विक्रमजोत। 84 कोसी परिक्रमा के पहले दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं का एक जत्था मखौड़ा धाम से रामगढ गांव होते हुए छावनी के रामरेखा नदी तट पर पहुंचा। यहां प्राचीन रामजानकी मंदिर पर श्रद्धालुओं व साधु-संतों ने डेरा जमा लिया है। यहां रात्रि विश्राम करने के बाद वे अगले पड़ाव के लिए निकलेंगे।
रामरेखा तट पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में देश के अलावा नेपाल, मॉरीशस श्रीलंका के साधु-संतों के साथ महिलाएं भी शामिल हैं। मंदिर पर साधू-संतों ने लिट्ठी-चोखा लगाकर भोग लगाया। स्थानीय लोगों के सहयोग से विश्व हिंदू परिषद और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भंडारे का आयोजन किया। जहां श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। रामरेखा मंदिर पर रुके श्रद्धालु की सेवा में सीएचसी विक्रमजोत के चिकित्सकों ने स्वास्थ्य कैंप लगाकर चोटिल और बीमार साधु-संतों का इलाज किया। माता प्रसाद सिंह ने अपना हलुुआ चना का स्टॉल लगाकर प्रसाद बांटा। मंदिर के महंथ दयाशंकर दास ने साधु-संतों के विश्राम की व्यवस्था की। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश मिश्रा, उपाध्यक्ष महेंद्र पांडेय, विधायक अजय सिंह, प्रधान कौशलेंद्र सिंह, राम चरण सिंह आदि ने सहयोग किया।
दूसरे दिन भी मखौड़ा में मेला
परशुरामपुर। क्षेत्र के मखौड़ा धाम मे चैत्र पूर्णिमा के दूसरे दिन शनिवार को भी मेला लगा। क्षेत्रीय लोगों ने मखौड़ा धाम पहुंचकर मनोरमा नदी मे स्नान कर रामजानकी मंदिर मे पूजन अर्चन किया। मेला परिसर मे लगी दुकानों पर लोगों ने खरीदारी किया तथा बच्चों ने झूले का लुत्फ उठाया। शनिवार को ही अयोध्या के संत गयादास और आरएसएस के सुरेन्द्र सिंह के नेतृत्व मे संतों ने 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत की। संत गयादास ने बताया जिस 84 कोस का भ्रमण संत समाज करता है वह भगवान श्रीराम का राज्य था। परिक्रमा मे इलाहाबाद, वनारस, अयोध्या, नैमिषारण्य, गया, जनकपुर व नेपाल के साधु-संत शामिल हैं।
हनुमान बाग चकोही में मेला आज
दुबौलिया। ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के द्वितीय पड़ाव स्थल हनुमान बाग चकोही में साधु-संतो के पहुंचने का सिलसिला रविवार की सुबह से शुरू हो जाएगा। जिस दौरान यहां मेले का आयोजन होगा। साधु-संतों का जत्था रविवार की रात्रि विश्राम कर दूसरे दिन यानी सोमवार को सरयू नदी पार कर अयोध्या जिले के शेरवा घाट पर स्थित श्रृंगी ऋषि आश्रम के लिए प्रस्थान करेंगे।
कुआनो मनवर संगम पर श्रद्धालुओं ने लगाए गोत
लालगंज। महर्षि उद्दालक मुनि की तपोभूमि के कुआनो मनवर संगम पर शनिवार की भोर में श्रद्धालुओं ने गोते लगाए। यहां स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने दान, पुण्य किया। पौराणिक मान्यता है कि यहां चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। रामायण में वर्णित है कि महर्षि उद्दालक मुनि की तपो भूमि कुवानो और मनवर के पवित्र संगम पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम माता सीता लक्ष्मण के साथ चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान किए थे। रात्रि विश्राम भी किया और लिट्टी-चोखा बनाकर खाया।