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कृषि अनुदान में गोलमाल, किसानों के रुपये बिचौलियों ने लिया

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हाईब्रिड धान के अनुदान में भारी गोलमाल
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बिचौलियों ने किसानों से लिया सुविधा शुल्क

दुबौलिया।
स्थानीय और कप्तानगंज ब्लॉक क्षेत्र में हाईब्रिड पर मिलने वाले वाले अनुदान में भारी गोलमाल का मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि विभाग के बिचौलियों ने मिलकर अनुदान के धन की बंदरबांट कर ली। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने डीएम से करते हुए अनुदान वापस कराने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। एडीओ एजी राम कुमार ने बताया कि अनुदान बीज को लेकर जिलास्तरीय टीम ने किसानों से जानकारी ली है। बताया कि किसानों के फर्जी, खसरा, खतौनी की जांच की जा रही है।
डीएम के आदेश पर जांच करने पहुंची जिलास्तरीय टीम ने किसानों से पूछताछ की। पूछताछ में किसानों ने अनुदान में गोलमाल करने की शिकायत की। हाईब्रिड धान अगस्त में ब्लॉक पर अनुदान के लिए आया था। विभागीय अधिकारी के मुताबिक 100 हेक्टेयर जमीन पर बुवाई का लक्ष्य था। इसमें एक किसान को प्रदर्शन के लिए दो एकड़ के बीज मिलने थे। धान की कीमत 300 और 260 रुपये प्रति किलो निर्धारित था। किसानों को उसके लिए खसरा, खतौनी और बैंक पास बुक जमा करना था। ताकि खाते में अनुदान की रकम पहुंच जाए। मगर विभागीय अधिकारियों ने किसानों को सीधे लाभ न पहुंचाकर बिचौलियों के माध्यम से भेजे किसानों को अनुदान का बीज दे दिया। उसके दो एकड़ का धान बीज का मूल्य नौ और सात हजार रुपये के हिसाब से खाते में भेजा गया। किसानों को बिचौलियों ने पांच सौ रुपये देकर बाकी रकम हड़प ली। कुछ किसानों को एक रुपये नहीं मिले। ब्लॉक के मेघूवापुर, चिलमा, कप्तानगंज के खजुहा, गुवांव, नरायनपुर, महादेवरी व भदना गांव के किसानों के अनुदान के रकम का गोलमाल किया गया है। इन कथित नेताओं ने खतौनी व खसरा फर्जी लगाकर रकबा बढ़ा दिया है। ताकि अनुुदान की रकम अधिक मिले सके। इसके चलते चिलमा में एक बंगाली डॉक्टर के खाते में अनुदान की रकम चली गई है। मगर विभागीय अधिकारियों व बिचौलियों, कथित किसान नेता की मिलीभगत से किसानों के अनुदान के लाखों रुपये हड़प लिए। भाकियू नेता दीनानाथ चौधरी और राधेश्याम चौधरी ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने बिचौलियों से मिलकर अनुदान की रकम में गोलमाल किया है। किसान सुनील कुमार, शांति, संदीप, मो. शमीम एवं सावित्री ने बताया कि विभाग और विभाग के बिचौलियों ने मिलकर अनुदान का गोलमाल कर लिया। बताया कि इसमें किसान नेता भी शामिल हैं।
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डीएम ने खरीद पर कसे जिम्मेदारों के पेंच

