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यहां खतरे में नौनिहालों का जीवन

Sun, 09 Dec 2018 09:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
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school - फोटो : amar ujala
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दुबौलिया। ब्लॉक के सरयू नदी किनारे स्थित आधा दर्जन गांव में स्कूल में पढ़ने वाले नौनिहालों का जीवन खतरे में है। कारण यह कि नियम ताक पर रख कर सरयू नदी किनारे व बंधों पर स्कूल भवनों का निर्माण करा दिया गया है। यदि जरा सी चूक हो जाए तो इनकी जान पर आ बनेगी।
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बात करते हैं प्राथमिक विद्यालय दलपतपुर से, इस विद्यालय में 75 छात्र नामांकित हैं, लेकिन विद्यालय की भौगोलिक स्थिति यह है कि सरयू नदी के तट व बीडी बांध से सट कर इसका निर्माण करा दिया गया है। स्कूल भवन में दो कमरे व छोटा सा बरामदा ही है। एक कमरे में चार महीने नदी का पानी भरा रहता है, तो मात्र एक कमरे में 75 छात्रों को पढ़ाया जाता है। यहां शिक्षा मित्र सहित कुल तीन शिक्षक हैं। प्रधानाध्यापक अर्जुन कुमार ने बताया की बंधे से सटे इस विद्यालय में प्रवेश करने के लिए बंधे से ही सीढ़ी बनाई गई है, जरा सी चूक होने पर बच्चे बंधे पर चढ़ जाते हैं। बाढ़ के समय हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई बच्चा नदी की तरफ न चला जाए। इसके अगल-बगल जगह भी नहीं है कि ठंडक में धूप में बैठ कर पढ़ाया जा सके। यही हाल प्राथमिक विद्यालय आराजी डूही धर्मूपुर ऐहतमाली का है। यह प्राथमिक विद्यालय जिले के अति संवेदनशील तटबंध चांदपुर के मुहाने पर स्थित है। स्कूल परिसर में आने जाने का रास्ता भी नहीं है। बांध काट कर रास्ता बनाया गया है। इसी रास्ते से छात्र व अध्यापक विद्यालय में आते-जाते हैं। प्रधानाध्यापक फुर्ती राम साहू कहते हैं कि बाउंड्रीवाल न होने से हमेशा सांस अटकी रहती है क्योंकि विद्यालय नदी किनारे बना हुआ है।
बाढ़ के समय बच्चों की रखवाली करना भारी पड़ जाता है। वहीं टेढवा गांव में स्थित प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के परिसर में एक फीट से अधिक मोटाई में बालू जमा है। बालू होने के कारण स्कूल के बच्चे न तो ठीक से पढ़ पाते हैं न तो खेल पाते हैं और न ही मध्याह्न का भोजन कर पाते हैं। टेढ़वा प्राथमिक विद्यालय मे एक सौ आठ बच्चों का नामांकन है। प्रधानाध्यापक महेश कुमार ने बताया कि विद्यालय परिसर से बालू हटवाने के लिए जिम्मेदारों से कई बार कहा गया। प्राथमिक विद्यालय रमना तौफीर में 59 बच्चों का नामांकन हुआ है। यहां भी परिसर में बालू जमा है। प्रधानाध्यापक ओम प्रकाश चौहान ने बताया की पिछले वर्ष बालू के ऊपर मिट्टी डलवाया गया, जिससे कुछ राहत हुई है। परिसर में लगे हैंडपंप दूषित जल उगल रहे हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. राम मणि शुक्ल कहते हैं कि छोटे-छोटे बच्चे इसी तरह बालू में खेलते व पढ़ते रहेंगे तो उन्हें बीमारी का खतरा रहेगा। बीईओ ध्रुव प्रसाद जायसवाल का कहना है कि मामला संज्ञान में है। समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
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