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राजस्व न्यायलयों में मुकदमों को लगा अंबार

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बस्ती। सीएम के निर्देश के बाद भी राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण में तेजी नहीं दिख रही है। सबसे खराब हाल पुराने केसों का है। डीएम, एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार से लेकर नायब तहसीलदार के न्यायालयों में 7392 केस लंबित हैं। इनमें आधे से अधिक पिछले छह माह से और करीब 1500 पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इन मुकदमों का निस्तारण न होने की दशा में राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने अफसरों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही है। इन न्यायालयों में अधिकतर दाखिल खारिज, अभिलेख दुरुस्ती, बंटवारा और निशानदेही के मुकदमे लंबित हैं। सबसे अधिक 930 मुकदमे हर्रैया तहसीलदार न्यायालय में लंबित हैं। वहीं तहसीलदार न्यायिक हर्रैया न्यायालय में 780 और एसडीएम हर्रैया के यहां 700 केस पेंडिंग हैं। वहीं डीएम कोर्ट 197, एडीएम के यहां 176 मुकदमों को निस्तारण होना अवशेष है। मुख्य राजस्व अधिकारी के न्यायालय में 122 केस हैं।
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पांच साल से अधिक वाले 1500 केस लंबित हैं
राजस्व परिषद अध्यक्ष की ओर से सभी डीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सीएम के आदेश के बावजूद पांच साल पुराने मुकदमों के निस्तारण में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसे लेकर सीएम ने नाराजगी जताते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही है। इसमें कहा गया है कि पूरे प्रदेश में पांच साल या उससे पुराने 9438 मुकदमे लंबित हैं। पत्र में अधिकारियों को नियमित सुनवाई करने के आदेश दिए गए हैं। वैसे जनपद में पांच साल से अधिक पुराने वाले लगभग 1500 मामले लंबित हैं। इनमें अकेले हर्रैया में 450 से अधिक मुकदमे हैं।

पीठासीन अधिकारियों का है अभाव
सरकार ने पुराने वादों के निस्तारण के निस्तारण के लिए प्रति दिन सुनवाई करने का आदेश तो जारी कर दिया मगर सुनवाई हो कैसे? इसका उपाय नहीं बताया। वर्तमान में जिले में14 नायब तहसीलदार के सापेक्ष में मात्र दो कार्यरत है, जबकि सबसे अधिक मुकदमे इन्हीं न्यायालयों में लंबित हैं। दो तहसीलदार न्यायिक की कमी है। चार के स्थान पर एक भी एसडीएम न्यायिक की तैनाती नहीं हैं।
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शासन ने रिक्त पदों को भरने की मांग की गई-डीएम
डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि पीठासीन अधिकारियों की कमी के चलते मुकदमों का निस्तारण अपेक्षित नहीं हो रहा है। बताया कि शासन से रिक्त पदों को भरने की मांग की गई है। साथ ही उन्होंने यह दावा किया कि अन्य की अपेक्षा जनपद में पुुराने केस कम संख्या में लंबित हैं।
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