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20 ने की दावेदारी, पर्चों की जांच आज

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प्रमसपा प्रत्याशी ने किया नामांकन। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। लोकसभा निर्वाचन-61 क्षेत्र से सांसद बनने के लिए 20 दावेदार मैदान में हैं। हालांकि, कुल 26 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्रों की खरीदारी की थी, लेकिन मंगलवार की शाम तीन बजे अवधि समाप्त होने तक सिर्फ नौ उम्मीदवार ही नामांकन करने पहुंचे। इस तरह कुल मिलाकर 20 प्रत्याशी मैदान में हैं। हालांकि, मुख्य मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और गठबंधन प्रत्याशी के बीच माना जा रहा है। 
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जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी डॉ राजशेखर ने बताया कि 24 अप्रैल यानी बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 26 को नाम वापसी होगी। उसी समय उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा। सपा-बसपा एवं रालोद के गठबंधन प्रत्याशी रामप्रसाद चौधरी, भाजपा प्रत्याशी सांसद हरीश द्विवेदी के अलावा कुल आठ लोगों ने सोमवार को नामांकन किया था। इसमें रंगीलाल यादव (निर्दल), पंकज दुबे (लोक गठबंधन पार्टी), दामोदराचार्य (हिंदू महासभा), रोहित पाठक (हिंदुस्तान निर्माण), राम प्रसाद चौरसिया एडवोकेट (जनहित किसान पार्टी), प्रमोद शुक्ल (निर्दल) शामिल रहे। इससे पहले 20 अप्रैल को कांग्रेस प्रत्याशी राजकिशोर सिंह, भासपा से विनोद कुमार और निर्दलीय चंद्रमणि ने नामांकन भरा था। 
मंगलवार को नामांकन के अंतिम दिन आम जनता पार्टी के साधू शरन, आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के लायक अली, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया से बाल गोविंद यादव, महा परिवार पार्टी से सोनू उर्फ अंबरीशदेव गुप्ता ने पर्चा भरा। इसके साथ ही सर्वोदय भारत पार्टी के शीतला प्रसाद ओझा, बहुजन संघर्ष पार्टी (कांशीराम) से भगवानदास एवं नागरिक एकता पार्टी के रघुनाथ ने नामांकन किया। अजय मोहन गांधी एवं अखिलेश कुमार ने निर्दल के रूप में नामांकन किया। उधर, शोषित समाज पार्टी के दो उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र लिया था। सोमवार को पहले राम निहोर और बाद में राम ज्ञान चौधरी ने पार्टी का उम्मीदवार बताकर पर्चा लिया। मगर मंगलवार को समय सीमा समाप्त होने तक दोनों में से कोई नहीं लौटा। -
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संख्या को लेकर असमंजस बरकरार
जैसा कि कयास लगाया जा रहा था, वही हुआ। कुल मिलाकर 20 नामांकन पत्र दाखिल हो गए, जबकि ईवीएम में सिर्फ 15 प्लस वन (नोटा बटन) की ही जगह है। यानी बूथों पर डबल ईवीएम से मतदान कराने की भारी भरकम कवायद की संभावना बरकरार है। यदि सभी उम्मीदवार नाम वापसी के बाद बरकरार रहे तो मतदान कराने के लिए डबल ईवीएम की जरूरत होगी। निर्वाचन कार्यालय भी इस बारे में कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है।
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