फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फोटो... संयुक्त निदेशक सहित 11 अधिकारी,कर्मचारी गैरहाजिर

विज्ञापन
विज्ञापन
संशोधित रिपोर्ट...
विज्ञापन

संयुक्त निदेशक सहित 11 अधिकारी,कर्मचारी गैरहाजिर
- पांच वर्ष से प्रयोगशाला में नहीं हुआ एक भी टेस्ट
- 12 एकड़ में फैला है 1957 में स्थापित प्रदेश का पहला रिसर्च सेंटर
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सोमवार को क्षेत्रीय औद्यानिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान% का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम डा. राज शेखर यह देख दंग रह गए, कि तीन अधिकारी सहित 11 गैर हाजिर पाए गए। संयुक्त निदेशक और दो उप निदेशक मुख्यालय से बाहर बताए गए। जेडी को लखनऊ का भी अतिरिक्त प्रभार के कारण उन्हें मीटिंग में भाग लेने लखनऊ जाने को बताया गया। आश्चर्यजनक रूप से दोनों डिप्टी डायरेक्टर के अनुपस्थित पाए जाने को डीएम ने गंभीरता से लेते हुए उपस्थिति पंजिका में दर्ज किया।
उपस्थिति का क्रास चेक करने पर 33 कर्मचारियों में से 8 कर्मचारी और उक्त तीनों अधिकारियों में से सिर्फ एक कर्मचारी ने नियमानुसार अनुमति ली थी। डीएम ने सबको अनुपस्थित करते हुए संयुक्त निदेशक पर कार्रवाई की संस्तुति की।
विज्ञापन

निरीक्षण करने के दौरान डीएम हैरान रह गए जब देखा कि संस्थान की पांच वर्ष पहले स्थापित प्रयोगशाला में एक भी टेस्ट हुआ ही नहीं। सभी उपकरण उपयोग न करने के कारण खराब हो रहे हैं। क्षेत्रीय शोध और प्रशिक्षण संस्थान के लितए यह स्थिति वांछनीय नहीं है। कर्मचारियों ने अनुसंधान कार्य कृषि विश्वविद्यालय के हिस्से में बताया। जिसके कारण प्रयोगशाला निष्क्रिय है। जबकि
जिले की जलवायु औद्यानिक दृष्टि से अत्यंत उर्वर देखकर 1957 में पहले बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान की नींव रखी गई थी। संयुक्त निदेशक (जेडी) स्तरीय अधिकारी की देखरेख में उप निदेशक स्तर के दो अधिकारियों के सहयोग से बागवानी के क्षेत्र में नए रिसर्च करके किसानों को औद्यानिक वानिकी के प्रति प्रोत्साहन देने का प्लान था। इसी लिए संस्थान में बागवानी और उससे जुड़े विषयों में विभिन्न विभागों के लगभग 2000 कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान करने का पूरा प्रबंध किया गया था। 200 व्यक्तियों के लिए भोजनालय युक्त छात्रावास की भी इस केंद्र के परिसर में व्यवस्था है। लगभग 12 एकड़ में पुले संस्थान का 90 फीसद से अधिक हरित क्षेत्र है। 1275 से अधिक आम और 150 अमरूद और लीची की भी बाग है। इस संस्थान ने आम्रपाली जैसी आम की प्रजाति विकसित करके देश भर में डंका तो बजाया लेकिन जिस तरह से रिसर्च सेंटर में हाल के पांच वर्षों में कोई भी शोध नहीं किया गया, उससे निराशाजनक परिणाम प्रात्प हुए।
विज्ञापन

---------
गौरजीत पर होगा शोध
- आम की गौरजीत प्रजाति की लोकप्रियता को देखते हुए जिला प्रशासन ने उसकी विविधता पर शोध करने का निर्णय लिया है। इस अनुसंधान में व्यय जिला प्रशासन द्वारा वहन किया जाएगा। इसके लिए आईसीएआर संस्थान दिल्ली, पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय और एपीईडीए दिल्ली से अनुरोध करेंगे। सीडीओ, जेडी बागवानी और डीडी कृषि के कोआर्डिनेशन में यह शोध होगा। आम की गौरजीत प्रजाति अपनी खास विशेषताओं जैसे शीघ्र पकने और देसी स्वाद के कारण महंगा होने के बावजूद दूसरी अन्य आम की प्रजातियों से खास है। लेकिन यह जानकर डीएम हैरान रह गए कि आम की गौरजीत प्रजाति को बेहतर बनाने को लेकर कभी भी कोई औपचारिक शोध नहीं किया गया।
---------
वीरेंद्र
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें