पालिका के 16 कार्यों की जांच का आदेश
बस्ती।
नगर पालिका में पिछले पांच सालों में बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग होने का मामला सामने आ चुका है। ऑडिट टीम भी गोलमाल की पुष्टि कर चुकी है। अब घोटाले का मामला विभागीय मंत्री तक पहुंच गया। अनियमित रूप से कराए गए 16 निर्माण सहित अन्य कार्यों की जांच का आदेश डीएम को दिया गया है। यह कार्रवाई बस्ती उद्योग व्यापार मंडल प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष आनंद राजपाल की शिकायत पर हुई। हालांकि, अभी तक जांच टीम नहीं बनाई गई है।
डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि जिन कार्यों की शिकायत की गई है, उनमें अधिकतर के मामले के जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। जिन निर्माण कार्यों की जांच के आदेश संसदीय कार्य, नगर विकास शहरी समग्र एवं नगरीय रोजगार तथा गरीबी उन्मूलन विभाग के कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने डीएम को दिया है। इनमें रेलवे स्टेशन से दक्षिण दरवाजा तक की नाली व सड़क निर्माण, बस्ती के अमहट घाट पर पार्क का निर्माण, बैरिहवां मोहल्ले के बभनगावां में सीसी रोड निर्माण, बीआरजीएफ योजना से कराए गए चईयाबारी व पुरानी बस्ती थाने के पीछे सीसी रोड, पालिका के पीछे कान्हा हाउस का निर्माण कार्य, नई बाजार से सुर्ती हट्टा होते हुए रेलवे स्टेशन को जाने वाली सड़क, रोडवेज से पचपेड़िया तक सड़क निर्माण, कंपनीबाग खालसा साइकिल स्टोर से विनोद बीज भंडार के बीच और रोडवेज पुलिस चौकी से शिवाय होटल तक इंटरलाकिगं पटरी, बीआरजीएफ व पिछड़ा वर्ग आयोग से चईयाबारी, नरहरिया मार्ग, रानी पोखरा रोड, रामेश्वरपुरी से मालवीय रोड, नई बाजार से रेलवे स्टेशन सुर्ती हट्टा मार्ग, आउट सोर्सिंग के जरिए बस्ती में 400, बभनान में 125, हर्रैया में 140 और रुधौली में 105 कर्मचारियों का वेतन बिना कार्य कराए भुगतान कर देना, करुआ बाबा से रेलवे तक की सड़क, कटेश्वरपार्क सहित दो अन्य पार्कों के पुनर्निर्माण पर धन की बंदरबांट करना और मालवीय रोड के निर्माण में अनियमितता शामिल है।
झाडू, फावड़ा, बेलचा के नाम पर गोलमाल
बस्ती।
ग्राम निधि प्रथम के धन को निजी की तरह इस्तेमाल करने वाली ग्राम पंचायतों ने सफाई कर्मियों के उपकरण खरीद में भी भारी गोलमाल किया है। नौ साल हो गए मगर ग्राम पंचायतों ने सफाई कर्मियों को उपकरण ही नहीं दिया, जबकि हर साल इस मद के धन को निकाला जाता रहा है।
प्रत्येक ग्राम पंचायतों की ओर से इस मद में 18 हजार रुपये से अधिक धन निकालकर बंदरबांट कर ली गई। हर साल लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक की बंदरबांट ग्राम पंचायतें कर रही हैं। उपकरण के लिए सफाई कर्मी दो बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। शुक्रवार को डीएम और सीडीओ को ज्ञापन भी दिया गया। उपकरण न मिलने से अब तक तीन सफाई कर्मियों को सांप डंस चुका है। एक शिकायत पर सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय ने डीपीआरओ को पत्रावली के साथ तलब किया है।
जिले में लगभग 3200 सफाई कर्मी कार्यरत हैं। नियमानुसार प्रत्येक कर्मी फावड़ा, झाडू, बेलचा, खुरचा, ढेला, तौलिया, ब्लीचिंग पाउडर, साबुन और तौलिया मिलना चाहिए। इसमें झाडू और तौलिया दो माह में एक बार, ठेला साल में एक बार देने का प्रावधान है। डीपीआरओ गोपालजी ओझा ने बताया कि उपकरण खरीदने और उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। इसके लिए राज्य वित्त आयोग और 14वें वित्त आयोग से धन का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायती राज सफाई कर्मचारी के जिलाध्यक्ष अतुल कुमार पांडे और उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी के जिलाध्यक्ष अजय कुमार आर्य ने बताया कि सफाई कर्मियों की नियुक्ति वर्ष 2008 में हुई। बताया कि नियुक्ति वाले साल को छोड़कर अभी तक एक भी सफाई उपकरण नहीं मिला। जबकि ग्राम पंचायतें हर साल उपकरण खरीद के नाम पर 18 हजार रुपये से अधिक ग्राम निधि प्रथम से धन निकालकर बंदरबांट कर रही है। इस खेल में एडीओ पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी और प्रधान तक शामिल है। बताया कि सफाई उपकरण न मिलने से अब तक मनोज भारती, रामपूजन और शिवप्रकाश को सांप डंस चुका है। जिले में कुल 1247 ग्राम पंचायतें हैं।