तेजी से घट रही घाघरा, मुश्किलें वहीं
विक्रमजोत।
घाघरा का जलस्तर शनिवार शाम से तेजी से घट रहा है। रविवार सुबह 93.530 मिमी पर था जो शाम को 93.360 मिमी पर पहुंच गया। नदी दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रही है। बाढ़ खंड के लोगों का कहना है कि घटते क्रम में घाघरा बड़ा कटान कर सकती है।
इस समय विक्रमजोत-लोलपुुर बांध के तीन ठोकरों पर दबाव ज्यादा है। नवनिर्मित भदोई ठोकर का नोज रविवार सुबह बैठ गया। अवर अभियंता दयाशंकर सिंह, मकलूराम, जेबीएल श्रीवास्तव मौके पर कैंप कर रहे हैं। बताया कि नदी तेजी से घटने से कटान बढ़ेगी। रविवार को तीनों बैराजों से 1,53,560 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। केशवपुर, भदोई, रामनगर, खतमसराय, बाघानाला, मुनियावा, रिधौरा, बढौरा, रानीपुरकठवनिया, पठकापुर, फूलडीह, छतौना, संदलपुर व विक्रमजोत कस्बे के बाहर फैला बाढ का पानी वापस नदी कि तरफ बहने लगा है। हाईवे को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग से पानी हट गया है मगर सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गांवों में सिल्ट जमा हो गई है। सहजौरा पाठक अभी भी मैरुंड है। शरणस्थली बने वीडी बंधे पर एक ही झोपड़ी में पीड़ित बच्चों और पशुओं के साथ रह रहे हैं। सहजौरा के माझालाल, कन्हैयालाल, माताप्रसाद, दयाशंकर, झिनकन के पास झोपड़ी भी नहीं है।
नहीं मिल रही राहत सामग्री
जिला अधिकारी अरविंद सिंह के निर्देश के बावजूद भूसा, पॉलीथिन और टार्च जैसे जरूरी चीजें वितरित नहीं की गई हैं। पशुओं के चारे कि समस्या से लगभग सभी पीडित हैं। चारे की तलाश में पशुपालक दूर-दूर तक भटक रहे हैं। पिछले सप्ताह चारा लाने गए फूलडीह के हृदयराम कि मौत हो चुकी है। शनिवार को प्रति परिवार दो लीटर केरोसिन बांटा गया था साथ ही लंच पैकेट भी। लेखपाल, कानूनगो और प्रधान के सहयोग से रविवार को भी पैकेटबंद भोजन दिया गया। जिसमें पूड़ी, आलू परवल, सोया की सूखी सब्जी शामिल है। करीब एक हजार बाढ़ पीड़ितों में तीन सौ लोगों का भोजन बांटने दौरान राहत कर्मियों को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इंतजाम नाकाफी है। एसडीएम दिनेश कुमार का कहना है कि राहत कार्य से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। गांव से पानी हट गया है। पैकेटबंद भोजन कल तक और बांटा जाएगा। लोगों को तेल राशन का वितरण कराया जा रहा है।
बीमारी फैली, चार लोग भर्ती
डूब चुकीं फसलें, खेतों में मछली की बदबू से पूरा इलाका परेशान है। धान, सब्जी और चारे में तीन से चार फीट पानी भरने से पूरी तरह फसलें नष्ट हो चुकी हैं। पानी से भरे गांवों के मुख्य रास्ते पर दो दो फीट के गड्ढे हो चुके हैं। तेजी से संक्रमित रोग फैल रहा है। संदीप, सुरेमन, संजय, राजकुमार को तीन दिनों से लगातार बुखार और सरदर्द होने से फैजाबाद भर्ती होना पड़ा। पिछले वर्ष चुनाव होने कि वजह से नेताओं का काफी आना-जाना था मगर अभी तक किसी दल का कोई जनप्रतिनिधि नहीं गया है। इससे गांव वालों में गुस्सा है। हर्रैया एसडीएम का कहना है कि संक्रमण न फैले दवा का छिड़काव और पशुओं के टीकाकरण पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
राहत सामग्री बांटी गई
गायघाट। घाघरा नदी की बाढ़ के चलते कुदरहा क्षेत्र के दर्जनों गांव कई दिनों से घिरे थे। प्रशासन से महज आने जाने के लिए नाव की मदद ही मिल पायी थी। माझा कला निवासी रूदल, ओम प्रकाश, वेदप्रकाश ने बताया कि जब घाघरा ने आज कुछ राहत दिया तो राहत सामग्री भी मिली। जिसमें दो किलो आलू, पांच किलो चावल, एक किलो चना, एक किलो नमक शामिल है। जब कि उजाले के लिए मिट्टी तेल की जरूरत है। गंगापुर के जोखू, तुलसी, विद्यावती और राजकपूर ने कहा कि दो दिन से बंधे पर शरण लिए हैं। लेकिन खाने के नाम पर कुछ नहीं मिला है। महज कल शाम पन्नी मिली थी। महुवापार, गंगापुर, बैड़ारी ऐहतमाली, मईपुर, चिलवानिया भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं
सुविका बाबू के 400 परिवारों को सरकारी मदद का इंतजार
दुबौलिया। घाघरा नदी में आई बाढ़ से क्षेत्र के कई गांव के लोग प्रभावित हैं। अभी तक इन्हें सरकारी इमदाद नहीं मिल सकी है। गांव वाले अपनी रोजी रोटी, छोड़कर परिवार की देखभाल मुश्किल से कर पा रहे हैं। वीडी बांध के अंदर सुविका बाबू 20 दिनों से चारों तरफ से पानी से घिरा है। लोग नाव से दो किमी. चलकर गांव पहुंचते हैं। करीब चार सौ परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके साथ ही दिलासपुरवा, खलवा, खजांची पुरवा और देवरागंग बरार के लोगों को बाढ़ के चलते परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, विशुनदासपुर, पूरेमोतीराम, गोड़ियाना, माझा अखनपुर, भुअरिया, मलिकपर, बानेपुर, माझा बेगमगंज सहित अशोकपुर गांव के कई पुरवे पानी से घिरे है। साड़पुर, पारा, उंजी गांव के लोगों की फसल नष्ट हो गई। किसानों की फसल पानी में डूब जाने से आर्थिक नुकसान हुआ है।
स्पर की स्थिति नाजुक
वीडी बांध की सुरक्षा के लिए बने स्पर की स्थिति नाजुक है। पारा, चांदपुर और कटरिया में बने स्पर पर लगातार पानी का दबाव बना हुआ है। चांदपुर में बना स्पर बैठ गया था। अभी मरम्मत का कार्य चल रहा है। पारा में बांध संवेदनशील बना हुआ है। नदी बंधे से होकर प्रवाहित हो रही है। शनिवार को तीन स्पर बैठ गए थे। जिस गति से नदी कटान करती है। उसके अपेक्षा मजदूरों की संख्या कम है। जिस लेकर लोगों में गुस्सा है। अगर बांध को बचाने में लापरवाही बरती गई तो किसानों का काफी नुकसान होगा।