39 लाख 72 हजार खर्च, बोरिंग फेल
सल्टौआ गोपालपुर में 2006-07 में टंकी का निर्माण हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
वाल्टरगंज।
ग्रामीण स्वच्छ पेयजल योजना के तहत सल्टौआ गोपालपुर में 39 लाख 72 हजार रुपये की लागत से बनी टंकी और बोरिंग फेल हो गई है। गांव वालों की नाराजगी देखकर विभाग ने मैकेनिकल डिवीजन फैजाबाद को पत्र लिखा है।
पेयजल योजना के तहत जल निगम ने पानी टंकी और बोरिंग का निर्माण वर्ष 2006-07 में कराया था। काफी दिन से पानी आपूर्ति नहीं होने पर जल निगम के अधिशासी अभियंता ने बताया कि बोरिंग फेल हो गई है। इससे पानी के साथ बालू अधिक आ रहा है। मैकेनिकल विभाग फैजाबाद को बोरिंग की जांच और रीबोर के लिए पत्र लिखा गया है। 10 साल में बोरिंग फेल हो जाने पर गांव वालों ने विभाग की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सल्टौआ के लोगों ने बताया कि मजबूरन प्रदूषित जल का प्रयोग कर रहे हैं। गांव के भोला जायसवाल का कहना है कि 2006-07 में टंकी का निर्माण कराया गया। ताकि आसपास के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया हो सके। लेकिन यह कई महीनों से बंद पड़ा हुआ है। अनीस अहमद ने बताया कि अभी तक पूरे सल्टौआ गांव में ही लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है। बताया कि हमारे गांव की दूरी डेढ़ किलो मीटर है। पाइप बिछाने के लिए पैमाइश तो की गई लेकिन अभी तक पाइप नहीं बिछाया गया। संतोष तिवारी ने बताया कि जलनिगम के टंकी का निर्माण हुए 10 वर्ष बीतने को हैं फिर भी अभी तक सल्टौआ के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच सका। पवन गौतम ने बताया कि मात्र कुछ ही दिन पानी आया था। अशर्दुल्ला इस्लाम का कहना है कि टंकी से किलोमीटर की परिधि में पाइप लाइन द्वारा शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। लेकिन 10 वर्ष में दो किमी की दूरी पर भी पानी नहीं मिल पा रहा है। पिंटू गौड़ का कहना है कि कई स्थानों पर बनाये गए वाटर पोस्टों पर पानी बहुत कम आता है। सचिन, रवि, दिनेश, संतोष शुक्ल, दिनेश कसौधन, प्रदीप सहित अनेक लोगों ने स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बहाल कराए जाने की मांग की है। इस बाबत जल निगम के अधिशासी अभियंता विश्वनाथ ने बताया कि बोरिंग फेल हो गई है। इसके लिए फैजाबाद पत्र लिखा गया है। विभाग द्वारा पुन: बोरिंग कराई जाएगी। उसके बाद ही लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा।
भू-माफिया पर कार्रवाई करने में सदर तहसील विफल
इस तहसील में सबसे अधिक 1335 जमीन पर है कब्जा
अरबों रुपये की सरकारी जमीन पर किया गया है कब्जा
तहसील का एंटी-भूमाफिया टॉस्क फोर्स हुआ निष्क्रिय
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती।
योगी सरकार के एंटी-भूमाफिया अभियान को सदर तहसील प्रशासन पलीता लगाने में लगे हुआ है। भू-माफिया के विरुद्ध तहसील में गठित एंटी-भूमाफिया टॉस्क फोर्स शिकायतों के बावजूद कब्जा हटाने के लिए जा नहीं रहा है। लेखपाल और कानूनगो को भेजकर खानापूरी कर दी जा रही है। जबकि इस टॉस्क फोर्स में एसडीएम, सीओ और तहसीलदार सहित कानूनगो और लेखपाल शामिल किए गए हैं। भू-माफिया इस टॉस्क फोर्स पर भारी पड़ रहे हैं। सबसे अधिक भू-माफिया ने इसी तहसील क्षेत्र के तालाब, चारागाह, चकरोड और बंजर सहित अन्य सरकारी जमीन पर वर्षों से अतिक्रमण और कब्जा कर रखा है। 