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फोटो... पाताल में जल,नल-ट्यूबवेल फेल

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भू-जलस्तर गिरा, नल-ट्यूबवेल फेल
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- रिचार्ज सिस्टम को लेकर विभाग, संस्थाएं चुप
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। जल्द कोई ठोस उपाय नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब जबरदस्त जल संकट का सामना करना होगा। भूगर्भ जल का अंधाधुंध इस्तेमाल और जल संचयन को लेकर बेरुखी आग में घी का काम कर रही हैं। 28 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिले की आधी आबादी को इसके मायने तक नहीं पता। जबकि उनमें से कइयों के घरेलू हैंडपंप और टुल्लू पंप पानी देना बंद कर चुके हैं। यह दिक्कत कुआनों व मनोरमा नदी से सटे गांवों में इन दिनों ज्यादा है। डीएम डॉ. राजशेखर ने इस दिशा में पहल करते हुए कई बार नदियों का वृहद सफाई अभियान शुरू किया।
आंकड़ों के आइने में देखें तो जिले में भूगर्भ जल की उपलब्धता 87 हजार 457 हेक्टेयर मीटर है। हैंडपंप, ट्यूबवेल, टुल्लू, समरर्सिबल, धुलाई सेंटरों, मिलों आदि के जरिए करीब 70 हजार हेक्टेयर मीटर भूजल का दोहन किया जा रहा है।
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विभागीय स्तर पर भविष्य में सिंचाई आदि के लिए 14 हजार 705.55 हेक्टेयर मीटर जल का भंडार है। जिसमें से प्रतिवर्ष 79.92 वार्षिक दर से दोहन हो रहा है। अर्थात रिजर्व भंडार में से लगभग 80 हेक्टेयर मीटर की प्रतिवर्ष हो रही कमी खतरे का संकेत है। इसके घटने का मतलब है उपभोग में बढ़ोतरी जिसकी भरपाई रिचार्ज सिस्टम को सुदृढ़ करके की जानी चाहिए। यदि इसमें चूक हुई तो पीने और फसलों की सिंचाई के लिए बूंद-बूंद को तरसना पड़ जाएगा।
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बोरिंग-नल की गहराई बढ़ी
- आमतौर पर 35 से 40 फीट पर मिलने वाला भूगर्भ जल अब 55 फीट पर मिल रहा है। शुद्घ पेयजल के लिए ग्राम पंचायतों में सरकारी हैंडपंप लगाए गए हैं। आमतौर पर इनकी बोरिंग 125 से 150 फीट की गहराई पर होती है। करीब पांच लाख घरों में छोटे हैंडपंप लगे हैं। जलस्तर का प्रथम तल नीचे जाने के बाद बोरिंग की गहराई बढ़ानी पड़ रही है।
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विशेषज्ञ बोले-सिस्टम में दिक्कत
भूगर्भ जल के विशेषज्ञ डाक्टर मंजीत सक्सेना का कहना है कि रिचार्ज करने के लिए जलसंचय बेहद जरूरी है। मनरेगा के तहत गांवों में पुराने तालाबों के जीर्णोद्घार के अलावा नए तालाब खुदवाने चाहिए थे। करोड़ों रुपये खर्च करके तालाब खुदवाए भी गए, लेकिन कहीं इनकी गहराई कम है तो कहीं बिजली की समस्या के कारण पानी भरने की दिक्कत है। सिंचाई के लिए भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन और उस अनुपात में जल संचयन की व्यवस्था नहीं होने से दिक्कतें बढ़ी हैं।
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भूगर्भ जल उपलब्धता व उपभोग
- कुल भूगर्भ जल उपलब्धता - 87457.16 हेक्टेयर मीटर
- वार्षिक दोहन - 69970.28 हेक्टेयर मीटर
- भविष्य में सिंचाई के लिए भूगर्भ जल की उपलब्धता - 14705.55 हेक्टेयर मीटर
- भूगर्भ जल विकास दर - 79.92
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