बुखार का प्रकोप, कराह रहे बच्चे
बस्ती।
मौसम में उतराव-चढ़ाव से सबसे अधिक बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। उल्टी, दस्त, बुखार, फोड़े-फुंसी से ग्रसित बच्चे जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी, सीएचसी में पहुंच रहे हैं। जेई, एईएस के लिए मुफीद इस मौसम में डॉक्टरों ने भी बीमारियों पर चेताया है। तत्काल नजदीकी चिकित्सकों से संपर्क करने की सलाह दी है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में इस समय सर्वाधिक मरीज उल्टी, दस्त और बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। चिल्ड्रेन वार्ड में कई बच्चे भर्ती भी किए गए हैं। जिला अस्पताल में भर्ती 14 वर्षीय अंकित पुत्र कन्हैयालाल निवासी परसामती पुरवा मुंडेरवा को बुखार आ रहा था। स्थानीय स्तर पर ठीक न होता देखकर परिवार वालों ने भर्ती करा दिया। परिवार के लोगों कहना है कि पहले उल्टी, दस्त हुई, जिसके बाद बुखार आ गया। 10 वर्षीय अंश पुत्र अनिल कुमार भुअर निरंजनपुर की भी हालत यही है। दो दिन पहले परिवार के लोगों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। कुसुम (08) पुत्री फुलवारे निवासी धनघटा संतकबीरनगर, मोहम्मद अयान (08) पुत्र सद्दाम हुसैन निवासी छपिया छिनौता संतकबीरनगर, चंचल (09) पुत्र गिरधारी समसपुर लालगंज भी भर्ती किए गए हैं।
महसो प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में बुखार, उल्टी, दस्त की बाढ़ सी आ गई है। तकरीबन हर निजी चिकित्सकों के यहां पीड़ितों की भीड़ लगी रहती है। कुछ एक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अलगा निवासी आलोक का पूरा परिवार ही पीड़ित है जिसमें खुद आलोक, तीन वर्षीय बेटा अनमोल, पत्नी बबिता (30) व बेटी पीहू (6 माह) बुखार से ग्रसित हैं। सभी का इलाज पीएचसी चिलवनियां के बाद पीहू, अनमोल और आलोक जिला अस्पताल में भर्ती हुए। गांव की ही रेखा पत्नी पवन भी पीड़ित हुई हैं।
70 प्रतिशत बुखार के मरीज: डॉक्टर
मौसम कभी सर्द तो कभी गर्म है। इसका प्रभाव सीधे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वातावरण में आर्द्रता बढ़ने के कारण वायरल फीवर के वायरस तेजी से पनप रहे हैं। इन दिनों सत्तर प्रतिशत मरीज बुखार के ही अस्पताल में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि शनिवार को ओपीडी में 160 मरीजों में से 112 वायरल फीवर के मरीज आए थे। यही हाल हर दिन का है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव कहते हैं मौसम का सर्वाधिक असर बच्चों पर है। चूंकि बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में वायरल फीवर की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
सावधानियां बड़ा उपचार है: डॉ. अजय
संक्रामक बीमारियों के प्रकोप की बाबत डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि सबसे ज्यादा जरूरी है कि पानी उबाल कर पिएं। साग, सब्जियों को ठीक से धुलकर ही पकाना चाहिए। खाना खाने के पहले साबुन से हाथ धुलना जरूरी है। यह भी ध्यान रखें कि बासी भोजन कतई न करें। संभव हो तो शौच के लिए बाहर न जाएं। नाखून को बड़ा न होने दें। बुखार की शिकायत पर तत्काल नजदीकी डॉक्टर से मिलें।
ओपीडी के बुखार पीड़ितों की भर्ती जरूरी
बस्ती।
सरकारी अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों को छिटपुट दवाएं देकर चिकित्सक रवाना कर देते थे। अब ऐसा संभव नहीं हो सकेगा। बुखार पीड़ित मरीजों को हर हाल में भर्ती करना होगा।
इतना ही नहीं इलाज के बाद ठीक होने के एक सप्ताह तक स्वास्थ्य महकमा की विशेष टीम इसकी मानीटरिंग भी करेगी। विभाग के आला अधिकारी इस नए नियम को लागू कर एक तीर से दो निशाना साध रहे हैं। एक तो लोगों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल होगी दूसरे काम बढ़ेगा तो सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर भी रोक लग जाएगी।
जेइ-एईएस को लेकर गंभीर शासन की पहल के बाद अब प्रशासन व स्वास्थ्य महकमा इससे निपटने की रणनीति में जुटा है। इसके तहत जहां चिह्नित क्षेत्रों में गंबूजिया मछली पालने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है वहीं उक्त बीमारी का प्राथमिक लक्षण बुखार को लेकर भी स्वास्थ्य महकमा संजीदा हो गया है। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी के प्राथमिक लक्षण को लेकर रणनीति तय कर ली है। जिले भर के सभी सरकारी चिकित्सालयों में किसी भी वजह से बुखार पीड़ित मरीजों को भर्ती करना अनिवार्य कर दिया गया है। यही नहीं निर्देश तो यह भी है कि सभी ईटीसी और जिला और ओपेक चिकित्सालय कैली के जेई व एईएस वार्डों के 75 प्रतिशत बेड पर मरीजों की भर्ती होना अनिवार्य है। ऐसा न होने की दशा में संबंधित का वेतन रोक दिया जाएगा। बुखार के लिए जिला चिकित्सालय और ओपेक चिकित्सालय कैली में फीवर हेल्प डेस्क व फीवर ट्रैकिंग टीम गठित होगी। फीवर हेल्प डेस्क का कार्य जहां बुखार पीड़ितों की सहायता करेगी वहीं ट्रैकिंग टीम बीमार के ठीक हो जाने के बाद सप्ताह भर तक उनकी मानीटरिंग करेगी, जिससे दोबारा बुखार न होने पाए।
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि बुखार ही डेंगू, जेई और एईएस का प्राथमिक लक्षण है। चूंकि कभी-कभार बुखार होने के बाद जांच में कुछ नहीं मिलता और बाद में यही वायरस सक्रिय होकर मरीज की स्थिति गंभीर कर देते हैं। ऐसे में यह निर्देश दिया गया है कि बुुखार पीड़ित हर मरीज को भर्ती करना अनिवार्य होगा, जिससे उक्त रोगों पर प्राथमिक स्तर पर ही नियंत्रित कर दिया जाए। कहा कि निर्देश को प्रभावी कर दिया गया है।