चिप्स और कुरकुरे के पैकट में नहीं कोई जानकारी।
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बस्ती। असल जैसे पैक में नकली सामान। यह बिल्कुल सच है। जिले में बच्चों के पसंदीदा नामचीन कंपनियों के पैकेट बंद चिप्स व कुरकुरे के जैसे ही पैकेटों में नकली सामानों से बाजार पटे हैं। इनका उपयोग सेहत के लिए हानिकारक है। क्योंकि न तो इनके पैकेट बंद सामानों में मानक का पालन किया गया है और न ही इनको भारतीय मानक संस्थान से इसकी गुणवत्ता की जांच की जरूरत होती है। ऐसे में इन्होंने किसी सामग्री का इसके निर्माण में प्रयोग किया है। इसका किसी को पता नहीं होता है।
बच्चों के पसंदीदा चिप्स कुरकुरे की तरह ही बाजार में मानक विहीन तमाम पैकेट बंद सामग्री उपलब्ध है। शहर में तो यह कहीं-कहीं नजर आता है, मगर ग्रामीण इलाकों में इन असली जैसे नजर आने वाले पैकेट बंद सामानों से पटा है। इनका बच्चे, जवान व बूढ़े सभी उपयोग कर रहे हैं। इनका प्रयोग सेहत के लिए खतरनाक है। इसका उन्हें जरा भी ज्ञान नहीं है। ऐसे में कम लागत में बेहतर मुुनाफा लेकर सेहत के साथ खिलवाड़ कर नकली कंपनियां अपना जेब भर रही हैं। बाजार में उपलब्ध इन उत्पादों पर न तो मानक की मुहर है और न ही इनमें बंद खाद्य पदार्थ में क्या-क्या प्रयोग किया गया है, इसका भी उल्लेख है।
गैस्ट्रो विशेषज्ञ डॉक्टर ने बताया घातक
ऐसे पदार्थों के उपयोग के सवाल पर गैस्ट्रो रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश सिंह कहते हैं कि यूं तो पैकेट बंद चिप्स व अन्य उत्पादों का अत्याधिक प्रयोग घातक है। उस पर यदि नकली खाद्य पदार्थ उपयोग में लाया जाए, तो उसका परिणाम और खतरनाक है। इसके प्रयोग से बच्चों की भूख कम होने लगती है। उनकी पाचन शक्ति पर भी इसका असर होता है। असल जैसे नजर आने वाले पैकेट बंद उत्पादों में प्रयोग किए जाने वाले खाद्य तेल व अन्य सामग्री किस स्तर की है। इसका कोई पता नहीं होता है। ऐसे में बच्चों की आंत, लीवर व पाचन शक्ति को प्रभावित करता है।
मामले की जांच कराई जाएगी: अभिहित अधिकारी
खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव ने कहा कि असल जैसे पैकेट में नकली उत्पाद बाजार में है। यह संज्ञान में नहीं है। न तो ऐसी कोई शिकायत ही आई है। इसकी जांच करा ली जाएगी। यदि कहीं ऐसा पाया गया तो संबंधितों पर कार्रवाई होगी। वैसे जहां तक मैं जानता हूं, नामचीन कंपनियां खुद ही जांच-पड़ताल करती हैं।