नई तस्वीर : छतविहीन हैं 24,946 गरीब
ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में सामने आया सच
96,179 पात्र लाभार्थी कई योजनाओं से वंचित हैं
जिम्मेदारों ने नाम बीपीएल सूची में नहीं होना बताया
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की रोशनी हर गांव में पहुंचाने का दावा अधिकारी करते हैं। मगर इसकी हकीकत तब सामने आई है जब गांवों में सरकार की मंशा के अनुरूप खुली बैठकें की जा रही हैं। 24 जुलाई से शुरू बैठक में दो अगस्त तक के आंकड़े खासे चौंकाने वाले हैं। जिले में पात्रता के बावजूद 96,179 गरीब कई योजनाओं से वंचित हैं।
जिम्मेदार यह कहकर बचते फिर रहे हैं कि बैठक में चयनितों का नाम बीपीएल की सूची में नहीं है। सूची किसने बनाई, इसका खुलासा वे नहीं कर पा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक तमाम प्रक्रिया के बाद वर्ष 2011 में आर्थिक सर्वे के बाद बीपीएल सूची फाइनल हुई थी। इस सूची में हालांकि तब भी तमाम खामियां थीं, मगर तत्कालीन सरकार व जिम्मेदारों ने सूची का प्रकाशन कर दिया। सूची में तमाम पात्र इस नाते स्थान नहीं पा सके क्योंकि उनकी कहीं कोई सुनने वाला नहीं था। जिले की कुल करीब 25 लाख आबादी में से बीपीएल की प्रकाशित सूची के बाद भी 96,179 पात्र ऐसे पाए गए, जिनका नाम न तो किसी सूची में है और न तो सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से इन्हें कोई लाभ मिला है। यह अलग बात है कि अब उनकी बारी आ गई है, मगर कई वर्ष तक यह लाभ नहीं पा सके।
बैठक में मिले आंकड़ों पर गौर करें तो पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिलाएं, जिन्हें अब तक पेंशन का इंतजार है उनकी संख्या 7884 है, जबकि वृद्धावस्था पेंशन व किसान पेंशन की आस में 22,441 बैठे हैं। इसके अलावा दिव्यांग पेंशन का भी 3577 पात्रों को इंतजार है। अंत्योदय राशन कार्ड के हकदार 816 हैं तो पात्र गृहस्थी के लिए 23,510 का चयन अब तक नहीं हो सका था, जिससे उन्हें कम कीमत पर खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के 24,946 छतविहीन या तो खुले में अथवा फूस की झोपड़ी में रात बिताते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी क्षेत्र में डूडा अब तक इन आंकड़ों में एक भी पात्र नहीं दिखा सका है। जबकि आयुष्मान स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के पात्रों में 13,005 नए नाम जुड़े हैं। यह भी बीपीएल श्रेणी के हैं।