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बाहर गए लोगों के कारण नहीं बढ़ पा रहा मतदान प्रतिशत

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वोट प्रतिशत बढ़ाने में बाहर गए लोगों की उदासीनता बाधा
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रोजगार के लिए बाहर हैं ग्रामीण परिवारों के तमाम सदस्य

अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। रोजगार के सिलसिले में जिले से बाहर गए मतदाताओं के कारण अब तक हुए चुनावों में मतदान के प्रतिशत में अपेक्षित वृद्धि नहीं सकी। पंचायत चुनाव में प्रत्याशी खुद कोशिश करके बाहर गए लोगों को बुलाते हैं लेकिन लोकसभा व विधानसभा चुनाव में वह लोग मतदान के प्रति उदासीन बने रहते हैं। यह उदासीनता मतदान प्रतिशत बढ़ाने में आड़े आती रही है। मतदाता जागरूकता के दौरान इस तरह के तथ्य सामने भी आ रहे हैं।
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सदर सीट पर 58 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इसी विधानसभा क्षेत्र के बूथों पर पंचायत चुनाव में कहीं 68 तो कहीं 70 प्रतिशत तक मतदान हुआ। ऐसा ही आंकड़ा महादेवा विधानसभा क्षेत्र के ज्यादातर बूथों पर देखने को मिला। सदर विधानसभा के कुछ हिस्से को छोड़ दें तो जिले की कुल साढ़े 24 लाख के करीब आबादी 1,246 ग्राम पंचायतों के करीब 37 सौ राजस्व गांवों में रहती है। वहां के कुछ सरकारी नौकरी और काम धंधा करने वालों को छोड़ दें तो ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग रोजगार के सिलसिले में बड़े औद्योगिक शहरों में हैं। कई तो पूरे परिवार के साथ वहां निवास करते हैं। कुछ ने तो मुंबई, दिल्ली आदि शहरों में बाकायदा मकान बनवाकर गृहस्थी बसा ली है और वहां की मतदाता सूची में उनके नाम भी शामिल हैं। वहां मतदान करते हैं या नहीं यह सवाल अलग है लेकिन यहां उनके मूल बूथ की मतदाता सूची में उसके नाम के आगे रिक्त स्थान रह जाता है। पिछले चुनाव में पांच से आठ प्रतिशत तक मतदान उन्हीं के कारण कम हुआ।
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जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. राजशेखर के अनुसार इस बार इसीलिए बच्चों और मनरेगा श्रमिकों को भी जागरूकता अभियान से जोड़ा गया है। ताकि बच्चे अपने माता-पिता को वोट देने को प्रेरित करें और श्रमिक अपने परिवार के सदस्यों के साथ मतदान में भागीदारी निभाने जरूर आएं।
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जिले के तमाम मतदान केंद्रों पर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मात्र 60 से 62 प्रतिशत तक मतदान हुआ जबकि पंचायत चुनाव में मत प्रतिशत का आंकड़ा 75 तक जा पहुंचा था। बीएलओ ने इसकी वजह तलाशनी शुरू की तो पता चला कि प्रधान और बीडीसी चुनाव में प्रत्याशियों ने किराया-भाड़ा देकर लोगों को बुलवाया था। मगर लोकसभा व विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी यह सब नहीं कर पाते।
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