कॉलेज चौराहे पर छात्रा की मौत के बाद हुआ उपद्रव सिर्फ एक घटना का आक्रोश नहीं था, बल्कि वहां बार-बार हो रहे हादसों की अनदेखी करने से छात्र और आसपास के लोग भी प्रशासन और एनएचएआई से खफा थे। कारण यह कि खतरों के प्वाइंट्स चिह्नित होने के बावजूद उसे सुधारने की जरूरत नहीं समझी गई।
अमर उजाला ने जुलाई महीने में हाईवे की दशा को लेकर अभियान चलाया था, जिसमें फोरलेन पर हो रहे अपराध और हादसों की गंभीरता, वजह और उपाय उजागर करती लगातार रिपोर्ट प्रकाशित की गई। इसके बाद हाईवे अथॉरिटी की नींद तो टूटी, मगर अब भी असल समस्या नजरअंदाज की जा रही है। गोरखपुर से फैजाबाद के बीच दो दर्जन से ज्यादा ऐसे प्वाइंट्स बरकरार हैं, जहां डिजाइन में खामियों की वजह हादसे हो रहे हैं। एनएच अथॉरिटी ने उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया है, ताकि उनकी चूक पकड़ में न आए।
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यहां तक कि ट्रैफिक सिग्नल तक फॉलो नहीं किया गया है। ब्लिंकर लाइट, फ्लाईओवर रेडियम पट्टी आदि चिह्न भी स्पष्ट नहीं हैं। फर्राटा भरती जा रही गाड़ी के सामने अचानक डिवाइडर में कट पार कर रही बाइक-साइकिल सामने आ जाती है, जिससे बचाना कुशल ड्राइवर के लिए भी असंभव हो जाता है।
हर संभव उपाय कर रहा अथॉरिटी
एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के परियोजना प्रबंधक एके कुशवाहा का कहना है कि फुटहिया पर फ्लाईओवर बनाने के साथ ही अथॉरिटी दूसरे कई उपाय कर रही है, जिससे यात्रा सुरक्षित और सुगम हो और हादसों में कमी आए। दुघर्टना बाहुल्य वाले प्वाइंट्स चिह्नित करके वहां जरूरत के मुताबिक सिगनल, साइन ग्लो बोर्ड, डेलीटेनर्स आदि लगाए जा रहे हैं।
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इन प्वाइंट्स पर नहीं है ध्यान
उसे दुरुस्त करना शुरू तो किया है मगर अब भी वह मूल मुद्दे से दूर है। फोरलेन मुसाफिरों का डेथ-प्वाइंट्स बने तमाम ऐसे प्वाइंट़्स हैं, जहां आएदिन हादसे हो रहे हैं, मगर एनएचएआई का ध्यान उधर नहीं है। घघौवा पुल, विक्रमजोत, हर्रैया, संसारीपुर, भदावल, कप्तानगंज, गोटवा, फुटहिया, मूड़घाट, पॉलीटेक्निक, हड़िया, मुण्डेरवा डेंजर जोन चिह्नित है।
तीन वर्ष में हादसे
2015 172 हादसे 107 मौत 105 घायल
2016 198 हादसे 132 मौत 135 घायल
2017 218 हादसे 133 मौत 142 घायल
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