पसीने की कमाई से लिख रहे तकदीर
मुफलिसी में बीतते थे दिन, अब बहुर रहे
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। संघर्ष जीवन का हिस्सा है, जो इससे घबरा गया वो पीछे हो गया है और जिसने अपना लिया, उसने सब कुछ पा लिया। यही कहानी है उन मेहनतकश लोगों की जो पसीने की कमाई से तकदीर लिख रहे हैं।
जिले में कुछ ऐसे मेहतनकश हैं जो अपने साथ ही परिवार के भरण-पोषण का जिम्मा उठाए हुए हैं। यही नहीं बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। शहर के राजकीय विद्यालय के समीप स्थित पेट्रोल पंप पर कार्य कर रहीं, 22 वर्षीय महसों निवासी सुशीला बताती हैं कि वो पिछले छह माह से इस पंप पर कार्य कर रहीं हैं। बताती हैं कि पिता के देहांत के बाद उनके व भाई के कंधे पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। बताती हैं कि हाईस्कूल तक की शिक्षा लेने के बाद वह अब खुद के पैरों पर खड़ी हैं और परिवार चलाने में मदद कर रही हैं। इसी पंप पर कार्य कर रहीं वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के बकसई गांव निवासिनी दुर्गावती बताती हैं कि उनके तीन बच्चे हैं, दो छोटे हैं और बड़ी बेटी छह वर्ष की है। बताती हैं कि दोनों बच्चों को स्कूल भेजती हैं। उनका सपना है कि बच्चे बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। बड़ी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहती हैं और बाकी दो बेटियों को पुलिस अधिकारी। जिले में ही पिछले आठ वर्ष से बर्फ बेचने का काम कर रहे डोमा चौधरी बताते हैं कि वे पश्चिमी चंपारण बिहार के रहने वाले हैं। बताते हैं कि परिवार में पति-पत्नी के अलावा माता और पिता हैं, दो बेटे हैं जो बड़े हो गए हैं और दो बेटियां हैं। इनमें से बड़ी बेटी के हाथ अभी हाल ही में पीले किए हैं, बताते हैं कि छोटी बेटी पढ़ रही है। वह उसे पढ़ा-लिखाकर बड़ा अफसर बनाना चाह रहे हैं। कहते हैं कि लंबे समय से वे परिवार से दूर रहे हैं। त्योहार या किसी विशेष अवसर पर गांव जाते हैं। कहते हैं कि परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी। काफी कम उम्र में उन्होंने रोटी के लिए अपना घर छोड़ दिया था। 43 वर्षों से रिक्शा चलाकर परिवार चलाने वाले को रहमान अली रहमान बताते हैं कि बड़ी ही मुफलिसी में दिन बीते हैं। इनके पास तीन बेटियां और तीन बेटे हैं। इनमें से इसी की कमाई के बदौलत तीनों बेटियों का विवाह कर चुके हैं और बेटे की भी शादी कर चुके हैं। कहते हैं कि कम उम्र में ही उनके सिर से बाप का साया उठ गया था, जिसके बाद उन्होंने भाइयों सहित पूरे परिवार को सहेजा। आज उनके पास खुद का मकान है और बेहतर स्थिति में हैं। बच्चे भी अपना कमा-खा रहे हैं।