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फोटो.... काबू में रखें रफ्तार,फोरलेन डैमेज !

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काबू में रखें रफ्तार, फोरलेन डैमेज
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बस्ती।
गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन पर सफर कर रहे हैं तो फुटहिया के आसपास बेहद संभल कर चलें। यहां अजीबोगरीब तरीके से फोरलेन में बार-बार तोड़फोड़ की जा रही है। निर्माण और मरम्मत के बीच गुजरना खतरे से खाली नहीं है। पुलिस और हाईवे अथॉरिटी नियम भर का इंतजाम देखकर चुप्पी साधे हैं, जबकि उधर से गुजरने वालों की जान अटकी है।
जिला मुख्यालय से लखनऊ की ओर बढ़ते ही महज तीन किमी दूर स्थित फुटहिया चौराहे से कलवारी-टांडा रोड पर मुड़ने से पहले बीच में रोड काफी बेतरतीब है। साल भर पहले तक कलवारी से आने वाले लोगों को फोरलेन के उल्टी साइड से आना पड़ता था। इससे आएदिन हादसे होते रहे। काफी कसरत के बाद वहां अलग से साइड लेन बनाई गई। उस पर आवागमन शुरू हुआ भी नहीं था कि पुराना अमहट पुल ढह गया। इसके बाद वह रास्ता औचित्यहीन हो गया। अब उस चौराहे पर फ्लाई ओवर बनाने के नाम पर खुदाई की गई है। साथ ही पांच सौ मीटर से ज्यादा आरसीसी रोड भी तोड़ी जा रही है। एक साथ कई काम शुरू होने से चौराहे पर अव्यवस्था पनप गई है।
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वर्षों से जर्जर लुंबिनी-दुद्धी टू लेन
लुंबिनी-दुद्धी टू लेन निर्माणाधीन मार्ग पर फुटहिया चौराहे से कलवारी तक बेहद दिक्कत है। तीन वर्षों से उस रोड पर कहीं खोदाई होती है तो कहीं मरम्मत का काम चल रहा है। नगर बाजार, बेलाड़ी, केंवचा, कुसौरा आदि कस्बों में रोड की हालत खस्ता है। बेलाड़ी के राज कुमार सिंह, नगर बाजार के शैलेंद्र मिश्र, जय प्रकाश दुुबे, खड़ौआ के बब्बू का कहना है कि दिन-रात धूल उड़ती रहती है। स्वास्थ्य से लेकर चलने तक में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मरम्मत चले तो संभलकर चलें
एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि फोरलेन पर यातायात की कोई समस्या नहीं है। फुटहिया में फ्लाईओवर और डैमेज रोड बनाया जा रहा है, जिसकी वजह से कुछ अवरोध हैं। वाहन आराम से निकाले जा रहे हैं।

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इन सड़कों पर भी पड़ जाती साहबों की नजर
महुली को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग बदहाल
अमर उजाला ब्यूरो
बनकटी।
सड़क निर्माण को लेकर सरकार ने खूब मशक्कत की है। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की कवायद कितना मुकाम पाई यह तो जांच का विषय है, मगर अब भी तमाम ऐसी सड़कें हैं जिस पर यात्रा कठिन है। इसी में शुमार है बस्ती-महुली को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग देईसांड़ से बानपुर, खरका से खैराटी, टिकवाजोत से डिहीखास, ईटहर से कटाई की। इन मार्गों पर भी साहबों की नजर जो एक बार पड़ जाती तो शायद इसके दिन भी बहुर जाते, मगर अब तक ऐसा नहीं हो सका है।
इन सड़कों पर बडे़-बड़े गड्ढों में जलजमाव होने से पैदल चलना मुश्किल हो गया है। आएदिन कोई न कोई चोटहिल हो ही जाता है। ग्रामीण कहते हैं कि मामूली मरम्मत से इसे दुरुस्त किया जा सकता है लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते इसकी हालत बदलने से रही। ग्रामीण दूसरे रास्तों से छोटे वाहनों के माध्यम से जरूरत के सामान आदि लेकर आते-जाते हैं।
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सड़क की बदहाली से मर्माहत रामजी, पूर्व बीडीसी रामचन्दर जायसवाल, सदानन्द मिश्रा, जगदीश चौधरी, वीरेंद्र सिंह, राम वृक्ष चौधरी ने बताया कि बानपुर देईसाड़ मार्ग के पसड़ा, बानपुर, नौना, घुघसा, पुजन गंज आदि चौराहों के पास से पैदल गुजरना मुश्किल है। सरकार की घोषणा के बाद उम्मीद थी कि यह मार्ग दुरुस्त हो जाएंगे, मगर हालात नहीं बदले। क्षेत्र में दस किमी की दूरी तय करने के लिए ग्रामीणों को बीस किमी का चक्कर काटना पड़ता है। चंद्रिका प्रसाद, शिवाकान्त मिश्रा ने बताया कि बानपुर-देईसाड़ मार्ग से सैकड़ों गांवों के लोगों को बस्ती मुख्यालय, ब्लॉक और थाना आदि पर आने-जाने का मुख्य मार्ग है। यदि पहले इस पर ध्यान दिया गया होता तो यह सड़क आज उपयोगी सिद्ध होती। बृजेश पाल, रामजियावन, सुरेश, रविचन्द पांडेय, शैलेन्द्र सिंह, पन्ने लाल यादव ने बताया कि कई वर्षों से सड़कों की मरम्मत नहीं हुई है।
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