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कस्तूरबा में दूषित पानी पीना छात्राओं की मजबूरी

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कस्तूरबा में दूषित पानी पीने को मजबूर हैं छात्राएं
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फोटो
एक देसी हैंडपंप से चलता है विद्यालय का काम
पीला पड़ जाता है नल का पानी
अमर उजाला ब्यूरो
नगर बाजार। शिकायतें और आश्वासन के बीच कस्तूरबा की छात्राओं की गंदा और बदबूदार पानी पीना मजबूरी बन गई है। स्थापना के बाद से ही एक अदद देसी हैंडपंप से विद्यालय परिवार की व्यवस्था चल रही है।
विकास खंड बहादुरपुर के नगर बाजार में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में करीब 100 छात्राएं हैं। अभी तक इंडिया मार्क-2 हैंडपंप नहीं लग सका है। विद्यालय की वार्डेन नीलम पांडेय ने बताया कि 100 बच्चियों के सामने सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। नल से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत भी कई बार विभाग व जनप्रतिनिधियों से की, लेकिन कहीं और किसी ने सुना नहीं। दूषित जल पीने से यदि संक्रामक बीमारियों की गिरफ्त में कोई बालिका आ जाए तो विद्यालय वार्डेन ही दोषी ठहराया जाएगा। बताया कि विद्यालय के पास गंदगी का फैली है। आस पास के लोग भी कूड़ा फेंकते हैं। शिकायत के बाद भी समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है।
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इस बावत पूछे जाने पर ग्राम प्रधान के पति राम कृपाल यादव ने बताया कि जल्द ही विद्यालय के पास जमा कूड़ा-करकट साफ करा दिया जाएगा। सरकारी हैंडपंप की भी व्यवस्था की जाएगी। छात्राओं को कोई परेशानी नहीं होने पाएगी। वहीं विद्यालय की छात्रा बेबीराव, शशि गौतम, गायत्री व ममता आदि का कहना है कि नल का पानी थोड़ी देर रखने के बाद पीला पड़ जाता है। पानी का स्वाद भी अजीब लगता है। बदबूदार और गंदा पानी पीना यहां लोगों की मजबूरी है। कई बार तो बाहर से मंगा लिया जाता है। शिकायत वार्डेन से ही की जा सकती है। इन छात्राओं का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन का यहां के पड़ोसियों पर जैसे कोई असर ही नहीं है। बाउंड्री के बगल शौच, कूड़ा कचरा यहीं के लोग चुपके से फेंक जाते हैं। छात्राएं ऐसे माहौल में रहने पर मजबूर हैं।
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