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यात्रियों को कबाड़ बसों से पहुंचाया जा रहा
रोडवेज का सुरक्षित यात्रा का दावा हवाहवाई साबित हो रहा
11 लाख किमी पर माना जाता है निष्प्रयोज्य
30 रोडवेज की बसों का पूरा हो चुका है जीवन
56 बसें 10 लाख किमी से ऊपर चल चुकी हैं
86 निगम की और 17 अनुबंधित बसे हैं बेड़े में
अरुण/राज प्रकाश
बस्ती। यात्री सुविधाओं पर सरकार हर वर्ष लाखों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन रोडवेज बसों पर यह खर्च दिखाई नहीं पड़ता। महकमे की लापरवाही से यात्रियों की जान जोखिम में फंस सकती है। सुरक्षित यात्रा का दावा भी हवाहवाई साबित हो रहा है। वर्कशॉप में कम स्टाफ होने के चलते न तो बसों की समय से मरम्मत हो पा रही है, और न ही साफ-सफाई।
कहने को तो बस्ती डिपो के बेड़े में कुल 103 बसें हैं। इनमें 86 बसें निगम की और 17 अनुबंधित हैं। लगभग सभी बसें अपनी आयु पूरी करने के कगार पर हैं। कारण यह कि 11 लाख किलोमीटर चल चुकी बसें निष्प्रयोज्य की श्रेणी में आ जाती हैं। बस्ती रोडवेज में 30 बसें 11 लाख किलोमीटर से ज्यादा का सफर कर चुकी हैं जिनका परिचालन आज भी किया जा रहा है। 56 बसें ऐसी हैं जो सितंबर में 10 लाख किलोमीटर से ऊपर चल चुकी हैं। हैरानी यह कि इनमें 50 बसें लंबी दूरी की भी हैं। जो दिल्ली, आगरा, कानपुर सहित अन्य स्थानों के लिए यात्रा कर रही हैं। अंदरखाने की बात यह कि जैसे-तैसे ठोक कर इन बसों को संचालित किया जा रहा है। अब आप ही सोचें कि इन बसों से यात्रा कितनी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन बसों का फिटनेस प्रमाण पत्र भी जारी है। इस संबंध में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक छोटे लाल कहते हैं कि स्थित से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। वर्कशॉप में कर्मचारियों की लंबे समय से कमी है। रिक्त पदों पर तैनाती के लिए पत्र लिखा गया है। बसों की स्थित से भी अवगत कराया गया है।
डिपो में कर्मियों की संख्या
वर्कशॉप में स्वीकृत पद 107 तैनाती 39
डिपो में लिपिक स्वीकृत पद 40 तैनाती 27
नियमित परिचालक पद 216 तैनाती 79
नियमित चालक पद 185 तैनाती 68
संविदा चालक 123
संविदा परिचालक 129
आउसोर्सिंग 32