बस्ती।
न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना को लेकर शासन के तेवर भांप प्रशासन ने भी मशक्कत शुरू कर दी है। इसे लेकर मंगलवार की देर शाम डीएम अरविंद कुमार सिंह ने खरीद अधिकारियों के पेंच कसे। निर्देश दिया कि 15 अक्टूबर तक क्रय केंद्रों की सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। शत-प्रतिशत खरीद के लिए अभी से तैयारी की जाए।
तहसील सभागार में खरीद को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम ने क्रय केंद्र एजेंसियों के प्रभारियों और खाद्य रसद विभाग कीविपणन शाखा के अधिकारियों के साथ घंटों मशक्कत की। अब तक की तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए डीएम ने एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे क्रय केंद्रों के खातों में भरपूर धनराशि और केंद्र पर बोरा की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर लें। उन्होंने मिलों के संबद्धीकरण का प्रस्ताव व क्रय केंद्र प्रभारियों के नामों की सूची देने का भी निर्देश दिया। निर्देशित किया कि राइस मिलर्स से बैंक गारंटी लेकर ही अनुबंध किया जाए। डीएम को बताया गया कि जिले में खाद्य विभाग के 13, पीसीएफ के 47, कर्मचारी कल्याण निगम के दो, प्राइवेट प्लेयर्स के 15, यूपी एग्रो के एक, एफसीआई के दो, समितियों के नौ तथा यूपीपीसीयू के चार क्रय सहित कुल 93 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इसके माध्यम से किसानों से धान खरीद होगी। समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रभारी अधिकारी धान खरीद भगवान शरण, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, जिला प्रबंधक एफसीआई, डिपो मैनेजर अथवा गुणवत्ता नियंत्रक, मंडी सचिव, बाटमाप निरीक्षक के अलावा तमाम मिलर्स मौजूद रहे।

धान खरीद के पहले पायदान पर पीसीएफ को झटका

बस्ती।
न्यूतम मूल्य समर्थन योजना में धान खरीद के शासन के प्लान को पहले पायदान पर झटका लगा है। पीसीएफ से जुड़ी सहकारी समिति के सचिवों ने खरीद को इस बार धान खरीद शुरू होने से पहले अधिकारियों पर वसूली का आरोप लगाते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। सचिवों ने धान खरीद में असमर्थता जताते हुए शासन व प्रशासन के अलावा मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
धान खरीद को लेकर जहां खूब मशक्कत हो रही है। जिले में खरीद की तैयारी जोरों पर है। धान खरीद के लिए जिले में कुल 93 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से अकेले 47 केंद्र पीसीएफ के होंगे। शासन ने इस बार रिकॉर्ड धान खरीद की योजना के तहत 15 अक्टूबर तक सभी क्रय केंद्रों को तैयार कर लेने के निर्देश दिए हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने जिला प्रबंधक पीसीएफ पर वसूली का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री सहित जिला स्तरीय अधिकारियों को पत्र लिखा है। कहा है कि इन स्थितियों में धान खरीद संभव नहीं होगा। ऐसे में वे क्रय केंद्र संचालित करने में असमर्थ हैं।
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इधर, खबर है कि खाद्य विभाग में भी केंद्र प्रभारी शासन की नीतियों के चलते परेशान हैं। हालांकि, वह खुलकर तो खरीद का विरोध नहीं कर रहे हैं। मगर विभागीय उच्चाधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने का दबी जुबान आरोप मढ़ रहे हैं। हालांकि, अधिकारी धान खरीद को लेकर निश्चिंत हैं लेकिन जो स्थितियां हैं उससे यह प्रतीत होने लगा है कि खाद्य विभाग की खरीद इस बार फिर पिछले वर्षों की तरह ही होगी। सरकारी तंत्र के पूरी तरह फेल होने की उम्मीद प्राइवेट प्लेयर्स लगाए बैठे हैं। वे अभी से ही अधिकारियों की परिक्रमा में जुटे हैं। वे राइस मिलों से सेटिंग-गेटिंग कर धान के बजाय सीधे चावल खरीदने के जुगाड़ में जुटे हैं। इधर, बुधवार को पीसीएफ की खरीद करने वाले सचिव अयोध्या प्रसाद पांडेय, राम सरन चौधरी, दिनेश कुमार, हरीराम वर्मा सहित 34 सचिवों ने धान खरीद से हाथ खड़े कर दिए हैं। आरएफसी श्री प्रकाश मिश्र ने कहा कि सचिवों का पत्र संज्ञान में नहीं है। रही विभागीय क्रय केंद्र प्रभारियों की बात तो शासन की नीति के अनुसार खरीद करना ही होगा। खरीद में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई होगी। वहीं, एआर कोऑपरेटिव आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि पत्र मिला है। इसकी जांच कराई जता रही है।
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