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चुनाव: नौ की जमानत जब्त, महज दो प्रत्याशियों की बची

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चुनाव : 11 में से नौ प्रत्याशी की जमानत हुई जब्त
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- सिर्फ आठ फीसदी मत ही पा सके कांग्रेस उम्मीदवार
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। प्रचंड मोदी लहर में 99 फीसदी उम्मीदवारों की लुटिया डूब गई। कांग्रेस सहित 11 में से नौ उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में नाकाम रहे। त्रिकोणीय संघर्ष का दावा करने वाले कांग्रेस उम्मीदवार भी वोट प्रतिशत की दहाई आंकड़े को नहंी छू पाए।
चुनाव में आंकड़ों को देखें तो इस बार कुल 10 लाख 48 हजार 885 मत यानी 56.6 फीसदी वोट पड़े। इस तरह प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए 10 प्रतिशत यानी 01 लाख चार हजार मत प्राप्त करना जरूरी था। इसमें से जीत दर्ज करने वाले भाजपा के उम्मीदवार हरीश द्विवेदी को 04 लाख 69 हजार 214 ( 44.73 प्रतिशत ) और महागठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार राम प्रसाद चौधरी 04 लाख 37 हजार 641 (41.72 प्रतिशत) को मत मिले। इन दो के अलावा किसी अन्य की जमानत नहीं बची। कांग्रेस के राजकिशोर सिंह को कुल 86 हजार 453 (08.25 प्रतिशत) मत ही मिले। इसके अलावा बाकी उम्मीदवारों को इससे भी कम मत मिले।
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क्या होती है जमानत राशि
किसी भी प्रत्याशी को चुनाव आयोग के पास एक निर्धारित धनराशि जमानत के तौर पर जमा करनी होती है। यदि प्रत्याशी कुल पड़े वोटों के 10 फीसदी से कम वोट प्राप्त करता है तो ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग उसकी जमानत राशि जब्त कर लेता है। जबकि 10 फीसदी से अधिक वोट पाने की स्थिति में उस धनराशि को वापस कर देता है। सामान्य वर्ग के प्रत्याशी को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए 25 हजार रुपये जबकि एससी व एसटी वर्ग के प्रत्याशी को 12 हजार 500 रुपये जमानत राशि के तौर पर चुनाव आयोग के पास जमा करानी पड़ती है। वर्ष 2009 से पहले यह धनराशि क्रमश: 10 हजार और पांच हजार रुपये थी। नियम यह भी है कि जब किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो जाता है या वह अपनी उम्मीदवार वापस ले लेता है तो यह राशि लौटा दी जाती है। किसी उम्मीदवार की वोटिंग शुरू होने से पहले मौत हो जाती है तो यह राशि परिवारजन को वापस मिल जाती है।
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