1335 अतिक्रमणकारी लगभग 36 हेक्टेअर के अरबों रुपये की अचल संपत्ति को निजी के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। खेती-बारी से लेकर व्यावसायिक कारोबार तक कर रहे हैं। वैसे तो भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में सदर तहसील के अतिरिक्त अन्य हर्रैया, भानपुर और रुधौली तहसील प्रशासन कार्रवाई में पीछे हैं। मगर सबसे अधिक पीछे सदर तहसील है। तहसील रिकॉर्ड के मुताबिक 31 अगस्त 2017 तक शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई हैं। उनमें सदर तहसील में अवैध कब्जे वाली सरकारी जमीन के क्षेत्रफल को 35.372 हेक्टेअर बताया गया है। इन पर 1335 अतिक्रमणकारियों का कब्जा होना दिखाया गया है। कार्रवाई के नाम पर ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा करने के आरोप में 25 वाद, पांच के विरुद्ध मुकदमा और कब्जे से 79 हेक्टेअर जमीनों को मुक्त कराने का दावा किया गया है।
सदर तहसील के कुसौरा बाजार, कलवारी मुस्तकहम, नगरबाजार, करहली बाजार, पिपरा गौतम, दयालपुर, कूढ़ापटटी पृथी, माड़न, पिपरौला, बहादुरपुर, अमिलहा, निरंजनपुर, सिसवारी बदन सिंह, बेईली, पोखरनी, बलगोड़ा, खडौवाजाट के राम अचल चौधरी, पल्टूराम, राजकुमार शर्मा, अब्दुलहक, रामविलास चौधरी, अगई, भरथू, अजय कुमार आर्य सहित अन्य ने बताया कि जब तक तहसील प्रशासन नहीं चाहेगा तब तक न तो एक भी भू-माफिया केेे विरुद्ध कार्रवाई होगी और न ही उनके कब्जे से एक भी इंच जमीन को छुड़ाया जा सकता है। कहते हैं कि अर्जी दे देकर परेशान हो गए। मगर कोई सुनने वाला तक नहीं हैं। खनापूरी के लिए कभी-कभी कानूनगो और लेखपाल गांव में चले आते हैं। अभी तक एक बार भी एंटी-भूमाफिया टॉस्क फोर्स की पूरी टीम नहीं आई।
डीएम ने कहा, होगी कार्रवाई
बस्ती। डीएम अरविंद कुमार सिंह ने भी एंटी-भूमाफिया के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने के मामले में सदर तहसील प्रशासन की कमी को माना। कहा कि इसके लिए सभी तहसीलों के एसडीएम को भू-माफिया के विरुद्ध कार्रवाई करने और उनके कब्जे से जमीन को छुड़ाने के आदेश दिए गए हैं। बताया कि अभी 12 भू-माफियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। 205 हेक्टेअर से अधिक जमीन को खाली भी कराया जा चुका है।
अन्त्येष्टि स्थल के गोलमाल का मामला मंत्री तक पहुंचा
पंचायत राज मंत्री ने डीएम को जांच का आदेश दिया
रामनगर के ग्राम बडौगी का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती।
गोलमाल करने वालों ने श्मशान को भी छोड़ा। अन्त्येष्टि स्थल के निर्माण में जिस तरह प्रधान और सेक्रेटरी ने गोलमाल किया वह सामने आ रहा है।
अंत्येष्टि स्थल निर्माण का मामला विभागीय मंत्री भूपेंद्र सिंह तक पहुंच गया है। मंत्री ने डीएम को मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। मामला रामनगर ब्लॉक के ग्राम बड़ौगी का है। हालांकि, विभाग 13 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की लीपापोती करने में लगा हुआ है। घपले में फंसे 68 प्रधान और सेक्रेटरी के खिलाफ कार्रवाई करने में विभाग अभी सोच रहा है। जबकि जांच रिपोर्ट आए लगभग दो माह हो गया और नोटिस भी जारी हो चुका है। इसे देखते हुए कुछ लोग मामले को विभागीय मंत्री तक ले जा रहे हैं। इससे विभाग की बदनामी के साथ योगी के सरकार के भ्रष्टाचार रहित प्रदेश के दावे की हवा भी निकल रही है। विभागीय मंत्री को भेजे गए पत्र में शिकायतकर्ता ने कहा कि अन्त्येष्टि स्थल मामले में प्रधान और सेक्रेटरी पर कार्रवाई न होने से विभाग और प्रदेश सरकार की बदनामी हो रही है।
