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भरथापुर कालीमंदिर से टकरा रही धारा

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भरथापुर कालीमंदिर से टकरा रही धारा
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विक्रमजोत।
जलस्तर में कमी के बाद भी घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के मुताबिक रविवार शाम तीन बजे नदी 93.29 सेंमी पर थी जो शनिवार से छह सेमी कम है। हाईफ्लर्ड लेवल के करीब पहुंचने से नदी का पानी आसपास के गांवों में फैला है। बरसात होने से भी कटान जल्दी होती है।
भरथापुर, कल्याणपुर, बाघानाला के बीच नदी सबसे तेज कटान कर रही है। यहां बना काली जी के मंदिर को धारा कभी भी चपेट में ले सकती है। इस वर्ष बाढ़ आने के पहले धारा करीब आधा किमी दूर थी जबकि यहीं से सटा बांध का अधिकांश हिस्सा डूब गया है। नदी बगल से कटान करती हुई मंदिर तक पहुंच गई है। यहां न तो बांध है और न ही पुराना ठोकर। बाढ़ प्रखन्ड भी बिना बांध के कोई बचाव और राहत कार्य नहीं करा रहा।
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भरथापुर के अवधू सिंह, मुन्ना, जग्गे सिंह, राम तिलक यादव ने बताया कि चार साल पहले घाघरा की धारा मंदिर के पास खड़े होने पर दिखती नहीं थी। सरयू मैया ने अब ठान लिया है कि मंदिर को गोद ले लेंगी। इसी मंदिर में गांव के सभी लोग शादी पूजा अनुष्ठान करने आते हैं। कल्याणपुर, भरथापुर और बाघानाला गांवों में विवाह के बाद जोड़े को पहले यही दर्शन करना होता है फिर घर जाते हैं। मांझा में जाने वाले सभी मत्था टेक कर ही जाते थे। सभी को अभय देने वाला काली मंदिर का वजूद भी अब खतरे में पड़ गया है।
चार साल में 200 हेक्टेयर जमीन समाई
घाघरा नदी में चार साल के भीतर करीब 200 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन समा चुकी है। 12 वर्षों से हल्के के लेखपाल कृष्णमुरारी ने बताया कि नदी ने उपजाऊ खेती छीन ली है। चार साल पहले जब बांध बनना शुरू हुआ तब नदी दो किमी दूर थी। सहजौरा पाठक और सीतारामपुर गांव तो देखते उजड़ गया है। नदी के कटान से हजारों की रोजीरोटी का सहारा ही छिन चुका है। सहजौरा पाठक गांव में लोग अपने घरों को उजाड़कर वीडी बांध पर बस रहे हैं क्योंकि दों धाराओं के बीच फंसी आबादी में अब कटान लग चुकी है।
चांदपुर-कटरिया बंधे में कटान
दुबौलिया। चांदपुर के पास बने दोनों स्पर पर पानी का दबाव बढ़ गया था। पश्चिम स्पर पर मजदूर बोरी व मिट्टी डालकर मजबूत कर रहे तो चांदपुर, कटरिया वीडी बंधे में नदी 600 मीटर की दूरी तक कटान करने लगी। इस देखकर बाढ़ खंड के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। उसे रोकने के लिए बल्ली पायलिंग करर्के इंट की बोरी डालकर कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा था। पारा गांव के पास बने स्पर के नोज धारा में बह गए। दो बड़े स्परों पर कार्य चल रहा है। नदी की धारा बंधे से होकर प्रवाहित हो रही है। कटरिया के पास बना पुराना स्पर पर भी दबाव बना हुआ है।
बांध पर शरण लिए परिवार हटाए गए
1998 से चॉदपुर-कटरिया बांध पर रह रहे दो दर्जन से अधिक परिवार में से 14 परिवारों को बांध के किनारे ग्रामसमाज की जमीन से अस्थायी तौर पर बसने का निर्देश रविवार शाम चार बजे नायब तहसीलदार नवीन प्रसाद ने दिया। लोग अपने छप्पर को हटाकर जमीन में रखने लगे। नायब तहसीलदार ने बताया कि बांध के किनारे नदी तेजी से कटान कर रही है। बोल्डर गिराने में परेशानी हो रही थी। इसके कारण बांध पर बसे लोगों को अस्थायी तौर पर ग्राम समाज की जमीन पर स्थानांतरित किया जा रहा है। ग्राम पंचायत आराजी डूही धर्मूपुर मुस्तहकम चकबंदी प्रक्रिया में है। इस नाते इन लोगों को स्थायी तौर पर नहीं बसाया जा सकता।
बाढ़ क्षेत्र में कैंप कर रहीं डाक्टरों की पांच टीमें
दुबौलिया और आरबीएसके की टीम मौके पर
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती।
घाघरा का उफान कभी बढ़ तो कभी घट रहा है। कटान जारी है। ऐसे में बाढ़ के पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इन स्थितियों को संज्ञान में लेकर स्वास्थ्य प्रशासन भी संजीदा है। दुबौलिया क्षेत्र के जिन गांव में बाढ़ का पानी आ गया है वहां स्वास्थ्य विभाग की पांच टीमें दुबौलिया स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारी डॉ. एमएम मिश्र के नेतृत्व में कैंप कर रहा है।
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प्रशासनिक अमला जहां बाढ़ बचाव के लिए जद्दोजहद कर रहा है वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी बीमारी न फैलने देने के निर्देश दे चुका है। इसके लिए तमाम आदेश निर्देश जारी कर रखे हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने बताया कि दुबौलिया क्षेत्र में स्वास्थ्य टीम बरसांव, टेढ़वा, धरमूपुर, करमी गोसांई ऊंजी मुस्तहकम व घोसियापुर में कैंप लगा रखा है। रविवार को टीम ने 132 लोगों की जांच-पड़ताल की। यहां किसी को संक्रामक रोग नहीं मिला। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सफाई व एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया है। जबकि स्वच्छ पानी के लिए क्लोरीन की गोलियां भी टीम ने बांटी। स्वास्थ्य को लेकर सक्रिय टीम लगातार निरोधात्मक कार्रवाई में जुटी है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मिश्र ने कहा कि पांचों टीमें दिन-रात राहत कार्य में जुटी हैं। कहा कि दवाओं की कहीं कोई कमी नहीं है।
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