अभी तीन दिन और कटौती झेलेंगे उपभोक्ता
टांडा में डैमेज जेब्रा कंडक्टर को ठीक करने का प्रयास विफल
बाढ़ व बारिश से मुसीबत, नया जेब्रा कंडक्टर डालने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। टांडा के नौरहनी घाट पर शुक्रवार सुबह जेब्रा कंडक्टर डैमेज होकर नदी में गिर गया। इसे लेकर पूरे दिन बिजली विभाग के आला अफसर, तकनीकी टीम व एनडीआरएफ उसे नदी से निकालने का प्रयास करते रहे, मगर 36 घंटे बाद भी वे विफल रहे।
अब विद्युत निगम यहां नया जेब्रा कंडक्टर स्थापित करेगा। मुख्य अभियंता की मानें तो अभी इसे स्थापित करने में तीन दिन लगेगा। यानी कटौती की मार अभी तीन दिन उपभोक्ता और झेलेंगे। विद्युत निगम ने 30 अगस्त को आपूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 31 अगस्त से शहरी क्षेत्र में 18 घंटे और ग्रामीण इलाके में 12 घंटे आपूर्ति की घोषणा की थी। लाइनों को दुरुस्त करने की कवायद अभी शुरू भी नहीं हुई थी कि सुबह अचानक टांडा के नौरहनी घाट स्थित 220 केवीए का संचालन करने वाला जेब्रा कंडक्टर टूट कर नदी में गिर गया। इसकी सूचना जैसे ही जिले में पहुंची निगम के मुख्य अभियंता इं. ओपी यादव मय दलबल मौके के लिए रवाना हो गए। इधर, राष्ट्रीय आपदा बचाव बल भी वहां पहुंच गया। खासी मशक्कत के बाद भी परिणाम शून्य रहा। अंत में शनिवार को बिजली निगम ने टांडा के उक्त घाट पर नया जेब्रा कंडक्टर लगाकर 220 केवी लाइन के आपूर्ति का निर्णय लिया है। मुख्य अभियंता इं. ओपी यादव ने बताया कि जेब्रा कंडक्टर को स्थापित करने के लिए समय चाहिए। बाढ़ व रुक-रुक कर हो रही बारिश इसमें बाधा डाल रही है। फिर भी तीन दिन में इसे दुरुस्त कर लिया जाएगा। तब तक गोरखपुर से आपूर्ति बहाल रखी जाएगी। यह जरूर है कि मंडल तीनों जिलों में अधिक कटौती होगी।
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कब तक झेलेंगे अघोषित कटौती
शहर में 18 घंटे भी नहीं मिल पा रही बिजली
ग्रामीणांचल का हाल बुरा, रात की नींद भी छिनी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। उमस और गर्मी झेल रहे शहरी उपभोक्ताओं का दर्द शनिवार को कटौती को लेकर छलक गया। विद्युत निगम ने 30 अगस्त को आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए 31 अगस्त से शहरी क्षेत्र में 18 घंटे व ग्रामीण इलाके में 12 घंटे आपूर्ति की घोषणा की थी। लेकिन यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं है। महीनों से कटौती की मार झेल रहे हैं। आखिर कब तक इसे झेलना पड़ेगा यह निगम के जिम्मेदार घोषित कर दें।
शहर के आवास विकास कॉलोनी निवासी निहारिका कहती हैं कि निगम के अधिकारी आएदिन जांच-पड़ताल करते हैं। चोरी रुक जाए इसका प्रयास जरूरी है, मगर कम से कम सप्लाई तो ठीक ढंग से दें। ताकि रात को चैन से सोया जा सके। यहां तो कब लाइट आएगी कब चली जाएगी, पता नहीं रहता।
शहर के उमेश कुमार कहते हैं कि दिन भर मेहनत के बाद रात को आराम करने में बिजली पिछले कई दिनों से खलल डाल रही है। व्यवस्थागत ढांचे को दुरुस्त करने के लिए रोज कटौती का फरमान निगम जारी कर देता है। कब तक व्यवस्था पूरी तरह ठीक होगी खुद उनको भी नहीं पता।
रामनगर की गृहणी रूबी कहती हैं कि शहर में तो फिर भी गनीमत है। गांवों की हालत बेहद दयनीय है। बिजली का न तो यहां कोई शेड्यूल है और न आपूर्ति का निर्धारण। कब तक रहेगी यह भी तय नहीं होता। ऐसे में ग्रामीण परेशान हैं।
शहर के पुराना डाकखाना निवासी गृहणी सीमा पांडेय ने कहा कि निगम के अधिकारी जांच अभियान चला रहे हैं, मगर उन्हें बिजली आपूर्ति की चिंता नहीं है। केवल कार्रवाई नहीं बल्कि बिजली उपलब्ध कराना भी जिम्मेदारी है।