पीएम आवास को लेकर प्रधान-सचिवों में ठनी
जांच के बाद लाभार्थियों के चयन में 40 फीसदी छंटे
राजेश सिंह
विक्रमजोत।
केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार प्रधानमंत्री आवास योजना को धरातल पर उतारने के लिए राजनीतिक लोगों का सामना करना पड़ रहा है। जांच पड़ताल कर बन रही सूची में नाम शामिल करने का जुगाड़ फेल होने पर ग्राम प्रधानों और सचिवों में ठन गई है। रजिस्ट्रेशन के बावजूद 40 फीसदी पात्रों के नाम भौतिक सत्यापन में निकल गए हैं।
बीडीओ जीतेंद्र सिंह ने पात्रों को ही योजना का लाभ मिले इसे लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सचिवों से कराई गई लाभार्थियों की जांच के लिए गोपनीय टीम से जांच भी करा रहे हैं। इसमें यह सच्चाई सामने आई है कि आलीशान मकानों में रहने वाले भी पात्रता के लिए गांव के बाहर छप्पर डाल कर रहने लगे थे। कई ग्राम प्रधान अपने चहेतों को आवास न मिलते देखकर ग्राम पंचायत अधिकारियों के स्थानांतरण करवाने के मुहिम में लग गए हैं। विक्रमजोत ब्लॉक की 79 ग्राम पंचायतें हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुल 622 का लक्ष्य रखा गया है। 1056 लोगों ने आवास पाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इसमें 20 फीसदी पात्र लाभार्थियों की जांच अभी लंबित है।
622 आवासों के लक्ष्य में 390 आवास अनारक्षित और 232 आवास एससी/वीसी को दिया जाना है। 418 पात्र लाभार्थियों के आवास स्वीकृत हुए हैं। इसमें 217 अनारक्षित को 201एससी/वीसी का चयन कर लिया गया है। शेष 175 सूची में सम्मलित नाम अभी तक कि जांच में अपात्र पाए गए। जिन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। इनमें 163 अनारक्षित, 12 एससी/वीसी कटैगिरी नाम शामिल था। इनकी मांगों को अस्वीकार करते हुए आवास को सरेंडर कर दिया गया है। पहले चरण में सचिव के माध्यम से पात्रों के घर जा कर ‘ग्राहक जानो’ की तर्ज पर भौतिक सत्यापन कराया जाता है। इनकी पात्रता तय करने के लिए दो-तीन गांवों में रहने वालों की जांच अलग से ग्राम पंचायत अधिकारियों से कराई जा रही है। दूसरे चरण में पिछले सात सालों में उस नाम से किसी को कोई आवास नहीं मिला है। इसका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। तीसरे चरण में 22 अगस्त को जारी प्रमुख सचिव पंचायत अनुराग श्रीवास्तव लखनऊ के शासनादेश के अनुसार पात्रों की सूची ग्रामसभा के सार्वजनिक स्थानों पर लिखाई जा रही है। इस बाबत बीडीओ जीतेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि लाभार्थियों का चयन और उनकी पात्रता कि जांच सावधानी से तेजी से कराई जा रही है। यह सब शत-प्रतिशत करने का पूरा जोर दिया जा रहा है। सख्त जांच प्रक्रिया में किसी तरह कि सिफारिश नहीं चलेगी। इसी का परिणाम है कि रजिस्ट्रेशन के बावजूद कई को पात्रता सूची से बाहर किया गया है।