रैन बसेरा: व्यवस्था को ही ठंड मार गई
जिला महिला अस्पताल में पड़ी हैं पांच चौकियां
कागज पर चस्पा किया गया कि यह रैन बसेरा है
जिम्मेदारों को कोस रहे तीमारदार, रतजगा मजबूरी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सर्दी के चलते पारा गिर रहा है। ऐसे में प्रशासन की ओर से ठंड को लेकर खासे इंतजाम भी किए जाते हैं। अलाव के अलावा रैना बेसेरा, कंबल वितरण आदि व्यवस्थाएं होती हैं। लेकिन दिसंबर में छह दिन बीत जाने के बाद भी रैन बसेरों को दुरुस्त नहीं किया गया। जिम्मेदारों को भी फिक्र नहीं ऐसे में तीमारदारों को रतजगा करनी मजबूरी बन गई है।
नगर पालिका परिषद की ओर से दो रैन बसेरा बनाए गए हैं। इनकी स्थित ऐसी है कि लोग जाने से ही परहेज करते हैं। जर्जर भवन, टूटी खिड़कियां, बदहाल प्रसाधन व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। यही हाल जिला महिला चिकित्सालय में स्थित रैन बसेरे का है। यहां भी गंदगी का बोलबाला है। रैन बसेरे के लिए जो भवन बना था, उसमें कई दफ्तर संचालित हो रहे हैं। यहां द्वितीय तल के एक कमरे में नाम मात्र की पांच चौकियां डाल दी गई हैं। बाहर एक छोटे से कागज पर चस्पा कर दिया गया है कि यह रैन बसेरा है। यहां भी प्रसाधनों की स्थित बदतर है। यहां आलम यह है कि मरीजों के साथ आए तीमारदार रैन बसेरों के बजाए इधर-उधर दुबके नजर आते हैं। यही नहीं कुछ तो ऐसे होते हैं, जो सारी रात जाग कर बिता देते हैं। जिला अस्पताल में कभी रैन बसेरा हुआ करता था, जिसकी जगह पर अब पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित कर दिया गया है। तीमारदार यहां खुली छत के नीचे रात बिताते नजर आते हैं। मिनी पीजीआई कहे जाने वाले कैली की भी यही दशा है। यहां भी कभी रैन बसेरा हुआ करता था, जो अब नहीं है। यहां पहुंचने के बाद लोग जिम्मेदारों को कोसते नजर आते हैं। उनके पास एक ही विकल्प बचता है, या तो वे वार्ड में मरीज के पास ही रहे, या फिर रतजगा करें।
जल्द ही सब बदला नजर आएगा : ईओ
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मणि भूषण त्रिपाठी कहते हैं कि जल्द ही सब बेहतर नजर आएगा। साफ-सफाई ध्यान दिया जा रहा है। एसआईसी महिला अस्पताल डॉ. एके सिंह कहते हैं कि हमारे यहां की स्थिति ठीक है, कमियों को दूर किया जाएगा। निदेशक ओपेक चिकित्सालय कैली डॉ मंजू शर्मा वैश्य कहती हैं कि पहले यहां रैन बसेरा था, लेकिन इस वक्त काम चल रहा है। जल्द ही यहां रैन बसेरा की सुविधा लोगों को मिलेगी। एसआईसी जिला अस्पताल डॉ मेजर ओपी सिंह कहते हैं कि ठंड बढ़ने पर व्यवस्था बनाई जाएगी।