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अस्थाई बंधा कटने से किसानों के सपने पर फिरा पानी

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अस्थायी बंधा कटने से किसानों के सपने पर फिरा पानी
सरयू तट के निकट खेतों में सैकड़ों हेक्टेयर फसल डूबी
अमर उजाला ब्यूरो
कुदरहा। सरयू नदी की धारा को मोड़कर कटान रोकने की अस्थायी कवायद को झटका लगा है। यहां बनाया गया अस्थायी बांध पानी की तेज धारा के चलते टूट गया और सैकड़ों हेक्टेयर फसल डूब गई। इधर, खबर है कि नए सिरे से इस बंधे को दुरुस्त करने की कोशिश असफल हुई है। अब विभाग पानी घटने का इंतजार कर रहा है।
नौरहनी घाट के पास सरयू की धारा मोड़ने के लिए आठ करोड़ की परियोजना से काम शुरू किया गया। कलवारी-रामपुर तटबंध से पांच किमी दूरी पर सरयू की धारा मोड़ने के लिए चार मीटर ऊंचा और 25 से 30 मीटर चौड़ा अस्थायी बंधा बनाया गया था। जो तीन दिन पहले ही टूट गया। इसके चलते पानी कलवारी-रामपुर तक बंधे के पास पहुंच गया। सूचना मिलते ही मेइंदी घाट पर चल रहे काम को बंद कर पोकलैन और ड्रेजर मशीन नौरहनी घाट पर पहुंच गई है। जहां आधा दर्जन पोकलैन मशीन और ट्रैक्टर से टूटे हुए बांध पर काम शुरू हो गया है, लेकिन मंगलवार को विभाग की मंशा पर भी पानी फिर गया। क्योंकि पानी में निर्माण कार्य संभव नहीं हो सका है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि ड्रेजर मशीन से नदी के अंदर से बालू काटकर पाइप लाइन के माध्यम से टूटी हुई जगह पर गिराया जाएगा। इससे पानी रुकता जाएगा और बंधा बनाते जाएंगे यह सॉलिड मैटीरियल है।
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किसानों ने बयां किया दर्द
कुदरहा। क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के पास अचानक पानी के बहाव से दो दर्जन से अधिक किसानों की पूंजी डूबने का खतरा उत्पन्न हो गया है। खेतों में पानी फैलने से किसान हताश हैं। सरयू नदी को मोड़ने के लिए नौरहनी घाट पर बना अस्थायी बांध टूट जाना किसानों को आर्थिक क्षति का दर्द दे गया। किसानों का दर्द यह कि खरबूज, तरबूज, लौकी, तरोई, प्याज, सीताफल (कोहड़ा), खीरा सब तैयार हो गया था। जो एक सप्ताह के अंदर बेचने की तैयारी हो रही थी। लाखों रुपये खर्च करके फसल तैयार किए थे। वह भी सरयू की भेंट चढ़ गई। जयराम, फूलचंद, लालचंद, कोदई, रामनरेश, राम भवन, त्रिलोकी, बेचू, जवाहिर, रामवृक्ष, सीताराम, भालचंद्र, रामकिशन, धर्मराज, रामदास, हीरालाल, राम शबद सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि सरयू की धारा मोड़ने के लिए अस्थाई बाध नौरहनी घाट पर बना था। इससे कलवारी-रामपुर तटबंध के पास सरयू का पूरी तरह कम हो गया था। 50 बीघा से ज्यादा फसल लगी पूरी तरह तैयार थी। अचानक पानी के आ जाने से फसल बर्बाद हो गई है। खेत में घुटना भर पानी लगा हुआ है। किसान जय राम ने बताया कि सभी किसान दो माह से रात दिन इंजन चलाकर फसल की सिंचाई की थी।
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